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ममलेश्वर, सोमेश्वर में मनाई बूढ़ी दिवाली
Updated Fri, 07 Dec 2018 10:16 PM IST
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करसोग (मंडी)। दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को पूरे भारत में मनाई जाती है, लेकिन करसोग के ममलेश्वर महादेव और सोमेश्वर में दिवाली एक महीने बाद मनाई जाती है। इसे यहां पर बूढ़ी दिवाली कहा जाता है। ममलेश्वर में यह पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वीरवार रात यहां पर पुरानी परंपराओं का निर्वहन करते हुए सैकडों श्रद्धालुओं ने एकत्रित होकर यह पर्व मनाया और सभी की सुख समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पर्व का आगाज देव अल्याड़ी के कारदारों और देव गूरों के पहुंचने के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने हाथों में मशाल लेकर दिवाली हो दिवाली बोलकर वाद्य यंत्रों की धुनों पर पारंपरिक गायन किया। इसके चलते यहां ममेल नगरी भक्तिमय हो गई। महादेव मंदिर के प्रांगण में एक विशाल धूना जलाया गया। इस धूने के चारों तरफ देव रथों का नृत्य करवाया गया। श्रद्घालुओं ने भी धूने के चारों तरफ नाचते हुए एक दूसरे से खुशी का इजहार किया। देव गूरों ने दहकते अगारों पर चलकर क्षेत्र और जनता की सुख समृद्धि की भविष्यवाणी की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने हाथों में मशाल लेकर देवगूरों के साथ ममेल नगरी की परिक्रमा की। शुक्रवार को ममलेश्वर में एक भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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