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करसोग क्षेत्र की सवा लाख की आबादी के लिए मात्र 70 बसें
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अमर उजाला ब्यूरो
करसोग (मंडी)। बसों की कमी के चलते करसोग में सुबह-शाम हालात बेकाबू हो रहे हैं। हालात यह हैं कि ओवरलोडिंग पर जारी सरकारी फरमान के बाद तो यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। करसोग की बात करें तो यहां करीब 1.25 लाख की आबादी के लिए सरकार के पास मात्र 70 के करीब बसें हैं। इनमें निजी बसों की संख्या भी शामिल हैं। इस तरह से करसोग खंड में 1750 की आबादी पर औसतन एक बस है। करसोग डिपो में कुल 50 बसें है। इनमें भी औसतन 5 बसें तो रिपेयर के लिए खड़ी रहती हैं। इतनी बड़ी आबादी के लिए यह बसें बहुत कम हैं। खासकर सुबह और शाम ऑफिस और स्कूल के समय हालात बेकाबू हो जाते हैं। देखा जा रहा है कि पहले बसों में सीट प्राप्त करने के लिए लोगों के बीच में अफरा-तफरी मच रही है। बाद में जब बसें फुल हो जाती हैं तो लोगों और बस चालक-परिचालकों में झगड़े हो रहे हैं। अब ये बस चालक रास्ते में बसों के इंतजार में खड़ी सवारियों को भी नहीं बिठा रहे हैं। इससे लंबे रूट की सवारियों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार ने स्कूली छात्रों के लिए बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी है। करसोग में एचआरटीसी ने छात्रों को 2,899 फ्री पास जारी किए हैं, लेकिन अब ओवरलोडिंग न करने के आदेशों के बाद इन सभी छात्रों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। इसके अलावा कॉलेज के छात्रों से पैसे लेकर अलग पास जारी किए गए हैं। एचआरटीसी के पास स्कूलों के लिए अलग से बसें चलाने का भी कोई प्रावधान नहीं है। लोगों का कहना है कि अगर ओवरलोडिंग की समस्या को खत्म करना है तो इसके लिए पहले करसोग डिपो में बसों की संख्या को बढ़ाना होगा। उधर, इस बारे में करसोग बस डिपो के वर्क्स मैनेजर शमशेर सिंह का कहना है कि हेड ऑफिस को समय-समय पर बसों की संख्या बढ़ाने की डिमांड भेजी जाती है। जैसे ही बसें मिलेंगी, इनको पहले अधिक ओवरलोडिंग वाले रूटों पर चलाया जाएगा।
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करसोग (मंडी)। बसों की कमी के चलते करसोग में सुबह-शाम हालात बेकाबू हो रहे हैं। हालात यह हैं कि ओवरलोडिंग पर जारी सरकारी फरमान के बाद तो यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। करसोग की बात करें तो यहां करीब 1.25 लाख की आबादी के लिए सरकार के पास मात्र 70 के करीब बसें हैं। इनमें निजी बसों की संख्या भी शामिल हैं। इस तरह से करसोग खंड में 1750 की आबादी पर औसतन एक बस है। करसोग डिपो में कुल 50 बसें है। इनमें भी औसतन 5 बसें तो रिपेयर के लिए खड़ी रहती हैं। इतनी बड़ी आबादी के लिए यह बसें बहुत कम हैं। खासकर सुबह और शाम ऑफिस और स्कूल के समय हालात बेकाबू हो जाते हैं। देखा जा रहा है कि पहले बसों में सीट प्राप्त करने के लिए लोगों के बीच में अफरा-तफरी मच रही है। बाद में जब बसें फुल हो जाती हैं तो लोगों और बस चालक-परिचालकों में झगड़े हो रहे हैं। अब ये बस चालक रास्ते में बसों के इंतजार में खड़ी सवारियों को भी नहीं बिठा रहे हैं। इससे लंबे रूट की सवारियों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार ने स्कूली छात्रों के लिए बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी है। करसोग में एचआरटीसी ने छात्रों को 2,899 फ्री पास जारी किए हैं, लेकिन अब ओवरलोडिंग न करने के आदेशों के बाद इन सभी छात्रों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। इसके अलावा कॉलेज के छात्रों से पैसे लेकर अलग पास जारी किए गए हैं। एचआरटीसी के पास स्कूलों के लिए अलग से बसें चलाने का भी कोई प्रावधान नहीं है। लोगों का कहना है कि अगर ओवरलोडिंग की समस्या को खत्म करना है तो इसके लिए पहले करसोग डिपो में बसों की संख्या को बढ़ाना होगा। उधर, इस बारे में करसोग बस डिपो के वर्क्स मैनेजर शमशेर सिंह का कहना है कि हेड ऑफिस को समय-समय पर बसों की संख्या बढ़ाने की डिमांड भेजी जाती है। जैसे ही बसें मिलेंगी, इनको पहले अधिक ओवरलोडिंग वाले रूटों पर चलाया जाएगा।