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देव हुरंग नारायण के वजीर देव पशाकोट शिवरात्रि को रवाना
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मंडी। चौहारघाटी के प्रमुख देवता देव पशाकोट अपने ढोल-नगाड़ों के साथ अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए रविवार सुबह अपने मूल स्थान से रवाना हो गए हैं। यह देव हुरंग नारायण के वजीर कहलाते हैं। देवता चार मार्च को मंडी पहुंचेंगे। पहुंचते ही देवता अपने कारदारों के साथ देव माधव राय मंदिर में हाजिरी भरेंगे। देव अपने मंदिर से 80 किलोमीटर पैदल चलकर अपने कारदारों, देवलुओं और बजंतरियों के साथ नौ दिन तक पैदल यात्रा कर शिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी पहुंचते हैं। देवता प्राचीन समय से ही पैदल यात्रा करते हैं। देव पशाकोट चौहारघाटी के प्रसिद्ध देवता हैं। शिवरात्रि महोत्सव में उनका भी विशेष स्थान रहता है। चौहारघाटी के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जनजीवन में आज भी उनका सीधा दखल है। देव पशाकोट चौहारघाटी में पहाड़ी वजीर के नाम से जाने जाते हैं। देवता का मंदिर मंडी से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देव पशाकोट को धनी देवता भी कहा जाता है। बरोट-टिक्कन में भी देव पशाकोट का एक सुंदर मंदिर है और घने देवदार वृक्षों के नीचे लकड़ी का बना हुआ है। दूर-दूर से लोग कामनाओं की पूर्ति के लिए यहां नतमस्तक होते हैं। देवता शिवरात्रि में राजाओं के समय से शिरकत करने आते हैं और पैदल अपने देवलुओं के साथ मंडी शिवरात्रि महोत्सव में पहुंचते हैं। देवता अपने कारदारों के साथ रास्ते में ही रात्रि विश्राम करते हैं। जोगिंद्रनगर मेला इनके पहुंचने से ही शुरू होता है और मंडी शिवरात्रि की जलेब में अहम स्थान रहता है। देवता के पुजारी कृष्ण चंद, गूर नरोत्तम राम, प्रेम सिंह, दुमंच डागू राम, नरेश कुमार और अच्छर सिंह ने बताया कि देवता रविवार सुबह नौ बजे अपने मंदिर से बाहर निकल गए हैं। देवता के रात्रि विश्राम वरधान, झंटिगरी, गवाहन, उरला, मसवाहण, डलाह, माणा, टांडू में और 4 मार्च को मंडी में पुरानी मंडी से अपने चौहारघाटी के 9 देवताओं के साथ माधव राय मंदिर में हाजिरी भरेंगे।
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