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मासूम की मौत के बाद जागा अस्पताल प्रशासन
Updated Sat, 16 Dec 2017 10:57 PM IST
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Doctor
मंडी। एक मासूम की मौत के बाद जोनल अस्पताल मंडी को चूक का अहसास हुआ है। यहां पर अरसे से चली आ रही अव्यवस्था आखिर बदली और मरीजों को बड़ी राहत मिली। अस्पताल में बदली व्यवस्था के बाद शनिवार को गर्भवती महिलाओं और मरीजों के चेहरों पर खुशी की झलक दिखी। वर्षों से अस्पताल में चल रही अव्यवस्था के आलम से गायनी वार्ड में गर्भवती महिलाओं को जमीन पर ही ठंडे फर्श पर लेटना पड़ रहा था। समय: 03:20 बजे। स्थान गायनी वार्ड। फर्श इस तरह चमक रहे हैं, मानों सफाई सुबह नहीं अभी ही हुई हो। फिनाइल की तीव्र दुर्गंध आ रही है। शनिवार को माहौल कुछ बदला-बदला दिखा। गायनी वार्ड की गैलरी में एक भी मरीज फर्श पर नजर नहीं आया। परिजनों अनूप लाल ठाकुर, अनिल कुमार, गरजो देवी, कमला देवी, ममता देवी और शिव कुमार ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन की कोताही के कारण बिस्तर तो दूर कमरे में दाखिला नहीं मिल रहा है। अमर उजाला ने जिस तरह से इस मसले को उठाया उससे प्रबंधन की आंखें खुली हैं। अब जोनल अस्पताल में आए मरीजों और गर्भवती महिलाओं को बेड की सुविधा मिल गई है। इससे पहले मरीजों और तीमारदारों को काफी अरसे से यह समस्या आ रही थी। उनकी यह समस्या और कौन सुन सकता था।
आते ही जमीन पर मिली थी जगह : अनूप
बंजार के अनूप लाल ठाकुर ने कहा कि शुक्रवार सुबह वह अस्पताल पहुंचे। जब उनकी बेटी एडमिट हुई तो उन्हें जमीन पर ही जगह मिली। प्रसव के दौरान उन्हें मजबूरन जमीन पर ही अपना बिस्तर लगाना पड़ा। इससे जहां उन्हें ठंड का सामना करना पड़ा। वहीं, सामान को सुरक्षित रखने में काफी दिक्कतें आईं।
ठंड से मिली राहत : अनिल
बैहना के अनिल कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी पिछले दो दिनों से दाखिल थीं, लेकिन बेड न मिलने के कारण उन्हें ठंड में ही गायनी वार्ड के बाहर जमीन पर बिस्तर लगाना पड़ा। इससे उन्हें काफी परेशानी आई। अब जब प्रशासन पर सवाल उठे तो उन्हें बेड की सुविधा मिल गई है। इसके लिए अमर उजाला का तहे दिल से आभारी हैं।
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प्रसव के बाद मिला बेड : गरजो
रामनगर की गरजो देवी ने कहा कि उनकी पोती की डिलीवरी बीते दिन हुई थी, लेकिन उन्हें प्रसव के बाद ही बेड की सुविधा मिली। इससे पहले उन्हें एक दिन जमीन पर ही बिस्तर लगाना पड़ा।
तीन दिन के बाद मिला बेड: कमला
कोटली के सुकाकून गांव की कमला देवी ने कहा कि उनके साथ उनकी भाभी माया और उनके पति आए हुए हैं। तीन दिन के बाद बेड की सुविधा मिली। इससे पहले गायनी वार्ड के बाहर उन्हें जमीन पर ही बिस्तर लगाकर गुजारा करना पड़ा।
चार दिन के बाद मिला बेड : ममता
सलापड़ की ममता देवी ने कहा कि उन्हें चार दिन तक गायनी वार्ड के बाहर जमीन पर ही बिस्तर लगाकर लेटना पड़ा। इसके चलते उन्हें ठंड के मौसम के काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ठंड से ठिठुरते हुए उन्हें चार दिन तक बेड की सुविधा नहीं मिली। चार दिन के बाद ही उन्हें बेड की सुविधा मिली है।
ठंड में परेशानी से मिली राहत : शिव
टिहरी के शिव कुमार ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी को पिछले दो दिनों से अस्पताल में एडमिट करवाया है। ठंड के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही थी। लेकिन अमर उजाला की ओर से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने पर ही समस्या का हल हुआ है। अब उन्हें बेड की सुविधा मिल गई है।
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आते ही जमीन पर मिली थी जगह : अनूप
बंजार के अनूप लाल ठाकुर ने कहा कि शुक्रवार सुबह वह अस्पताल पहुंचे। जब उनकी बेटी एडमिट हुई तो उन्हें जमीन पर ही जगह मिली। प्रसव के दौरान उन्हें मजबूरन जमीन पर ही अपना बिस्तर लगाना पड़ा। इससे जहां उन्हें ठंड का सामना करना पड़ा। वहीं, सामान को सुरक्षित रखने में काफी दिक्कतें आईं।
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ठंड से मिली राहत : अनिल
बैहना के अनिल कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी पिछले दो दिनों से दाखिल थीं, लेकिन बेड न मिलने के कारण उन्हें ठंड में ही गायनी वार्ड के बाहर जमीन पर बिस्तर लगाना पड़ा। इससे उन्हें काफी परेशानी आई। अब जब प्रशासन पर सवाल उठे तो उन्हें बेड की सुविधा मिल गई है। इसके लिए अमर उजाला का तहे दिल से आभारी हैं।
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प्रसव के बाद मिला बेड : गरजो
रामनगर की गरजो देवी ने कहा कि उनकी पोती की डिलीवरी बीते दिन हुई थी, लेकिन उन्हें प्रसव के बाद ही बेड की सुविधा मिली। इससे पहले उन्हें एक दिन जमीन पर ही बिस्तर लगाना पड़ा।
तीन दिन के बाद मिला बेड: कमला
कोटली के सुकाकून गांव की कमला देवी ने कहा कि उनके साथ उनकी भाभी माया और उनके पति आए हुए हैं। तीन दिन के बाद बेड की सुविधा मिली। इससे पहले गायनी वार्ड के बाहर उन्हें जमीन पर ही बिस्तर लगाकर गुजारा करना पड़ा।
चार दिन के बाद मिला बेड : ममता
सलापड़ की ममता देवी ने कहा कि उन्हें चार दिन तक गायनी वार्ड के बाहर जमीन पर ही बिस्तर लगाकर लेटना पड़ा। इसके चलते उन्हें ठंड के मौसम के काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ठंड से ठिठुरते हुए उन्हें चार दिन तक बेड की सुविधा नहीं मिली। चार दिन के बाद ही उन्हें बेड की सुविधा मिली है।
ठंड में परेशानी से मिली राहत : शिव
टिहरी के शिव कुमार ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी को पिछले दो दिनों से अस्पताल में एडमिट करवाया है। ठंड के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही थी। लेकिन अमर उजाला की ओर से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने पर ही समस्या का हल हुआ है। अब उन्हें बेड की सुविधा मिल गई है।