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मंडी में नहीं मानो मुंबई में एंट्री पाने के लिए संघर्ष कर रहे कलाकार
Updated Tue, 20 Feb 2018 09:56 PM IST
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कलाकारों को शिवरात्रि में मंच न मिलने का मलाल
कार्यक्रमों के आवंटन के खिलाफ उठने लगी आवाज
डीसी दफ्तर के चक्कर काट कर परेशान दिव्यांग कलाकार
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। कृत्रिम टांग के साथ कत्थक, एक्टिंग और मॉडलिंग में कॅरिअर की राह तलाश रहे मंडी के युवा कलाकार एसके सिंघानिया को शिवरात्रि महोत्सव में प्रशासन की अनदेखी का सामना करना पड़ा है। दिव्यांगता को मात देते हुए 2017 में मिस्टर हिमालया वर्ल्ड का खिताब और जयपुर में 200 मीटर पैरा ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले इस कलाकार के हुनर को अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में मंच नहीं मिला। हालांकि, उन्होंने चंद मिनटों के प्रोग्राम के लिए उपायुक्त कार्यालय के कई चक्कर लगाए लेकिन नाकाम रहे। वहीं, इनके जैसे कई ऐसे कलाकार भी हैं, जिनका ऑडिशन लिया गया लेकिन उन्हें शिवरात्रि में मंच नहीं मिल सका।
शिवरात्रि पर सांस्कृतिक संध्याओं में स्थानीय कलाकारों के कार्यक्रमों के आवंटन को लेकर बंदरबांट के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रशासन से सिफारिश से बैकडोर एंट्री से कलाकारों को मौका देने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। ऐसा ही कुछ पंडोह के सातमील के इस युवा कलाकार के साथ हुआ है। उनका कहना है कि शिवरात्रि में मंच के लिए स्थानीय कलाकार इस तरह से संघर्ष कर रहे हैं, जैसे मानो मुंबई में संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वह दो वर्ष के थे तो एक हादसे में एक टांग चली गई। लेकिन नृत्य में रुचि इतनी थी कि इन्होंने कृत्रिम टांग से नृत्य करना शुरू कर दिया। इनका आरोप है कि 22 जनवरी को आवेदन कर दिया था। करीब 20 चक्कर डीसी कार्यालय के भी लगा दिए, लेकिन इन्हें मंच पर मौका नहीं दिया गया। इनके पिता चाय की दुकान चलाते हैं और मां मनरेगा में मजदूरी करती हैं। उधर, उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि प्रशासन की पूरी कोशिश रही है कि हर एक कलाकार को महोत्सव में मंच मिले।
पायल को भी नहीं मिला समय
लिटल चैंप्स में एंट्री मारने वाली दिव्यांग पायल ठाकुर को भी शिवरात्रि मंच पर समय के अभाव से जूझना पड़ा। पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में उन्हें महज दो मिनट दिए गए। वह मंच में समय मांगती रही, लेकिन उनकी एक न चली। हालांकि, इस दौरान सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने प्रोग्राम खत्म होने तक पायल को अपने साथ बिठाए रखा।
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आईडी प्रूफ भी बनी समस्या
कार्यक्रम पेश करने के बाद कलाकारों को स्पॉट पर आईडी प्रूफ देखकर ही दिए चेक दिए जा रहे हैं। अधिकांश कलाकार अपने साथ पहचान पत्र नहीं लाए हैं। उन्हें पहचान पत्र लाकर पेमेंट के लिए दोबारा डीसी ऑफिस जाना पड़ रहा है। ऐसे में भुगतान के लिए कलाकारों को कई चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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कार्यक्रमों के आवंटन के खिलाफ उठने लगी आवाज
डीसी दफ्तर के चक्कर काट कर परेशान दिव्यांग कलाकार
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। कृत्रिम टांग के साथ कत्थक, एक्टिंग और मॉडलिंग में कॅरिअर की राह तलाश रहे मंडी के युवा कलाकार एसके सिंघानिया को शिवरात्रि महोत्सव में प्रशासन की अनदेखी का सामना करना पड़ा है। दिव्यांगता को मात देते हुए 2017 में मिस्टर हिमालया वर्ल्ड का खिताब और जयपुर में 200 मीटर पैरा ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले इस कलाकार के हुनर को अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में मंच नहीं मिला। हालांकि, उन्होंने चंद मिनटों के प्रोग्राम के लिए उपायुक्त कार्यालय के कई चक्कर लगाए लेकिन नाकाम रहे। वहीं, इनके जैसे कई ऐसे कलाकार भी हैं, जिनका ऑडिशन लिया गया लेकिन उन्हें शिवरात्रि में मंच नहीं मिल सका।
शिवरात्रि पर सांस्कृतिक संध्याओं में स्थानीय कलाकारों के कार्यक्रमों के आवंटन को लेकर बंदरबांट के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रशासन से सिफारिश से बैकडोर एंट्री से कलाकारों को मौका देने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। ऐसा ही कुछ पंडोह के सातमील के इस युवा कलाकार के साथ हुआ है। उनका कहना है कि शिवरात्रि में मंच के लिए स्थानीय कलाकार इस तरह से संघर्ष कर रहे हैं, जैसे मानो मुंबई में संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वह दो वर्ष के थे तो एक हादसे में एक टांग चली गई। लेकिन नृत्य में रुचि इतनी थी कि इन्होंने कृत्रिम टांग से नृत्य करना शुरू कर दिया। इनका आरोप है कि 22 जनवरी को आवेदन कर दिया था। करीब 20 चक्कर डीसी कार्यालय के भी लगा दिए, लेकिन इन्हें मंच पर मौका नहीं दिया गया। इनके पिता चाय की दुकान चलाते हैं और मां मनरेगा में मजदूरी करती हैं। उधर, उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि प्रशासन की पूरी कोशिश रही है कि हर एक कलाकार को महोत्सव में मंच मिले।
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पायल को भी नहीं मिला समय
लिटल चैंप्स में एंट्री मारने वाली दिव्यांग पायल ठाकुर को भी शिवरात्रि मंच पर समय के अभाव से जूझना पड़ा। पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में उन्हें महज दो मिनट दिए गए। वह मंच में समय मांगती रही, लेकिन उनकी एक न चली। हालांकि, इस दौरान सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने प्रोग्राम खत्म होने तक पायल को अपने साथ बिठाए रखा।
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आईडी प्रूफ भी बनी समस्या
कार्यक्रम पेश करने के बाद कलाकारों को स्पॉट पर आईडी प्रूफ देखकर ही दिए चेक दिए जा रहे हैं। अधिकांश कलाकार अपने साथ पहचान पत्र नहीं लाए हैं। उन्हें पहचान पत्र लाकर पेमेंट के लिए दोबारा डीसी ऑफिस जाना पड़ रहा है। ऐसे में भुगतान के लिए कलाकारों को कई चक्कर काटने पड़ रहे हैं।