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Mandi News: तीन माह में 127 गर्भवती महिलाओं की जांच, सात में खून की कमी

Wed, 21 Oct 2026 12:14 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2026 12:14 AM IST
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127 pregnant women screened over three months; seven found to have anemia
हमीरपुर। गर्भावस्था में मां और गर्भस्थ शिशु की सेहत के लिए पर्याप्त हीमोग्लोबिन बेहद जरूरी है, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गलोड़ में जुलाई से सितंबर तक हुई जांच में कुछ गर्भवती महिलाओं में खून की कमी सामने आई है। अस्पताल में तीन माह के दौरान एंटीनैटल केयर (एएनसी) के तहत पंजीकृत 127 गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन की जांच की गई। इनमें सात महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर सात से नौ ग्राम के बीच दर्ज किया गया, जबकि 48 महिलाओं का स्तर 10 से 10.9 ग्राम के बीच रहा। जुलाई से सितंबर तक 127 महिलाओं में से 72 का हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से अधिक पाया गया। वहीं, सात महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर काफी कम होने से उनके स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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गर्भावस्था के दौरान खून की कमी को नजरअंदाज करना मां और गर्भस्थ शिशु, दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। गलोड़ अस्पताल में जुलाई में 45, अगस्त में 47 और सितंबर में 38 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। तीन माह में कुल 127 महिलाओं की एएनसी जांच हुई। जांच के दौरान अलग-अलग स्तर पर हीमोग्लोबिन की कमी सामने आई है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार का महत्व बढ़ जाता है।
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संतुलित आहार के साथ समय पर उपचार जरूरी
गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने से मां में कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर एनीमिया होने पर गर्भावस्था और प्रसव के दौरान जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच करवाने, आयरन और फोलिक एसिड की दवाएं चिकित्सकीय सलाह के अनुसार लेने तथा पौष्टिक और संतुलित आहार अपनाने की जरूरत है।
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अधिक कमजोरी और चक्कर जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। हीमोग्लोबिन का स्तर कम पाए जाने पर केवल खानपान के भरोसे न रहें, बल्कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी जांच और उपचार करवाएं। -डॉ. सतीश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी हमीरपुर
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