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जिले के सबसे बड़े वल्लभ कॉलेज में फर्श पर बैठ कर पढ़ाई करने को विवश विद्यार्थी
Updated Mon, 21 Aug 2017 10:16 PM IST
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मंडी। समय सोमवार सवा बारह बजे। स्थान राजकीय वल्लभ कॉलेज। करीब 40 हजार किताबों से भरे कॉलेज के पुस्तकालय में हर ओर अलमारियां दिख रही हैं। कुछ विद्यार्थी अलमारियों की ओट में फर्श पर बैठे पढ़ रहे हैं। किताबें फर्श पर बिखरी पड़ी हैं। महज 10 से 15 मेज और कुछ कुर्सियां लगी हैं। जबकि, विद्यार्थियों की संख्या कहीं अधिक है। कुछ विद्यार्थी गोद में बैग पकड़े कुर्सी पर बैठे हैं। यह हालात किसी देहात के स्कूल के नहीं बल्कि सूबे के सबसे पुराने कॉलेजों में शुमार मंडी राजकीय वल्लभ कॉलेज के पुस्तकालय के हैं। 1948 में बने इस कॉलेज में करीब 6000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
पूछने पर बीएससी अंतिम सेमेस्टर के एक छात्र ने बताया कि यह उनके लिए कोई नया नहीं है। हर दिन फर्श पर ही बैठते हैं। तीन वर्ष से कुर्सी न मिलने पर कई बरी फर्श पर बैठ कर पढ़ाई करनी पड़ती है। कई बार कॉलेज प्रबंधन को इस समस्या के बारे में बताया है। डिग्री पूरी होने वाली है। लेकिन, समस्या जस की तस है। अब तो इस अव्यवस्था की आदत सी हो गई है। उधर, ऐतिहासिक कॉलेज में आधुनिक और बड़े लाइब्रेरी भवन की दरकार है।
वर्ष 1948 को बना है वल्लभ कॉलेज, लीड कॉलेज का दर्जा
वर्ष 1948 में राजकीय वल्लभ कॉलेज की स्थापना की गई है। क्लस्टर यूनिवर्सिटी मंडी के ड्राफ्ट एक्ट में इस कॉलेज को लीड कॉलेज बनाने का प्रावधान रखा गया है। डेढ़ दशक पहले इस पुस्तकालय भवन का निर्माण किया गया है। यहां पर किताबों की अलमारियों और विद्यार्थियों की संख्या तो बढ़ गई। लेकिन, कुर्सी टेबल न होने से दशकों बाद भी विद्यार्थी फर्श पर बैठ कर ही पढ़ाई करने को विवश हैं।
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विद्यार्थियों की जुबानी
कई बार प्रबंधन को बताया : नवीन
बीएससी अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थी नवीन कुमार ने कहा कि कई बार कॉलेज प्रबंधन को समस्या के बारे में बताया है। अब तो एक सेमेस्टर बचा है। डिग्री पूरी होने वाली है। लेकिन, पुस्तकालय में बैठने का कुर्सी नहीं मिली।
शिकायत करने पर कोई फायदा नहीं : विजय
बीए तृतीय सेमेस्टर के छात्र विजय ने कहा कि पुस्तकालय में फर्श पर बैठ कर पढ़ाई करना उनके लिए कोई नई बात नहीं है। अब इसकी आदत हो गई है। प्रथम सेमेस्टर से ही यह सिलसिला चला है। शिकायत करने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ।
समस्या के समाधान का आश्वासन दिया : तनुजा
बीकॉम प्रथम सेमेस्टर की तनुजा अख्तर ने कहा कि कॉलेज प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज प्राचार्य कल ही लाइब्रेरी में आए थे। तब भी हम फर्श पर ही बैठे थे। उन्होंने जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है।
फर्नीचर मिलते ही होगा समस्या का हल : मोनिका
बीकॉम तृतीय सेमेस्टर की छात्रा मोनिका शर्मा ने कहा कि कॉलेज प्राचार्य ने ऊपरी मंजिल में रीडिंग रूम शिफ्ट करने का आश्वासन दिया है। इससे समस्या का समाधान हो जाएगा। प्राचार्य ने आश्वासन दिया है कि फर्नीचर मिलते ही रीडिंग रूम की समस्या का हल होगा।
कॉलेज प्राचार्य डॉ. आईडी शर्मा से तीखे सवाल
प्रश्र: डेढ़ दशक बाद भी क्यों नहीं सुधरे पुस्तकालय के हालात?
उत्तर: पहले कॉलेज प्रशासन के पास भवन की कमी थी। इसके चलते समस्या पेश आ रही थी। लेकिन, अब कॉलेज को आईआईटी मंडी से भवन मिल चुका है। इस भवन में कांफ्रेंस हॉल को शिफ्ट किया जाएगा तथा कांफ्रेंस हॉल में रीडिंग रूम बनाया जाएगा।
प्रश्र: इतने लंबे अरसे से समस्या के समाधान को क्या प्रयास किए?
उत्तर: आईआईटी मंडी से कॉलेज को भवन देरी से मिला। इस भवन के ग्राउंड फ्लोर को अभी तक आईआईटी ने खाली नहीं किया है। कई बार पत्राचार के बाद भी अभी तक ग्राउंड फ्लोर खाली करना बाकी है। जिससे कॉलेज प्रबंधन को दिक्कत पेश आ रही है।
प्रश्र: फर्नीचर की कमी को क्यों दूर नहीं किया गया?
उत्तर: फर्नीचर की कमी को पूरा करने के लिए गत माह ही शिमला में विभाग के ज्वाइन डायरेक्टर से मुलाकात की है। पुस्तकालय के लिए 250 अतिरिक्त कुर्सियां खरीदी जाएंगी। इसके लिए विभाग से मंजूरी मिल गई है।
प्रश्न: कब तक होगा समस्या का समाधान?
उत्तर: फर्नीचर के लिए बजट मिल गया है। फर्नीचर खरीदने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुस्तकालय भवन के ऊपर की मंजिल के कांफ्रेंस हॉल को आईआईटी भवन में शिफ्ट करते ही यहां पर रीडिंग रूम स्थापित कर समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
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पूछने पर बीएससी अंतिम सेमेस्टर के एक छात्र ने बताया कि यह उनके लिए कोई नया नहीं है। हर दिन फर्श पर ही बैठते हैं। तीन वर्ष से कुर्सी न मिलने पर कई बरी फर्श पर बैठ कर पढ़ाई करनी पड़ती है। कई बार कॉलेज प्रबंधन को इस समस्या के बारे में बताया है। डिग्री पूरी होने वाली है। लेकिन, समस्या जस की तस है। अब तो इस अव्यवस्था की आदत सी हो गई है। उधर, ऐतिहासिक कॉलेज में आधुनिक और बड़े लाइब्रेरी भवन की दरकार है।
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वर्ष 1948 को बना है वल्लभ कॉलेज, लीड कॉलेज का दर्जा
वर्ष 1948 में राजकीय वल्लभ कॉलेज की स्थापना की गई है। क्लस्टर यूनिवर्सिटी मंडी के ड्राफ्ट एक्ट में इस कॉलेज को लीड कॉलेज बनाने का प्रावधान रखा गया है। डेढ़ दशक पहले इस पुस्तकालय भवन का निर्माण किया गया है। यहां पर किताबों की अलमारियों और विद्यार्थियों की संख्या तो बढ़ गई। लेकिन, कुर्सी टेबल न होने से दशकों बाद भी विद्यार्थी फर्श पर बैठ कर ही पढ़ाई करने को विवश हैं।
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विद्यार्थियों की जुबानी
कई बार प्रबंधन को बताया : नवीन
बीएससी अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थी नवीन कुमार ने कहा कि कई बार कॉलेज प्रबंधन को समस्या के बारे में बताया है। अब तो एक सेमेस्टर बचा है। डिग्री पूरी होने वाली है। लेकिन, पुस्तकालय में बैठने का कुर्सी नहीं मिली।
शिकायत करने पर कोई फायदा नहीं : विजय
बीए तृतीय सेमेस्टर के छात्र विजय ने कहा कि पुस्तकालय में फर्श पर बैठ कर पढ़ाई करना उनके लिए कोई नई बात नहीं है। अब इसकी आदत हो गई है। प्रथम सेमेस्टर से ही यह सिलसिला चला है। शिकायत करने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ।
समस्या के समाधान का आश्वासन दिया : तनुजा
बीकॉम प्रथम सेमेस्टर की तनुजा अख्तर ने कहा कि कॉलेज प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज प्राचार्य कल ही लाइब्रेरी में आए थे। तब भी हम फर्श पर ही बैठे थे। उन्होंने जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है।
फर्नीचर मिलते ही होगा समस्या का हल : मोनिका
बीकॉम तृतीय सेमेस्टर की छात्रा मोनिका शर्मा ने कहा कि कॉलेज प्राचार्य ने ऊपरी मंजिल में रीडिंग रूम शिफ्ट करने का आश्वासन दिया है। इससे समस्या का समाधान हो जाएगा। प्राचार्य ने आश्वासन दिया है कि फर्नीचर मिलते ही रीडिंग रूम की समस्या का हल होगा।
कॉलेज प्राचार्य डॉ. आईडी शर्मा से तीखे सवाल
प्रश्र: डेढ़ दशक बाद भी क्यों नहीं सुधरे पुस्तकालय के हालात?
उत्तर: पहले कॉलेज प्रशासन के पास भवन की कमी थी। इसके चलते समस्या पेश आ रही थी। लेकिन, अब कॉलेज को आईआईटी मंडी से भवन मिल चुका है। इस भवन में कांफ्रेंस हॉल को शिफ्ट किया जाएगा तथा कांफ्रेंस हॉल में रीडिंग रूम बनाया जाएगा।
प्रश्र: इतने लंबे अरसे से समस्या के समाधान को क्या प्रयास किए?
उत्तर: आईआईटी मंडी से कॉलेज को भवन देरी से मिला। इस भवन के ग्राउंड फ्लोर को अभी तक आईआईटी ने खाली नहीं किया है। कई बार पत्राचार के बाद भी अभी तक ग्राउंड फ्लोर खाली करना बाकी है। जिससे कॉलेज प्रबंधन को दिक्कत पेश आ रही है।
प्रश्र: फर्नीचर की कमी को क्यों दूर नहीं किया गया?
उत्तर: फर्नीचर की कमी को पूरा करने के लिए गत माह ही शिमला में विभाग के ज्वाइन डायरेक्टर से मुलाकात की है। पुस्तकालय के लिए 250 अतिरिक्त कुर्सियां खरीदी जाएंगी। इसके लिए विभाग से मंजूरी मिल गई है।
प्रश्न: कब तक होगा समस्या का समाधान?
उत्तर: फर्नीचर के लिए बजट मिल गया है। फर्नीचर खरीदने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुस्तकालय भवन के ऊपर की मंजिल के कांफ्रेंस हॉल को आईआईटी भवन में शिफ्ट करते ही यहां पर रीडिंग रूम स्थापित कर समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।