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सीमेंट उद्योग, औद्योगिक भट्ठियों में इस्तेमाल होगा सूखी चीड़ की पतियों से बना ईंधन
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सीमेंट उद्योग, भट्ठियों में इस्तेमाल होगा सूखी चीड़ की पत्तियों से बना ईंधन
उद्यमियों को पाइन नीडल आधारित उद्योग लगाने के लिए किया प्रोत्साहित
आईआईटी मंडी लगी कार्यशाला, उद्योग लगाने के लिए वन विभाग को मिले 21 आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। सूखी चीड़ की पत्तियों के ब्रिकेट को ईंधन के रूप में लकड़ी और कोयले के स्थान पर छोटे और बड़े उद्योगों में उपयोग में लाया जा सकता है। इनमें सीमेंट उद्योग, औद्योगिक भट्ठी, गैसी फायर, हमाम आदि शामिल हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के सेंटर फॉर इनोवेटिव टेक्नॉलॉजी फॉर द हिमालयन रीजन (सीआईटीएचआर) सूखी चीड़ की पत्तियों के इस्तेमाल को लेकर उद्यमियों को प्रोत्साहित करने में जुटा हुआ है। बुधवार को यूज ऑफ ब्रिकेट मशीन फॉर ड्राई पाइन नीडल ब्रिकेटिंग पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में हिमाचल के एक अलग डिविजन के कुल 24 उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उद्यमियों को पाइन नीड्ल आधारित उद्योग स्थापित करने को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यशाला प्रधान शोधकर्ता और प्रो. आरती कश्यप के मार्गदर्शन में हुई। इसमें ड्राई पाइन ब्रिकेटिंग की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया। सेंटर फॉर अपलिफ्टिंग हिमालयन लिवलीहुड (यूएचएल) में भी एक प्रस्तुति और संस्था का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, ताकि सहभागी मशीन के कार्यकलाप को सरलता से समझ सकें। कार्यशाला में परियोजना अभियंता पवन तिवारी, परियोजना सहायक राकेश आर्य और परियोजना सहायक पूजा ठाकुर भी उपस्थित रहे। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पाइन नीडल आधारित संयंत्रों के लिए एक इकाई के लिए पूंजीगत व्ययों पर 50 प्रतिशत, 25 लाख तक की सब्सिडी प्रदान करने की घोषणा की है। यह सहायता विभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) के कार्यालय में एक पत्र देकर प्राप्त की जा सकती है। पाइन नीडल आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए वन विभाग को अभी तक 21 आवेदन दिए गए हैं। पाइन नीड्ल बायो-डिग्रेडेबल नहीं है और अत्यधिक ज्वलनशील भी है। इसलिए यह पूरे हिमालय क्षेत्र के पर्यावरण, वन्य जैव विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है।
आईटीआई में लगा है उत्पादन संयंत्र
आईआईटी मंडी परिसर में केंद्र का अपना ब्रिकेट और पेलेट उत्पादन संयंत्र है। 15 एचपी के कनेक्टेड लोड के साथ मशीन एक घंटे में 150 किलोग्राम का उत्पादन कर सकती है। संयंत्र का लागत मूल्य 5.5 लाख रुपए है। एक टन सूखे पाइन नीड्ल ब्रिकेट के उत्पादन पर 3500 रुपये की लागत आती है और हीटिंग मूल्य के अनुरूप इसका बिक्री मूल्य 6000 रुपये प्रति टन हो सकता है। पाइन नीड्ल के अतिरिक्त इस मशीन का उपयोग लकड़ी के बुरादे, गन्ने की छाल, चावल के पुआल और लकड़ी की खपच्चियों के ब्रिकेट बनाने के लिए किया जा सकता है।
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उद्यमियों को पाइन नीडल आधारित उद्योग लगाने के लिए किया प्रोत्साहित
आईआईटी मंडी लगी कार्यशाला, उद्योग लगाने के लिए वन विभाग को मिले 21 आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। सूखी चीड़ की पत्तियों के ब्रिकेट को ईंधन के रूप में लकड़ी और कोयले के स्थान पर छोटे और बड़े उद्योगों में उपयोग में लाया जा सकता है। इनमें सीमेंट उद्योग, औद्योगिक भट्ठी, गैसी फायर, हमाम आदि शामिल हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के सेंटर फॉर इनोवेटिव टेक्नॉलॉजी फॉर द हिमालयन रीजन (सीआईटीएचआर) सूखी चीड़ की पत्तियों के इस्तेमाल को लेकर उद्यमियों को प्रोत्साहित करने में जुटा हुआ है। बुधवार को यूज ऑफ ब्रिकेट मशीन फॉर ड्राई पाइन नीडल ब्रिकेटिंग पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में हिमाचल के एक अलग डिविजन के कुल 24 उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उद्यमियों को पाइन नीड्ल आधारित उद्योग स्थापित करने को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यशाला प्रधान शोधकर्ता और प्रो. आरती कश्यप के मार्गदर्शन में हुई। इसमें ड्राई पाइन ब्रिकेटिंग की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया। सेंटर फॉर अपलिफ्टिंग हिमालयन लिवलीहुड (यूएचएल) में भी एक प्रस्तुति और संस्था का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, ताकि सहभागी मशीन के कार्यकलाप को सरलता से समझ सकें। कार्यशाला में परियोजना अभियंता पवन तिवारी, परियोजना सहायक राकेश आर्य और परियोजना सहायक पूजा ठाकुर भी उपस्थित रहे। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पाइन नीडल आधारित संयंत्रों के लिए एक इकाई के लिए पूंजीगत व्ययों पर 50 प्रतिशत, 25 लाख तक की सब्सिडी प्रदान करने की घोषणा की है। यह सहायता विभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) के कार्यालय में एक पत्र देकर प्राप्त की जा सकती है। पाइन नीडल आधारित उद्योग स्थापित करने के लिए वन विभाग को अभी तक 21 आवेदन दिए गए हैं। पाइन नीड्ल बायो-डिग्रेडेबल नहीं है और अत्यधिक ज्वलनशील भी है। इसलिए यह पूरे हिमालय क्षेत्र के पर्यावरण, वन्य जैव विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है।
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आईटीआई में लगा है उत्पादन संयंत्र
आईआईटी मंडी परिसर में केंद्र का अपना ब्रिकेट और पेलेट उत्पादन संयंत्र है। 15 एचपी के कनेक्टेड लोड के साथ मशीन एक घंटे में 150 किलोग्राम का उत्पादन कर सकती है। संयंत्र का लागत मूल्य 5.5 लाख रुपए है। एक टन सूखे पाइन नीड्ल ब्रिकेट के उत्पादन पर 3500 रुपये की लागत आती है और हीटिंग मूल्य के अनुरूप इसका बिक्री मूल्य 6000 रुपये प्रति टन हो सकता है। पाइन नीड्ल के अतिरिक्त इस मशीन का उपयोग लकड़ी के बुरादे, गन्ने की छाल, चावल के पुआल और लकड़ी की खपच्चियों के ब्रिकेट बनाने के लिए किया जा सकता है।
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