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देव नगलवाणी के नव निर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा
Updated Sat, 28 Apr 2018 11:08 PM IST
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थुनाग (मंडी)। सराज के तहत नगलवाणी धार में देव नगलवाणी के नवनिर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा धाम के साथ की गई। लगभग 12 हजार लोगों ने इस देव पर्व में अपनी हाजिरी लगाई। इस दौरान लोगों ने देवता के आगे शीश झुकाकर उनका आशीर्वाद लिया और दुखों का निवारण करने की प्रार्थना की। गोर हो कि नगलवाणी धार की ऊंचाई लगभग 11 हजार फीट है, जो सपैहनी धार के साथ लगती है। इस देव पर्व में सराज घाटी के 42 देवताओं के कारिंदों और हरियानों को बुलावा भेजा गया था। सभी देवताओं और उनके पुजारियों ने यहां पर काफी संख्या में पहुंचकर पर्व की शोभा बढ़ाई। इस पर्व के दौरान प्रीतिभोज का भी आयोजन किया गया था। इतनी ऊंचाई पर हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए हर तरह से पानी की भी व्यवस्था की गई थी। पानी का इस स्थान पर कोई भी स्रोत नहीं है। इसलिए इतने बड़े आयोजन के लिए पानी की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन, आईपीएच विभाग की ओर से इस पर्व को सफल बनाने में पानी की पूरी व्यवस्था करवाई गई थी। इस सहयोग के लिए समस्त देव कमेटी और हरियानों ने विभाग का आभार भी प्रकट किया है।
क्या है मान्यता
प्रचलित गाथा के अनुसार देव नगलवाणी के साथ देव सुमिनाग भी एक साथ निवास करते हैं। परंतु खास बात यह है कि इन दोनों देवों के निवास स्थान अर्थात कोठी एक ही जगह है, जो गाड़ा गांव में है। दोनों के मंदिर अलग-अलग जगहों पर हैं। देव सुमिनाग का मंदिर सपैहनी धार में है जबकि, देव नगलवाणी का मंदिर नगलवाणी धार में है। मान्यता है कि देव नगलवाणी शिव और सुमिनाग शेषनाग अवतार हैं।
तीन साल बाद बना मंदिर भव्य मंदिर
देव नगलवाणी का पुराना मंदिर लगभग चालीस वर्ष पहले पुरानी आकृति में बना था। जमाने की चकाचौंध और वर्तमान मंदिरों की कलाकृतियों को देखते हुए देवता के हरियानों ने भी देवता से नए मंदिर निर्माण की इजाजत मांगी थी जिस पर देवता ने हामी भरी और मंदिर तैयार किया गया। जानकारी देते हुए थाना पंचायत के पूर्व प्रधान मुन्नी लाल और देवता के कारिंदे थाना गांव के नोक सिंह, भाग सिंह, आलम सिंह, रोशन लाल, सोहन लाल, रमेश कुमार, सेल्समैन बेली राम आदि ने बताया कि पूर्णतया काष्ठकृति से इस नवनिर्मित मंदिर को बनाया गया। जिसे बनाने में लगभग साठ लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसमें से कुछ देवता मंदिर के लिए जमा राशि थी और बाकी राशि हरियानों के सहयोग से पूरी की गई है। मंदिर के निर्माण में तीन वर्ष का समय लगा है।
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क्या है मान्यता
प्रचलित गाथा के अनुसार देव नगलवाणी के साथ देव सुमिनाग भी एक साथ निवास करते हैं। परंतु खास बात यह है कि इन दोनों देवों के निवास स्थान अर्थात कोठी एक ही जगह है, जो गाड़ा गांव में है। दोनों के मंदिर अलग-अलग जगहों पर हैं। देव सुमिनाग का मंदिर सपैहनी धार में है जबकि, देव नगलवाणी का मंदिर नगलवाणी धार में है। मान्यता है कि देव नगलवाणी शिव और सुमिनाग शेषनाग अवतार हैं।
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तीन साल बाद बना मंदिर भव्य मंदिर
देव नगलवाणी का पुराना मंदिर लगभग चालीस वर्ष पहले पुरानी आकृति में बना था। जमाने की चकाचौंध और वर्तमान मंदिरों की कलाकृतियों को देखते हुए देवता के हरियानों ने भी देवता से नए मंदिर निर्माण की इजाजत मांगी थी जिस पर देवता ने हामी भरी और मंदिर तैयार किया गया। जानकारी देते हुए थाना पंचायत के पूर्व प्रधान मुन्नी लाल और देवता के कारिंदे थाना गांव के नोक सिंह, भाग सिंह, आलम सिंह, रोशन लाल, सोहन लाल, रमेश कुमार, सेल्समैन बेली राम आदि ने बताया कि पूर्णतया काष्ठकृति से इस नवनिर्मित मंदिर को बनाया गया। जिसे बनाने में लगभग साठ लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसमें से कुछ देवता मंदिर के लिए जमा राशि थी और बाकी राशि हरियानों के सहयोग से पूरी की गई है। मंदिर के निर्माण में तीन वर्ष का समय लगा है।
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