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देव दर्शन:आस्था के महाकुंभ चौहाटा जातर में उमड़ा आस्था का सैलाब
Updated Wed, 21 Feb 2018 09:59 PM IST
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शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर बुधवार को रियासतकालीन चौहाटा बाजार में जातर के दौरान देव दर्शन अलौलिक दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। छोटी काशी मंडी के आराध्य देव बाबा भूतनाथ के प्रांगण में कतारबद्ध होकर बैठे सैकड़ों देवी देवता और शीश नवाते हजारों लोग। सच में नजारा ऐसा प्रतीत हो रहा था मानों धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। सोने चांदी और मखमली कपड़ों से सजे देवरथ सहज ही दिल को मोह रहे थे। हर कोई इन पलों को कैमरों में संजो लेना चाहता था। अब एक वर्ष बाद यह नजारा देखने को मिलेगा। देव दर्शन के साथ ही लोग विदाई लेते देवी-देवताओं का गवाह भी बने। विदाई के इन पलों मेें देव और मानस की रिश्तों की पराकाष्ठा भी चरम पर नजर आई।
समय करीब सवा आठ बजे। स्थान रियासतकालीन चौहाटा बाजार। आस्था के महाकुंभ महाशिवरात्रि उत्सव के अंतिम दिन रियासतकालीन चौहाटा बाजार की जातर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। देवी-देवताओं के प्रति अटूट आस्था लेकर हजारों लोगों ने अपनी और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद लिया। देव रथों के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्र शहनाई, ढोल, नगाड़े और रणसिंगे की मधुर ध्वनि पर नाचते-गाते देवलुओं से छोटी काशी पूरी तरह आस्था के माहौल में डूबी रही। चौहाटा जातर के देव समागम में छोटी काशी वाद्य यंत्रों से गूंज उठी। हजारों लोग देव मिलन के इस अद्भुत क्षणों के गवाह बने। शिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन चौहाटा जातर में उमड़ी भीड़ से निकलने तक की जगह नहीं बची। समय सवा दस बजे। सूरज चढ़ते ही देवी-देवताओं के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब भी उमड़ता जा रहा है। चौहाटा बाजार में लाइन से कतार में विराजमान देवी-देवता और हर तरफ वाद्य यंत्रों की गूंज ने हर किसी को आस्था के उत्सव में भाव विभोर भी कर दिया। लोगों ने हर देवी-देवताओं से शेष लिया और सुख समृद्धि की कामना के लिए चढ़त चढ़ाई। दोपहर साढ़े बारह बजे के बाद एक-एक कर के देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए रवाना होने लगे। एक सप्ताह तक शिवरात्रि के देव समागम की शोभा बढ़ाने वाले देवी-देवताओं की विदाई से आस्था का जोश भी भावुक हो गया। देवी-देवताओं की रवानगी से शिवरात्रि की रौनक भी साल भर के लिए समाप्त हो गई।
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मंडी। छोटी काशी मंडी के आराध्य देव बाबा भूतनाथ के प्रांगण में कतारबद्ध होकर बैठे सैकड़ों देवी देवता और शीश नवाते हजारों लोग। सच में नजारा ऐसा प्रतीत हो रहा था मानों धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। सोने चांदी और मखमली कपड़ों से सजे देवरथ सहज ही दिल को मोह रहे थे। हर कोई इन पलों को कैमरों में संजो लेना चाहता था। अब एक वर्ष बाद यह नजारा देखने को मिलेगा। देव दर्शन के साथ ही लोग विदाई लेते देवी-देवताओं का गवाह भी बने। विदाई के इन पलों मेें देव और मानस की रिश्तों की पराकाष्ठा भी चरम पर नजर आई।
समय करीब सवा आठ बजे। स्थान रियासतकालीन चौहाटा बाजार। आस्था के महाकुंभ महाशिवरात्रि उत्सव के अंतिम दिन रियासतकालीन चौहाटा बाजार की जातर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। देवी-देवताओं के प्रति अटूट आस्था लेकर हजारों लोगों ने अपनी और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद लिया। देव रथों के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्र शहनाई, ढोल, नगाड़े और रणसिंगे की मधुर ध्वनि पर नाचते-गाते देवलुओं से छोटी काशी पूरी तरह आस्था के माहौल में डूबी रही। चौहाटा जातर के देव समागम में छोटी काशी वाद्य यंत्रों से गूंज उठी। हजारों लोग देव मिलन के इस अद्भुत क्षणों के गवाह बने। शिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन चौहाटा जातर में उमड़ी भीड़ से निकलने तक की जगह नहीं बची। समय सवा दस बजे। सूरज चढ़ते ही देवी-देवताओं के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब भी उमड़ता जा रहा है। चौहाटा बाजार में लाइन से कतार में विराजमान देवी-देवता और हर तरफ वाद्य यंत्रों की गूंज ने हर किसी को आस्था के उत्सव में भाव विभोर भी कर दिया। लोगों ने हर देवी-देवताओं से शेष लिया और सुख समृद्धि की कामना के लिए चढ़त चढ़ाई। दोपहर साढ़े बारह बजे के बाद एक-एक कर के देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए रवाना होने लगे। एक सप्ताह तक शिवरात्रि के देव समागम की शोभा बढ़ाने वाले देवी-देवताओं की विदाई से आस्था का जोश भी भावुक हो गया। देवी-देवताओं की रवानगी से शिवरात्रि की रौनक भी साल भर के लिए समाप्त हो गई।
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