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पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर नाचते गाते निकली बड़ादेव विष्ण मतलोड़ा की जलेब
Updated Mon, 06 Nov 2017 10:23 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जंजैहली (मंडी)। जिले की सराजघाटी के सबसे बड़े भू क्षेत्र के बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा का होम धूमधाम से मनाया गया। सूबे के हर जिले से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने होम में आकर देवता का आशीर्वाद लिया। क्षेत्र के लोगों मेें विष्णु स्वरूप देव मतलोड़ा के प्रति अटूट आस्था और विश्वास है।
सोमवार सुबह पांच बजे बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा की अगुवाई में देवता की जलेब अपनी नवनिर्मित कोठी से सैकड़ों भक्तों के साथ रवाना हुई। जलेब में 70 बजंतरी शामिल हुए। ढोल नगाढ़ों की थाप पर जलेब में देवता चौहट कोठी से होकर मूल स्थान देव कांढा खरशू पहुंचे। यहां सैकड़ों की संख्या मेें श्रद्धालु देवता का इंतजार कर रहे थे। कांढा में देवता को उनके स्वर्ण आभूषणों से सजाया गया। इसके बाद देवता मूल स्थान देउरे खरशु पहुंचे। यहां पर श्रद्धालुओं ने अपनी समस्याओं को लेकर देवता के गूर पुजारी से पूछ ली। देव के गूर ने खेलकर लोगों की जिज्ञासाओं का निवारण किया। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं ने देवता से आशीर्वाद लिया। इस बार भी बड़ादेव की होम की सारी रस्में नारियल से निभाई गईं। इस संबंध में देवता कमेटी के जज, देवता के जज ओम चंद, प्रधान नाहर मल, उप प्रधान टीबर सिंह, अध्यक्ष दिनेश कुमार, सचिव जीवन सिंह ने बताया कि पिछले 3 सालों से इस होम में देवता की सारी रस्में नारियल से निभाई गईं।
होम में किए जाते हैं सैकड़ों बच्चों के मुंडन
इस होम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर सूबे की हर जगह से लोग अपने बच्चों का मुंडन करवाने के लिए पहुंचते हैं। दंत कथाओं की मानें तो देव के पास मुंडन करवाने से बच्चों पर देवता की कृपा बनी रहती है। वहीं, बच्चे का मन शांत रहता है। यहां पर सैकड़ों के हिसाब से एक दिन में मुंडन किए जाते हैं।
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सोमवार सुबह पांच बजे बड़ा देव विष्णु मतलोड़ा की अगुवाई में देवता की जलेब अपनी नवनिर्मित कोठी से सैकड़ों भक्तों के साथ रवाना हुई। जलेब में 70 बजंतरी शामिल हुए। ढोल नगाढ़ों की थाप पर जलेब में देवता चौहट कोठी से होकर मूल स्थान देव कांढा खरशू पहुंचे। यहां सैकड़ों की संख्या मेें श्रद्धालु देवता का इंतजार कर रहे थे। कांढा में देवता को उनके स्वर्ण आभूषणों से सजाया गया। इसके बाद देवता मूल स्थान देउरे खरशु पहुंचे। यहां पर श्रद्धालुओं ने अपनी समस्याओं को लेकर देवता के गूर पुजारी से पूछ ली। देव के गूर ने खेलकर लोगों की जिज्ञासाओं का निवारण किया। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं ने देवता से आशीर्वाद लिया। इस बार भी बड़ादेव की होम की सारी रस्में नारियल से निभाई गईं। इस संबंध में देवता कमेटी के जज, देवता के जज ओम चंद, प्रधान नाहर मल, उप प्रधान टीबर सिंह, अध्यक्ष दिनेश कुमार, सचिव जीवन सिंह ने बताया कि पिछले 3 सालों से इस होम में देवता की सारी रस्में नारियल से निभाई गईं।
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होम में किए जाते हैं सैकड़ों बच्चों के मुंडन
इस होम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर सूबे की हर जगह से लोग अपने बच्चों का मुंडन करवाने के लिए पहुंचते हैं। दंत कथाओं की मानें तो देव के पास मुंडन करवाने से बच्चों पर देवता की कृपा बनी रहती है। वहीं, बच्चे का मन शांत रहता है। यहां पर सैकड़ों के हिसाब से एक दिन में मुंडन किए जाते हैं।
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