{"_id":"59ff479f4f1c1bec538bb453","slug":"111509902239-mandi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपना बन कर रह गई बखरौट-जंजैहली सड़क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपना बन कर रह गई बखरौट-जंजैहली सड़क
Updated Sun, 05 Nov 2017 10:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंडी। करसोग और सराज को जोड़ने और पर्यटन की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित होने वाली मात्र 14 किलोमीटर बखरौट-जंजैहली सड़क मात्र आधा किलोमीटर ही बन पाई है। इस सड़क के नाम पर हर साल सरकार विभाग को बजट तो जारी करती है, लेकिन खर्च किसी और सड़क पर हो जाता है। यह सड़क जंजैहली से रायगढ़ तक 24 में से 10 किलोमीटर बन चुकी है। मात्र 14 किलोमीटर निकलना शेष है। वहीं हर चुनाव में करसोग के नेता इस सड़क के नाम पर वोट बटोर लेते हैं। बाद में सत्ता में आने के बाद इस सड़क को भूल जाते हैं। करसोग क्षेत्र की पंचायत चुराग के प्रधान मानदास, उपप्रधान ललित कुमार, खील पंचायत के प्रधान दिनेश कुमार शर्मा, उपप्रधान हरी चंद, सोरता की प्रधान कोमल कुमारी, उपप्रधान लाल राम, प्रधान ग्राम पंचायत बखरौट हरी प्रिया, उपप्रधान टेक चंद वर्मा, बीडीसी सदस्य बेसर, पंचायत प्रधान सनारली किरणा देवी, उपप्रधान देवेंद्र कुमार, जिप सदस्य पांगणा संतोष कुमारी, दछेहण पंचायत की प्रधान कौशल्या देवी और उप प्रधान उमादत्त, पंचायत बलींडी के प्रधान हिरामणी, उपप्रधान भीम सिंह, मांहुनाग पंचायत के उप प्रधान जयलाल और बखरोट के कारोबारी कृष्ण लाल, ध्यान सिंह, तेज गुप्ता, दिवान चंद, खेमसिंह, तेजराम, होटल गोपाल के मालिक राम गोपाल सूद, चारकुफरी से डेविड चिठाधारठु से खयाली राम, चुराग व्यापार मंडल के प्रधान सुबाराम व अन्य व्यापारियों का कहना है कि बखरौट-जंजैहली सड़क करीब 70 के दशक से प्रस्तावित है और इस सड़क पर विभाग ने लाखों खर्च कर बखरौट से रायगढ़ तक ट्रेस भी निकाल रखी है। निजी भूमि मालिकों को जमीन का मुआवजा भी विभाग दे चुका है। इसके बावजूद सड़क के नाम पर हर बार नेता वोट तो ले लेते हैं बाद में इस सड़क पर कोई गौर नहीं किया जाता है।
शिमला के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर
सराज क्षेत्र के लोगों को इस सड़क से राजधानी शिमला जाने के लिए बहुत सुविधा मिलनी थी लेकिन उन्हें यहां से 200 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। यदि यह सड़क निकल जाती है तो जंजैहली के लोगों को राजधानी शिमला की दूरी मात्र 124 किलोमीटर रह जाएगी। इसी के चलते आज भी मन को मोह लेने वाले अति सुंदर पर्यटक स्थल प्राकृतिक मैदान शैंथल और शिव और देव महासु की प्राकृतिक झील और मूल स्थान के साथ दर्जनों मनमोहक स्थलों कालीदोघरी, रायगढ़ की पहाड़ियां पर्यटकों की पहुंच से बहुत दूर हैं। करसोग के कारोबारियों का मानना है कि इस सड़क के निकलने से बखरौट, चुराग, पांगणा, करसोग, बलिंडी, बगषाड़ और तत्तापानी में सब्जी, सेब, पर्यटक का कारोबार लाखों से करोड़ों का हो जाएगा।
विधायक प्राथमिकता में नहीं सड़क
इस बारे में जब करसोग में तैनात लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता पीसी शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी तक पूर्व में रहे किसी भी विधायक और मंत्री ने इस रोड को एमएलए प्राथमिकता में नहीं डाला है। वहीं इस सड़क मामले को लेकर ग्रामीणों, संगठनों ने प्रदेश हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका दायर की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिमला के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर
सराज क्षेत्र के लोगों को इस सड़क से राजधानी शिमला जाने के लिए बहुत सुविधा मिलनी थी लेकिन उन्हें यहां से 200 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। यदि यह सड़क निकल जाती है तो जंजैहली के लोगों को राजधानी शिमला की दूरी मात्र 124 किलोमीटर रह जाएगी। इसी के चलते आज भी मन को मोह लेने वाले अति सुंदर पर्यटक स्थल प्राकृतिक मैदान शैंथल और शिव और देव महासु की प्राकृतिक झील और मूल स्थान के साथ दर्जनों मनमोहक स्थलों कालीदोघरी, रायगढ़ की पहाड़ियां पर्यटकों की पहुंच से बहुत दूर हैं। करसोग के कारोबारियों का मानना है कि इस सड़क के निकलने से बखरौट, चुराग, पांगणा, करसोग, बलिंडी, बगषाड़ और तत्तापानी में सब्जी, सेब, पर्यटक का कारोबार लाखों से करोड़ों का हो जाएगा।
विज्ञापन
विधायक प्राथमिकता में नहीं सड़क
इस बारे में जब करसोग में तैनात लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता पीसी शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी तक पूर्व में रहे किसी भी विधायक और मंत्री ने इस रोड को एमएलए प्राथमिकता में नहीं डाला है। वहीं इस सड़क मामले को लेकर ग्रामीणों, संगठनों ने प्रदेश हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका दायर की है।
विज्ञापन