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Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नई स्कीमें बनाने से पहले होगा अध्ययन, 30 साल तक पर्याप्त पानी है या नहीं
Wed, 29 Oct 2025 03:00 AM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 29 Oct 2025 03:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अब एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी जल आपूर्ति और सिंचाई योजनाओं के लिए वैज्ञानिक स्रोत स्थिरता अध्ययन करवाना अनिवार्य किया है। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने जल आपूर्ति और सिंचाई योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अब एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी जल आपूर्ति और सिंचाई योजनाओं के लिए वैज्ञानिक स्रोत स्थिरता अध्ययन करवाना अनिवार्य किया है। यह अध्ययन नई बनाई जा रहीं स्कीमों के अलावा पहले से बनीं योजनाओं का भी अध्ययन होगा।
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इसके लिए यह देखना होगा कि स्रोत में अगले 30 साल तक पानी पर्याप्त मात्रा में होगा या नहीं। स्रोत में कुल खपत का दोगुना पानी होना चाहिए। पानी की उपलब्धता का यह आंकड़ा दैनिक, मासिक और वार्षिक आधार पर उपलब्ध करवाना होगा। इसके लिए जलापूर्ति योजनाओं का हर पहलू को ध्यान में रखते हुए अध्ययन किया जाएगा। सचिव जल शक्ति राखिल काहलों ने इसकी अधिसूचना जारी की है।
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अधिसूचना के अनुसार यह अध्ययन तीन श्रेणियों के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों में से किसी एक से करवाया जाएगा। इनमें से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) रुड़की या राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर शामिल हैं। अध्ययन रिपोर्ट की एक प्रति जल शक्ति विभाग के हाइड्रोलॉजी प्रकोष्ठ को प्रस्तुत करनी होगी। यह प्रकोष्ठ इन अध्ययनों को सुगम बनाएगा और जल स्रोतों व संबंधित वैज्ञानिक निष्कर्षों का डाटाबेस तैयार करेगा। इससे भविष्य की योजनाओं में इनका उपयोग किया जा सकेगा।
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अध्ययन कई शर्तों के अनुसार किया जाएगा और नई योजनाओं में इसकी अंतिम रिपोर्ट विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में शामिल करनी होगी। एक करोड़ से कम लागत वाली योजनाएं जिनकी अनुमानित लागत एक करोड़ रुपये से कम है, उनके लिए स्रोत चयन की प्रक्रिया पूर्ववत विभागीय प्रथाओं के अनुसार ही जारी रहेगी।