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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Major Decision: Himachal High Court Quashes Permission for Hotel Construction in Dalhousie's Restricted Green

बड़ा फैसला: डलहौजी के प्रतिबंधित, हरित क्षेत्र में होटल निर्माण की अनुमति को हिमाचल हाईकोर्ट ने किया रद्द

Fri, 02 Oct 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 02 Oct 2026 05:15 AM IST
सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने डलहौजी के प्रतिबंधित एवं हरित क्षेत्र अपर बकरोटा में आवासीय जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति को रद्द कर दिया है। 

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Major Decision: Himachal High Court Quashes Permission for Hotel Construction in Dalhousie's Restricted Green
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डलहौजी के प्रतिबंधित एवं हरित क्षेत्र अपर बकरोटा में आवासीय जमीन के व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति को रद्द कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्लानिंग एरिया के प्रतिबंधित क्षेत्र में होटल और गेस्ट हाउस के लिए भूमि उपयोग बदलने की प्रदेश सरकार की मंजूरी को निरस्त करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण सांविधानिक दायित्व है। अदालत ने 3 जनवरी 2020 को जारी भू-उपयोग परिवर्तन आदेश के साथ उसके आधार पर दी गई सभी व्यावसायिक और ले-आउट निर्माण मंजूरियों को भी रद्द कर दिया है। हालांकि, भू स्वामी जमीन का उपयोग आवासीय उद्देश्यों के लिए कर सकेंगे।

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बकरोटा क्षेत्र को डलहौजी डेवलपमेंट प्लान के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। नियमों के अनुसार यहां जरूरत आधारित आवासीय निर्माण की ही अनुमति है। वर्ष 1993 में एक व्यक्ति ने करीब 5,594 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। वर्ष 2017-18 में उन्हें छह मंजिला आवासीय भवन के निर्माण की मंजूरी मिली। बाद में उन्होंने जमीन को होटल और गेस्ट हाउस के व्यावसायिक उपयोग में बदलने के लिए आवेदन किया। वर्ष 2019 में प्रशासनिक समिति के संयुक्त निरीक्षण में मौके पर 65 हरे-भरे पेड़ पाए गए।

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हाईकोर्ट ने कहा कि आसपास पहले से ही कुछ होटल संचालित होने के आधार पर नए मामले में नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य स्थान पर हुआ अवैध या गलत निर्माण किसी दूसरे व्यक्ति को उसी तरह की अनुमति का दावा करने का अधिकार नहीं देता। अदालत ने कहा कि बकरोटा जैसे घने और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक दबाव बढ़ाना गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय है।

 

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डीसी के इन्कार के बाद भी सरकार ने दी थी मंजूरी
क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए तत्कालीन उपायुक्त चंबा की अध्यक्षता वाली समिति ने व्यावसायिक उपयोग की अनुमति देने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद मामला प्रधान सचिव (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) के समक्ष अपील में पहुंचा। 3 जनवरी 2020 को प्रदेश सरकार ने व्यावसायिक भूमि उपयोग की मंजूरी दे दी। दलील यह दी गई कि आसपास भी कुछ होटल चल रहे हैं और भूस्वामी वहां का मूल निवासी हैं। इसी फैसले के खिलाफ अपर बकरोटा रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी।

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