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Kullu News: स्मार्ट मीटर के खिलाफ फूटा महिलाओं का गुस्सा
Mon, 09 Feb 2026 10:56 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 09 Feb 2026 10:56 PM IST
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कुल्लू जिला की ग्राम पंचायत दलशाणी, रोट और संचाणी की महिला मंडलों की महिलाओं ने स्मार्ट मीटर को
तीन पंचायतों की महिला मंडलों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी
स्मार्ट मीटर थोप रही प्रदेश सरकार, सड़कों और स्कूलों की नहीं ले रही सुध : निर्मला
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले के खिलाफ ग्रामीण महिलाएं सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। जिले की ग्राम पंचायत दलशाणी, रोट और संचाणी के महिला मंडलों की महिलाओं ने स्मार्ट मीटर को गरीब विरोधी फैसला बताते हुए उपायुक्त के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा है।
महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार बिजली मीटर बदलकर ग्रामीण और गरीब लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर प्री-पेड सिस्टम थोपा जा रहा है। जिसमें पहले रिचार्ज नहीं हुआ तो बिजली गुल हो जाएगी। पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में जहां नेटवर्क तक नहीं है, वहां यह व्यवस्था लोगों को अंधेरे में धकेलने जैसी है।
ग्राम पंचायत रोट की महिला निर्मला देवी ने कहा कि प्रदेश में सड़कें टूटी पड़ी हैं। सरकारी स्कूल और अस्पताल बदहाल हैं और बेरोजगार युवा भटक रहे हैं लेकिन सरकार को स्मार्ट मीटर लगाने की जल्दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से अपील की कि गरीबों की जेब पर डाका डालने जैसी इस योजना को तुरंत रोका जाए। महिलाओं के साथ उपायुक्त कार्यालय में पहुंचीं बराधिवीर महिला मंडल की प्रधान मीरा शर्मा ने कहा कि गांव में जहां पहले ही सरकारी स्कूलों और होटलों में लगे स्मार्ट मीटरों से नुकसान सामने आ चुका है, वहां अब पूरे ग्रामीण क्षेत्र पर यह बोझ डालने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि गांव में बड़ी संख्या में बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग रहते हैं जिनके लिए रिचार्ज करवाना परेशानी से कम नहीं है। इस दौरान ग्राम पंचायत संचाणी महिला मंडल की प्रधान सुनीता देवी ने कहा कि एक तरफ पिछले सात-आठ महीनों से सड़कें टूटी होने के कारण स्कूली विद्यार्थियों को 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। दूसरी तरफ सरकार स्मार्ट मीटर लगाकर गरीबों पर नया बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद नहीं की गई तो ग्रामीण महिलाएं सड़कों पर उतरकर जन आंदोलन छेड़ेंगी। महिला मंडलों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर से कोई फायदा नहीं, बल्कि यह फैसला गरीबों की परेशानियां बढ़ाने वाला है।
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स्मार्ट मीटर थोप रही प्रदेश सरकार, सड़कों और स्कूलों की नहीं ले रही सुध : निर्मला
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले के खिलाफ ग्रामीण महिलाएं सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। जिले की ग्राम पंचायत दलशाणी, रोट और संचाणी के महिला मंडलों की महिलाओं ने स्मार्ट मीटर को गरीब विरोधी फैसला बताते हुए उपायुक्त के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा है।
महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार बिजली मीटर बदलकर ग्रामीण और गरीब लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर प्री-पेड सिस्टम थोपा जा रहा है। जिसमें पहले रिचार्ज नहीं हुआ तो बिजली गुल हो जाएगी। पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में जहां नेटवर्क तक नहीं है, वहां यह व्यवस्था लोगों को अंधेरे में धकेलने जैसी है।
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ग्राम पंचायत रोट की महिला निर्मला देवी ने कहा कि प्रदेश में सड़कें टूटी पड़ी हैं। सरकारी स्कूल और अस्पताल बदहाल हैं और बेरोजगार युवा भटक रहे हैं लेकिन सरकार को स्मार्ट मीटर लगाने की जल्दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से अपील की कि गरीबों की जेब पर डाका डालने जैसी इस योजना को तुरंत रोका जाए। महिलाओं के साथ उपायुक्त कार्यालय में पहुंचीं बराधिवीर महिला मंडल की प्रधान मीरा शर्मा ने कहा कि गांव में जहां पहले ही सरकारी स्कूलों और होटलों में लगे स्मार्ट मीटरों से नुकसान सामने आ चुका है, वहां अब पूरे ग्रामीण क्षेत्र पर यह बोझ डालने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि गांव में बड़ी संख्या में बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग रहते हैं जिनके लिए रिचार्ज करवाना परेशानी से कम नहीं है। इस दौरान ग्राम पंचायत संचाणी महिला मंडल की प्रधान सुनीता देवी ने कहा कि एक तरफ पिछले सात-आठ महीनों से सड़कें टूटी होने के कारण स्कूली विद्यार्थियों को 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। दूसरी तरफ सरकार स्मार्ट मीटर लगाकर गरीबों पर नया बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद नहीं की गई तो ग्रामीण महिलाएं सड़कों पर उतरकर जन आंदोलन छेड़ेंगी। महिला मंडलों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर से कोई फायदा नहीं, बल्कि यह फैसला गरीबों की परेशानियां बढ़ाने वाला है।
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