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Kullu News: सीबकथॉर्न के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं ने की चर्चा
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लाहौल में एक महिला द्वारा एकत्रित किया छरमा, लेकिन महिलाओं को उचिचत बाजार नहीं मिल रहा है। संव
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी में सीबकथॉर्न से तैयार उत्पादों और हथकरघा सामान को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने के लिए वीरवार को गोहरमा में जरीम स्वयं सहायता समूह के बैनर तले बैठक हुई। इसमें महिलाओं ने सीबकथॉर्न के उत्पादन को बढ़ावा देने और इससे रोजगार के अवसर सृजित करने पर चर्चा की।
महिलाओं ने कहा कि पर्यटन स्थलों पर उनके उत्पादों की बिक्री के लिए स्टाल या छोटे शेड उपलब्ध करवाए जाएं ताकि स्थानीय महिलाओं को बेहतर बाजार मिल सके। जरीम स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष मान दासी ने बताया कि स्थानीय महिलाएं सीबकथॉर्न से जूस, पल्प और पत्तियों से तैयार विभिन्न उत्पादों के साथ-साथ हथकरघा सामान भी मेहनत से तैयार कर रही हैं।
इन उत्पादों की बिक्री के लिए उचित स्थान उपलब्ध नहीं होने से महिलाओं को बाजार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गोंदला क्षेत्र के दालंग गांव के समीप पर्यटन विभाग की ओर से बनाई गई दुकानों में से कुछ दुकानें स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध करवाई जाएं तो इसका सीधा लाभ स्थानीय महिलाओं को मिल सकता है।
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पर्यटन विभाग ने करीब एक-दो वर्ष पहले करोड़ों रुपये खर्च कर लगभग आधा दर्जन दुकानें तैयार की हैं, लेकिन अभी तक इनका उपयोग नहीं हो पाया है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ये दुकानें फिलहाल खाली पड़ी हैं। महिलाओं ने इन दुकानों को स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध करवाने की मांग उठाई है। शांति, सरिता और बिमला ने कहा कि पट्टन घाटी के करीब 30 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं स्थानीय उत्पाद तैयार कर रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधायक अनुराधा राणा और उपायुक्त किरण भड़ाना महिलाओं की इस मांग पर गौर करते हुए पर्यटन स्थलों पर बिक्री के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध करवाएंगी। संवाद
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महिलाओं ने कहा कि पर्यटन स्थलों पर उनके उत्पादों की बिक्री के लिए स्टाल या छोटे शेड उपलब्ध करवाए जाएं ताकि स्थानीय महिलाओं को बेहतर बाजार मिल सके। जरीम स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष मान दासी ने बताया कि स्थानीय महिलाएं सीबकथॉर्न से जूस, पल्प और पत्तियों से तैयार विभिन्न उत्पादों के साथ-साथ हथकरघा सामान भी मेहनत से तैयार कर रही हैं।
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इन उत्पादों की बिक्री के लिए उचित स्थान उपलब्ध नहीं होने से महिलाओं को बाजार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गोंदला क्षेत्र के दालंग गांव के समीप पर्यटन विभाग की ओर से बनाई गई दुकानों में से कुछ दुकानें स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध करवाई जाएं तो इसका सीधा लाभ स्थानीय महिलाओं को मिल सकता है।
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पर्यटन विभाग ने करीब एक-दो वर्ष पहले करोड़ों रुपये खर्च कर लगभग आधा दर्जन दुकानें तैयार की हैं, लेकिन अभी तक इनका उपयोग नहीं हो पाया है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ये दुकानें फिलहाल खाली पड़ी हैं। महिलाओं ने इन दुकानों को स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध करवाने की मांग उठाई है। शांति, सरिता और बिमला ने कहा कि पट्टन घाटी के करीब 30 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं स्थानीय उत्पाद तैयार कर रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधायक अनुराधा राणा और उपायुक्त किरण भड़ाना महिलाओं की इस मांग पर गौर करते हुए पर्यटन स्थलों पर बिक्री के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध करवाएंगी। संवाद