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बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है विजयदशमी : पंडित कुबेर
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कुल्लू। असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयदशमी का पर्व 21 अक्तूबर बुधवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला यह त्योहार लोगों को सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
दशहरा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में सदाचार अपनाने, अहंकार का त्याग करने और समाज में प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश भी देता है। लगघाटी के पंडित कुबेर दत्त शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्तूबर मंगलवार को दोपहर 12:52 बजे शुरू होगी और 21 अक्तूबर बुधवार को दोपहर 2:14 बजे तक रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार विजयदशमी का पर्व 21 अक्तूबर को मनाया जाएगा।
पंडित कुबेर दत्त शर्मा ने बताया कि विजयदशमी का वास्तविक संदेश केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अपने जीवन में भी अपनाने की जरूरत है। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। दशहरा लोगों को सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन से अहंकार, क्रोध, लोभ और द्वेष जैसी बुराइयों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। आपसी मतभेद भुलाकर समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को मजबूत बनाना ही इस पर्व की सच्ची भावना है। संवाद
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दशहरा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में सदाचार अपनाने, अहंकार का त्याग करने और समाज में प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश भी देता है। लगघाटी के पंडित कुबेर दत्त शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्तूबर मंगलवार को दोपहर 12:52 बजे शुरू होगी और 21 अक्तूबर बुधवार को दोपहर 2:14 बजे तक रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार विजयदशमी का पर्व 21 अक्तूबर को मनाया जाएगा।
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पंडित कुबेर दत्त शर्मा ने बताया कि विजयदशमी का वास्तविक संदेश केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अपने जीवन में भी अपनाने की जरूरत है। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। दशहरा लोगों को सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन से अहंकार, क्रोध, लोभ और द्वेष जैसी बुराइयों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। आपसी मतभेद भुलाकर समाज में प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को मजबूत बनाना ही इस पर्व की सच्ची भावना है। संवाद
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