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अचेत नड़ दैवीय शक्ति से हुआ खड़ा

Sun, 18 Jul 2021 09:36 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jul 2021 09:36 PM IST
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Unconscious nad arose from divine power
कुल्लू। लगघाटी के तहत आने वाले गांव भल्याणी में रविवार को सैकड़ों लोग दैवीय शक्ति के गवाह बने। काहिका उत्सव में अचेत होकर नड़ एक बार फिर खड़ा हो उठा। देवी-देवताओं के दादा कहलाए जाने वाले कतरूसी नारायण के सम्मान में रविवार को काहिका उत्सव मनाया गया। इसमें लगघाटी के देवता ब्रह्मा, देवता बीरनाथ, देवता क्षेत्रपाल भी लाव-लश्कर के साथ शामिल हुए।
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शुभ बेला में नड़ को अचेत किया गया। इसके बाद देवताओं ने अपनी शक्ति से नड़ को फिर से सचेत किया। काहिका उत्सव में ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों की स्वरलहरियों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इससे पहले ढोल-नगाड़ों की थाप पर जंगल से लाई गई ध्वजा को सुबह के समय स्थापित किया गया। इसके बाद दिनभर देव परंपराओं का निर्वहन होता रहा। देवता कतरूसी नारायण के कारदार रूम सिंह ने कहा कि कतरूसी नारायण (कृष्ण) के दरबार में काहिका के अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। श्रद्धालुओं ने देवताओं से सुख-समृद्धि की कामना की। काहिका में सभी देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। काहिका उत्सव में एक बात खास रही कि इसमें ग्रामीणों की ओर से नशे पर प्रतिबंध लगाया गया था। पारंपरिक व्यंजनों से मेहमानों की खूब आवभगत हुई। कोरोना के चलते इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं हुआ। भल्याणी गांव में काहिका उत्सव की धूम मची हुई है।
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