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निजी क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड मशीनों पर कड़ी नजर : सीएमओ
Thu, 30 Oct 2025 10:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 30 Oct 2025 10:27 PM IST
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बोले- अल्ट्रासोनोग्राफी करवाकर भ्रूण के लिंग का पता लगाने पर सजा का है प्रावधान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले के निजी स्वास्थ्य संस्थानों और क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड मशीनों पर हर समय कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि गर्भ में पल रहे भ्रूूण के लिंग का पता लगाने के लिए इनका उपयोग न हो सके।
पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एंड पीएनडीटी) अधिनियम, 1994 कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए पारित किया गया है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध है। प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक पीएनडीटी एक्ट 1996, के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। यह बात वीरवार को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर राज पंवार ने कही।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी करवाने वाले जोड़े या करने वाले चिकित्सक, प्रयोगशाला कर्मचारी को तीन से पांच साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जिले के निजी स्वास्थ्य संस्थानों और क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड और उससे जुड़ी हर जांच की निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बैठक में नई अल्ट्रासाउंड मशीनों की स्थापना के लिए आए आवेदनों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम, सहायक न्यायवादी ओमेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले के निजी स्वास्थ्य संस्थानों और क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड मशीनों पर हर समय कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि गर्भ में पल रहे भ्रूूण के लिंग का पता लगाने के लिए इनका उपयोग न हो सके।
पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एंड पीएनडीटी) अधिनियम, 1994 कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए पारित किया गया है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध है। प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक पीएनडीटी एक्ट 1996, के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। यह बात वीरवार को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर राज पंवार ने कही।
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उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी करवाने वाले जोड़े या करने वाले चिकित्सक, प्रयोगशाला कर्मचारी को तीन से पांच साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जिले के निजी स्वास्थ्य संस्थानों और क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड और उससे जुड़ी हर जांच की निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बैठक में नई अल्ट्रासाउंड मशीनों की स्थापना के लिए आए आवेदनों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम, सहायक न्यायवादी ओमेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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