ट्रामासेंटर में हो रहा है सामान्य मरीजों का उपचार
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क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों के लिए ट्रामा सेंटर बनाया गया है। यहां 24 घंटे एक डॉक्टर मरीजों की सेवा में तैनात किया गया, लेकिन बिडंबना यह है कि इस ट्रामासेंटर में स्थित आपातकालीन कक्ष में सामान्य मरीजों की कतारें लग रही है। इससे इमरजेंसी मरीजों के बेहतर इलाज करने के लिए तैनात एक मात्र डॉक्टर को भी समस्या पेश आ रही है। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के ट्रामासेंटर के लिए अत्याधुनिक सुविधा से लैस सामान तो भेज दिया है, लेकिन डॉक्टरों की पदनियुक्ति करना भूल गए हैं।
ओपीडी में अधिक भीड़ होने के कारण मरीज सामान्य ओपीडी की पर्ची बनवाकर इमरजेंसी में उपचार कराने ट्रामा सेंटर पहुंच जाते हैं। इससे आपातकालीन मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों के तीमारदार ओम प्रकाश, बुध राम, नानक चंद, सुषमा और गुड्डी का कहना है कि अस्पताल की ओपीडी सुबह के समय पर खुलनी चाहिए और आपातकालीन कक्ष में कम से कम से दो डॉक्टर तैनात होने चाहिए ताकि वे मरीजों की अच्छे से देखभाल कर सके।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में 30 सितंबर 2014 को आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रामासेंटर स्थापित हुई थी। उस समय लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें इलाज करवाने के लिए किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके बावजूद लोगों को कोई ज्यादा राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है।
विभागीय जानकारी के मुताबिक क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के ट्रामासेंटर को चार डॉक्टरों की आवश्यकता है। इमरजेंसी के दौरान मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने में मुश्किलें आ रही है। अस्पताल की ओपीडी में 27 डॉक्टर तैनात हैं। इन्हें ही शिफ्टों में एक-एक तैनात किया जाता है।
उधर, जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. वाईडी शर्मा का कहना है कि ट्रामासेंटर में इमरजेंसी मरीज को देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के साथ सामान्य मरीज भी ओपीडी में अपना उपचार करवा रहे हैं, लेकिन उन्हें मना नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ट्रामासेंटर के लिए डॉक्टरों की जरुरत तो है सरकार और निदेशालय के ध्यान में यह मामला है।