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बाढ़ में बहकर आईं लकड़ियों ने खोली सरकार कर कार्यप्रणाली की पोल : गोविंद
Fri, 11 Jul 2025 10:33 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 11 Jul 2025 10:33 PM IST
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कहा- कांग्रेस नेताओं ने तथ्यहीन मुद्दा बताकर की लीपापोती करने की कोशिश
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले के सैंज में 25 जून को बादल फटने से आई भीषण बाढ़ ने न केवल स्थानीय लोगों को तबाह किया, बल्कि सरकार और वन निगम की कार्यप्रणाली की भी पोल खोल दी है। इस बाढ़ में हजारों टन लकड़ी ब्यास नदी में बहकर पंडोह डैम पहुंची। इसके वीडियो और तस्वीरें पूरे प्रदेश में वायरल हुईं।
यह बात भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कही। कहा कि जब भाजपा ने इस संवेदनशील और गंभीर विषय को उठाया तो कांग्रेस नेताओं ने इसे तथ्यहीन मुद्दा बताकर लीपापोती करने की कोशिश की। जनता को तब हैरानी हुई, जब कांग्रेस के ही राष्ट्रीय सचिव और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने इस पूरे मामले में वन माफिया की आशंका जताई और मुख्यमंत्री से जांच की मांग की।
वन निगम ने रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि करीब 20 हजार हेक्टेयर जंगल का नुकसान हुआ है। इसमें 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क का हिस्सा है। सवाल उठता है कि जब यह स्थिति थी तो पहले वन विभाग ने अवैध कटान न होने की क्लीन चिट कैसे दे दी। उन्होंने पूछा कि ब्यास नदी में बहते दिखी लकड़ियां आखिर किसकी नाक के नीचे काटी गईं।
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आरोप लगाया कि सरकार दबाव में आकर कह रही है कि इस घटना की सीबीआई जांच कराई जाएगी। जिस सरकार के संरक्षण में शराब माफिया, खनन माफिया, भू-माफिया और अब वन माफिया प्रदेश में फल-फूल रहे हैं, उससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बड़ा धोखा है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले के सैंज में 25 जून को बादल फटने से आई भीषण बाढ़ ने न केवल स्थानीय लोगों को तबाह किया, बल्कि सरकार और वन निगम की कार्यप्रणाली की भी पोल खोल दी है। इस बाढ़ में हजारों टन लकड़ी ब्यास नदी में बहकर पंडोह डैम पहुंची। इसके वीडियो और तस्वीरें पूरे प्रदेश में वायरल हुईं।
यह बात भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कही। कहा कि जब भाजपा ने इस संवेदनशील और गंभीर विषय को उठाया तो कांग्रेस नेताओं ने इसे तथ्यहीन मुद्दा बताकर लीपापोती करने की कोशिश की। जनता को तब हैरानी हुई, जब कांग्रेस के ही राष्ट्रीय सचिव और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने इस पूरे मामले में वन माफिया की आशंका जताई और मुख्यमंत्री से जांच की मांग की।
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वन निगम ने रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि करीब 20 हजार हेक्टेयर जंगल का नुकसान हुआ है। इसमें 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क का हिस्सा है। सवाल उठता है कि जब यह स्थिति थी तो पहले वन विभाग ने अवैध कटान न होने की क्लीन चिट कैसे दे दी। उन्होंने पूछा कि ब्यास नदी में बहते दिखी लकड़ियां आखिर किसकी नाक के नीचे काटी गईं।
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आरोप लगाया कि सरकार दबाव में आकर कह रही है कि इस घटना की सीबीआई जांच कराई जाएगी। जिस सरकार के संरक्षण में शराब माफिया, खनन माफिया, भू-माफिया और अब वन माफिया प्रदेश में फल-फूल रहे हैं, उससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बड़ा धोखा है। संवाद