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Kullu News: ग्रामीणों ने बहे पुल की जगह पुलिया बनाकर सरकार को दिखाया आईना
Mon, 12 Feb 2024 11:28 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 12 Feb 2024 11:28 PM IST
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सैंज के तरेहड़ा गांव में ग्रामीणों द्वारा श्रमदान कर बनाई गई अस्थायी पुलिया।
सैंज (कुल्लू)। पिन पार्वती नदी के तट पर बसे तरेहड़ा गांव के ग्रामीणों ने श्रमदान से अस्थायी पुलिया बनाकर सरकार और जिला प्रशासन को आईना दिखाया है। रविवार को ब्रेहिण, बेकर, तरेहड़ा, सजाहरा, देवधार आदि गांवों के बुजुर्ग, नौजवान, महिलाएं और बच्चों ने नदी से पत्थर और लकड़ी ढोकर अस्थायी पुलिया बनाने में अहम भूमिका निभाई।
देवगढ़ गोही पंचायत के पूर्व प्रधान ताराचंद धामी ने कहा कि सरकार और प्रशासन से आग्रह करने पर भी जब समस्या का हल नहीं निकला तो ग्रामीणों ने श्रमदान से ही पुलिया तैयार कर दी। इससे दो पंचायतों के लोगों को आवागमन में सुविधा होगी। भलाण पंचायत के पूर्व प्रधान नारायण चंद्र ने बताया कि छह महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने अभी तक लोगों का दर्द नहीं समझा है।
आखिर सरकार और प्रशासन से उम्मीद छोड़नी पड़ी और श्रमदान से ही बहे पुल की जगह अस्थायी पुलिया का निर्माण करना पड़ा है। जुलाई 2023 में आई बाढ़ में दो पंचायतों के आवागमन का पुल नदी में बह गया था। ग्रामीणों को रोजमर्रा की सामग्री की व्यवस्था तथा स्कूली बच्चों को चार किमी अतिरिक्त सफर करना पड़ता था।
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ग्रामीणों ने इस संबंध में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद प्रतिभा सिंह से पुल बनाने की गुहार लगाई लेकिन ग्रामीणों को निराशा ही हाथ लगी। स्थानीय ग्रामीण मस्तराम महंत, पैने राम धामी, नीरत राम, प्रेम सुख, अमर सिंह, टेढ़ी सिंह, हीरालाल, शादी आदि ने बताया कि इस क्षेत्र में आपदा प्रबंधन भी नदारद है।
पुल की प्रपोजल तो भेज दी है। जल्द ही पुल का निर्माण किया जाएगा।
-विनय हाजरी, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण
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देवगढ़ गोही पंचायत के पूर्व प्रधान ताराचंद धामी ने कहा कि सरकार और प्रशासन से आग्रह करने पर भी जब समस्या का हल नहीं निकला तो ग्रामीणों ने श्रमदान से ही पुलिया तैयार कर दी। इससे दो पंचायतों के लोगों को आवागमन में सुविधा होगी। भलाण पंचायत के पूर्व प्रधान नारायण चंद्र ने बताया कि छह महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने अभी तक लोगों का दर्द नहीं समझा है।
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आखिर सरकार और प्रशासन से उम्मीद छोड़नी पड़ी और श्रमदान से ही बहे पुल की जगह अस्थायी पुलिया का निर्माण करना पड़ा है। जुलाई 2023 में आई बाढ़ में दो पंचायतों के आवागमन का पुल नदी में बह गया था। ग्रामीणों को रोजमर्रा की सामग्री की व्यवस्था तथा स्कूली बच्चों को चार किमी अतिरिक्त सफर करना पड़ता था।
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ग्रामीणों ने इस संबंध में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद प्रतिभा सिंह से पुल बनाने की गुहार लगाई लेकिन ग्रामीणों को निराशा ही हाथ लगी। स्थानीय ग्रामीण मस्तराम महंत, पैने राम धामी, नीरत राम, प्रेम सुख, अमर सिंह, टेढ़ी सिंह, हीरालाल, शादी आदि ने बताया कि इस क्षेत्र में आपदा प्रबंधन भी नदारद है।
पुल की प्रपोजल तो भेज दी है। जल्द ही पुल का निर्माण किया जाएगा।
-विनय हाजरी, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण