फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kullu News ›   The taste of Palau-desi ghee is missing, the chatter of Sepu Badi is being heard in Kullu's Dham.

Kullu News: पलाउ-देसी घी का स्वाद गायब, कुल्लू की धाम में लग रहे सेपू बड़ी के चटकारे

Thu, 05 Dec 2024 10:24 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Thu, 05 Dec 2024 10:24 PM IST
विज्ञापन
The taste of Palau-desi ghee is missing, the chatter of Sepu Badi is being heard in Kullu's Dham.
बदलते जमाने के साथ बदला शादियों का रिवाज, परोसे जा रहे बाहरी जिलों के व्यंजन
विज्ञापन

खाना पकाने के लिए सिलिंडर ने ले लकड़ी की जगह, अब नहीं होती ज्वारी प्रथा का निर्वहन

हरिराम चौधरी
सैंज (कुल्लू)। बदलते जमाने के साथ कुल्लू जिले में पारंपरिक शादियों का रिवाज भी बदल गया है। चपाती, दनोली, पटुरू, राजमा, आलू की सब्जी और कड़ी की खुशबू से महकने वाली धाम अब सेपू बड़ी के चटकारे लग रहे हैं।
सेपू बड़ी धाम में परोसा जाने वाला मंडी जिले का प्रसिद्ध व्यंजन है। वहीं, कुल्लू जिले में होने वाली शादियों में अब पलाउ (हलवा) का स्वाद भी कम ही चखने को मिल रहा है। बरातियों को परोसी जाने वाली इस धाम का जायका बदल चुका है। अब शादियों में परोसी जाने वाली धाम में बाहरी राज्यों और जिलों के व्यंजन भी शामिल हो गए हैं। खाना पकाने के लिए लकड़ी की जगह गैस सिलिंडर ने ले ली है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में पहले धाम तैयार करने के लिए ज्वारी प्रथा का निर्वहन किया जाता था। आसपास के गांवों के लोग धाम तैयार करने के लिए निशुल्क योगदान देते थे, लेकिन अब धाम के लिए बाहर से बोटी (रसोइये) बुलाए जा रहे हैं। इससे शादियों का खर्च तीन से चार गुना बढ़ गया है। वहीं, कुल्लू की मूल पहचान अब धीमी पड़ती जा रही है। शादियों के बदले स्वरूप में अब धाम पकाने, सब्जियां काटने और मसाले और अन्य चीजों को व्यवस्थित करने के लिए ग्रामीण एकत्रित नहीं होते। गांव के लगभग सभी परिवार इस काम में हिस्सा लिया करते थे, जो अब बीते जमाने की बात हो गई है। जिला कुल्लू अपनी परंपरा, संस्कृति, पोशाक, भाषा, कला और खानपान के मामले में समृद्ध विविधता के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन वक्त के साथ शादियों में परोसे जाने वाली धाम का स्वरूप बदल गया है।
विज्ञापन

बुजुर्ग दलू राम, नरपत सिंह, नारायण सिंह, ज्ञान चंद और मंगल चंद ने बताया कि कुल्लू की धाम संपूर्ण रूप में प्रस्तुत विभिन्न स्वाद का एक समूह होता था। इसमें राजमा, माश, कढ़ी, पलाउ, मदरा और देसी घी परोसा जाता था। अब धीरे-धीरे ये व्यंजन लुप्त हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पारंपरिक तरीके से धाम बनती है, लेकिन इसका मूल स्वरूप बदल गया है। लोग शादियों में फास्ट फूड को तरजीह देने लगे हैं। घी के साथ धाम परोसने का रिवाज अंतिम दौर में है। - वरयाम सिंह, बंजार

--कुल्लू की धाम में मीठा, बदाणा या कद्दू, आलू या कचालू का खट्टा, राजमा, उड़द की धुली दाल, लोबिया, सेपूबड़ी, लंबे पकौड़ों वाली कढ़ी और मीठे चावल परोसे जाते हैं। पटूरू, पचाती, दनोली पकाने का रिवाज अब नहीं रहा। - जगरनाथ, सैंज
--
पहले बासमती चावल, मैदे की पूरियां और छुआरे का खट्टा धाम का हिस्सा नहीं था। लाल चावल, गेहूं और जौ की रोटियों के साथ राजमा और आलू की सब्जी बनती थी। घी का संग्रहण ननिहाल पक्ष से किया जाता था। - डाबे राम, शांघड़

--
गांव के बोटी अनुशासन बनाए रखते थे। खाना-पीना बांटने का काम करते थे। एक से उठकर दूसरी पंक्ति में बैठ नहीं सकते थे। खाने का सत्र पूरा होने से पहले उठ नहीं सकते थे। समय के साथ काफी बदलाव आया है। - मोतीराम पालसरा, सैंज

--
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed