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Kullu News: मिट्टी सूखी तो कारोबार भी सूखा, सेब-प्लम को नहीं मिल रहे खरीदार
Sun, 14 Dec 2025 10:44 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 14 Dec 2025 10:44 PM IST
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खराहल क्षेत्र में नर्सरी में काम करते हुए लोग, ऑर्डर पर पौधों के बंडल बनाते हुए। संवाद
सूखे जैसे हालात के चलते कुल्लू जिले की नर्सरियों में फंसे हैं लाखों पौधे
नहीं आ रही है मांग, हर साल जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड भेजे जाते हैं पौधे
जिले की नर्सरियों में तैयार जापानी फल और अनार की भी रहती है मांग
बलदेव राज
कुल्लू। मौसम की बेरुखी ने कुल्लू जिले की नर्सरियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हर साल इसी समय सेब, प्लम और जापानी फल के पौधों की अच्छी मांग रहती है लेकिन सूखे जैसे हालात ने बागवानों को इंतजार की स्थिति में ला खड़ा किया है। पौधों की बिक्री ठप होने से नर्सरी संचालकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि लाखों पौधे स्टॉक में फंसे हुए हैं।
नर्सरियों में पौधों की डिमांड नहीं आ रही है। करीब ढाई महीने से सूखे जैसे हालात के चलते खेतों में नमी बेहद कम है। नए पौधे लगाने के लिए बागवान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। बारिश होने के बाद ही बागवान सेब, प्लम, जापानी फल, अनार आदि के पौधे खरीदेंगे। हर साल बाहरी राज्यों के लिए जिले से सेब, प्लम और जापानी फल आदि के हजारों पौधे जाते हैं। नर्सरियों में सेब, प्लम, जापानी फल के लाखों पौधों का स्टॉक लगभग 90 फीसदी तक डंप पड़ा है।
नर्सरियों में लाखों सेब पौधे तैयार हैं। जिले में 200 से अधिक पंजीकृत नर्सरियां हैं। कुल्लू से हर साल सेब के पौधे जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड सहित आदि क्षेत्रों के लिए जाते हैं। प्लम, जापानी फल और अनार के पौधे भी बाहरी राज्यों में जाते हैं। पूर्वोत्तर राज्य के अरुणाचल आदि में जापानी फल और प्लम की मांग अधिक रहती है। कुल्लू की नर्सरियों में तैयार पौधों की गुणवत्ता बेहद अच्छी होती है। इनकी मांग भी काफी होती है। बागवान डोले राम, पूर्ण चंद और रविंद्र सिंह ने कहा कि अक्तूबर के पहले सप्ताह में हुई बारिश के बाद बागवान बारिश की राह देख रहे हैं। बारिश न होने से न बगीचों में तौलिये बना पा रहे हैं और न ही नए पौधे लगाने के लिए गड्ढे बनाने का काम कर पा रहे हैं।
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दिसंबर के महीने में पौधों की डिमांड आना शुरू हो जाती थी। दिसंबर के दो सप्ताह बीत गए हैं, अभी तक सूखे जैसे हालात के चलते पौधों की डिमांड नहीं मिल पाई है। आने वाले दिनों में जब बारिश व बर्फबारी होगी। इसके बाद पौधों की ब्रिकी में तेजी आएगी। - जोगी ठाकुर, नर्सरी संचालक लगवैली
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नहीं आ रही है मांग, हर साल जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड भेजे जाते हैं पौधे
जिले की नर्सरियों में तैयार जापानी फल और अनार की भी रहती है मांग
बलदेव राज
कुल्लू। मौसम की बेरुखी ने कुल्लू जिले की नर्सरियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हर साल इसी समय सेब, प्लम और जापानी फल के पौधों की अच्छी मांग रहती है लेकिन सूखे जैसे हालात ने बागवानों को इंतजार की स्थिति में ला खड़ा किया है। पौधों की बिक्री ठप होने से नर्सरी संचालकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि लाखों पौधे स्टॉक में फंसे हुए हैं।
नर्सरियों में पौधों की डिमांड नहीं आ रही है। करीब ढाई महीने से सूखे जैसे हालात के चलते खेतों में नमी बेहद कम है। नए पौधे लगाने के लिए बागवान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। बारिश होने के बाद ही बागवान सेब, प्लम, जापानी फल, अनार आदि के पौधे खरीदेंगे। हर साल बाहरी राज्यों के लिए जिले से सेब, प्लम और जापानी फल आदि के हजारों पौधे जाते हैं। नर्सरियों में सेब, प्लम, जापानी फल के लाखों पौधों का स्टॉक लगभग 90 फीसदी तक डंप पड़ा है।
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नर्सरियों में लाखों सेब पौधे तैयार हैं। जिले में 200 से अधिक पंजीकृत नर्सरियां हैं। कुल्लू से हर साल सेब के पौधे जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड सहित आदि क्षेत्रों के लिए जाते हैं। प्लम, जापानी फल और अनार के पौधे भी बाहरी राज्यों में जाते हैं। पूर्वोत्तर राज्य के अरुणाचल आदि में जापानी फल और प्लम की मांग अधिक रहती है। कुल्लू की नर्सरियों में तैयार पौधों की गुणवत्ता बेहद अच्छी होती है। इनकी मांग भी काफी होती है। बागवान डोले राम, पूर्ण चंद और रविंद्र सिंह ने कहा कि अक्तूबर के पहले सप्ताह में हुई बारिश के बाद बागवान बारिश की राह देख रहे हैं। बारिश न होने से न बगीचों में तौलिये बना पा रहे हैं और न ही नए पौधे लगाने के लिए गड्ढे बनाने का काम कर पा रहे हैं।
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दिसंबर के महीने में पौधों की डिमांड आना शुरू हो जाती थी। दिसंबर के दो सप्ताह बीत गए हैं, अभी तक सूखे जैसे हालात के चलते पौधों की डिमांड नहीं मिल पाई है। आने वाले दिनों में जब बारिश व बर्फबारी होगी। इसके बाद पौधों की ब्रिकी में तेजी आएगी। - जोगी ठाकुर, नर्सरी संचालक लगवैली