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अठारह करड़ू की सौह में देवी-देवताओं का महाकुंभ 15 से

Sun, 10 Oct 2021 07:09 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 07:09 PM IST
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The Maha Kumbh of the gods and goddesses from 15
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के लिए अब महज चार दिन रह गए हैं। सौ करड़ू में (ढालपुर) 15 अक्तूबर से देवी-देवताओं का महाकुंभ दशहरा शुरू होगा। ऐसे में कई देवताओं का ढालपुर मैदान से आने का कार्यक्रम तय हो गया है। कुछ देवता ढालपुर में आने से पहले निमंत्रण पर भक्त के घर भी जाएंगे।
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आनी, निरमंड, बंजार, सैंज, खराहल, ऊझी और पार्वती घाटी के देवी-देवता लाव-लश्कर के साथ दशहरा उत्सव में शामिल होंगे। इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है कि कब देवता दशहरा के लिए प्रस्थान करेंगे। कई देवता दो दिन पहले तो कुछ देवता तीन दिन पहलेे ही ढालपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। नवरात्र में शुभ कार्य शुरू हो गए हैं। ऐसे में कई भक्तों ने देवता को अपने घर बुलाने की तैयारी कर रखी है। दशहरा के लिए आ रहे कई देवता भक्त के घर जाकर उन्हें आशीर्वाद भी देंगे। देवता का रात्रि ठहराव कहां रहेगा, यह सब तय हो चुका है। देव के प्रमुख कारकूनों की ओर से हारियानों को उत्सव में जाने की तैयारी करने के लिए कहा गया है। जिला कुल्लू के आराध्य देवता बिजली महादेव दशहरा से एक दिन पहले 14 अक्तूबर को धार्ठ कठार से लाव-लश्कर के साथ ढालपुर के लिए रवाना होंगे। इस बीच देवता का जगह-जगह भव्य स्वागत किया जाएगा। देवता का रात्रि ठहराव सुल्तानपुर में होगा। दशहरा के दिन देवता बिजली महादेव भगवान रघुनाथ के साथ ढालपुर के मैदान में आएंगे।
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ढालपुर में देवताओं को इस बार अपने खर्चे पर आना पड़ेगा। दशहरा उत्सव कमेटी की ओर से देवताओं को नजराना नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में देवता अपने खर्चे पर भी ढालपुर के अस्थायी शिविरों में रहेंगे। जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव नारायण चौहान ने कहा कि दशहरा नजदीक आते ही देवताओं ने ढालपुर कूच करने की तैयारी की ली है। अपनी सुविधा के हिसाब से देवता दशहरा के लिए निकलेंगे।
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करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं देवी-देवता
ढालपुर में आने वाले अधिकतर देवता करोड़ों की संपत्ति के मालिक है। देवता के पास करोड़ों के सोने-चांदी के आभूषण हैं। कई देवताओं के पास अपनी जमीन है। देवताओं के अस्थायी शिविर में अपनी रसोई लगती है, जिसे स्थानीय भाषा में चरूआ कहते हैं। इसमें खाना पकाया जाता है। देवता को भोग लगाने के बाद ही इसे कारकूनों व अन्य लोगों को खिलाया जाता है।
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