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Kullu News: मौसम की बेरुखी ने सूनी कर दीं नर्सरियां, पौधों की 80% बिक्री रुकी
Sat, 17 Jan 2026 10:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 17 Jan 2026 10:51 PM IST
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सूखे जैसे हालात के बीच नहीं बिक रहे पौधे, नर्सरी संचालकों में मायूसी
मांग घटने से नर्सरी संचालकों को झेलना पड़ रहा है आर्थिक नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में चार माह से बारिश नहीं हुई है। इस वजह से बगीचों की नमी कम हो रही है। बगीचों में कम नमी के चलते नए पौधों को रोपित करने का काम नहीं हो रहा है।
ऐसे में पौधों की नर्सरियों में 80 फीसदी तक बिक्री नहीं हो पाई है। बागवान सेब, प्लम और नाशपाती के पौधे खरीदने से दूरी बना रहे हैं। इससे नर्सरी संचालकों को दिक्कतों के साथ आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूखे के चलते पौधों की मांग बहुत कम हो गई है। हालांकि, जनवरी से पौधों की मांग बढ़ जाती थी लेकिन इस बार पौधों की बिक्री बहुत कम हो रही है।
नर्सरी संचालक प्रताप पठानिया, देवराज नेगी, सेस राम ने कहा कि बारिश न होना समस्या को बढ़ा रहा है। सूखे के कारण नर्सरियों से पौधों की बिक्री प्रभावित चल रही है। इन दिनों बागवान भी सूखे की वजह बगीचों में नए पौधों के लिए गड्ढे बनाने और पुराने पेड़ों के तौलिये बनाने का काम नहीं कर रहे हैं। सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के प्रधान लालचंद ठाकुर ने कहा कि सूखे के चलते नर्सरियों से पौधों की बिक्री बहुत कम हो रही है। बगीचों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण बागवान नए पौध नहीं खरीद रहे हैं। बारिश का इंतजार बागवान लंबे समय से कर रहे हैं।
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-- जिले में बारिश न होने के कारण मौसम शुष्क बना हुआ है। इसी वजह से बागवान बगीचों में नए पौधे लगाने से किनारा कर रहे हैं। हालांकि, जिले में 500 पंजीकृत नर्सरी संचालक हैं। बागवानों को बागवानी विभाग पंजीकृत नर्सरियों से पौधे खरीदने की सलाह देता है। - राज कुमार, उपनिदेशक बागवानी विभाग कुल्लू
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मांग घटने से नर्सरी संचालकों को झेलना पड़ रहा है आर्थिक नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में चार माह से बारिश नहीं हुई है। इस वजह से बगीचों की नमी कम हो रही है। बगीचों में कम नमी के चलते नए पौधों को रोपित करने का काम नहीं हो रहा है।
ऐसे में पौधों की नर्सरियों में 80 फीसदी तक बिक्री नहीं हो पाई है। बागवान सेब, प्लम और नाशपाती के पौधे खरीदने से दूरी बना रहे हैं। इससे नर्सरी संचालकों को दिक्कतों के साथ आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूखे के चलते पौधों की मांग बहुत कम हो गई है। हालांकि, जनवरी से पौधों की मांग बढ़ जाती थी लेकिन इस बार पौधों की बिक्री बहुत कम हो रही है।
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नर्सरी संचालक प्रताप पठानिया, देवराज नेगी, सेस राम ने कहा कि बारिश न होना समस्या को बढ़ा रहा है। सूखे के कारण नर्सरियों से पौधों की बिक्री प्रभावित चल रही है। इन दिनों बागवान भी सूखे की वजह बगीचों में नए पौधों के लिए गड्ढे बनाने और पुराने पेड़ों के तौलिये बनाने का काम नहीं कर रहे हैं। सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के प्रधान लालचंद ठाकुर ने कहा कि सूखे के चलते नर्सरियों से पौधों की बिक्री बहुत कम हो रही है। बगीचों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण बागवान नए पौध नहीं खरीद रहे हैं। बारिश का इंतजार बागवान लंबे समय से कर रहे हैं।
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