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बाह्य सराज के देवी-देवता 12 को कुल्लू होंगे रवाना
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कुल्लू। ढालपुर में 15 से 21 अक्तूबर तक मनाए जाने वाले देवी-देवताओं के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के लिए जिले के सैकड़ों देवी-देवताओं के रथों को सजाने का कार्य अंतिम दौर में है। दशहरा में भाग लेने के लिए बाह्य सराज के देवता 12 अक्तूबर को अपने देवालय से कुल्लू के लिए कूच करेंगे।
देवरथ रास्ते में पांच से छह पड़ावों में रुकेंगे। दशहरा में भाग लेने के लिए देव समाज में खुशी है। देवरथों के साथ-साथ ढोल-नगाड़े, नरसिंगे, करनाल व शहनाई को भी सजाया गया है। करीब दो सप्ताह तक देवी-देवताओं की चाकरी के लिए दशहरा उत्सव के लिए देवी-देवता के कारकूनों हारियानों तथा देवलुओं ने तैयारी कर दी हैं। हालांकि दशहरा उत्सव के लिए अभी एक हफ्ते का समय ही बचा है। ऐसे में जिला प्रशासन व देव समाज में हलचल तेज हो गई है। जिला कुल्लू के देवता खुडीजल 12 अक्तूबर को अपने देवालय देहुरी से रवाना होंगे। इसको लेकर शुक्रवार को देवता के मंदिर देहुरी में कारकूनों की बैठक हुई और दशहरा को लेकर रणनीति बनाई गई। इसमें निर्णय लिया गया कि 12 अक्तूबर को देवता खुडीजल फनौटी व जलोड़ी दर्रा के बजाय मंडी जिले के खौली व गाड़ागुशैणी होकर निकलेंगे। देवता पूरे लाव-लश्कर के साथ दशहरा के लिए रवाना होंगे।
घाटी के निरमंड व आनी के देवी-देवताओं के रथ भी 12 अक्तूबर से आने शुरू होंगे, जबकि बंजार और सैंज घाटी के दुर्गम इलाकों के देवी-देवता भी 12 और 13 अक्तूबर को अपने देवालय से निकल कर पहले पड़ाव की ओर प्रस्थान करेंगे। जिला देवी-देवता कारदार संघ के कोषाध्यक्ष एवं देवता खुडीजल के कारदार शेर सिंह ने कहा कि देवता खुडीजल 12 अक्तूबर को कुल्लू के लिए रवाना होंगे। सभी कारकूनों ने बैठक में यह निर्णय लिया है। उपायुक्त कुल्लू एवं दशहरा समिति के उपाध्यक्ष आशुतोष गर्ग ने कहा कि दशहरा में आने वाले देवी-देवताओं की सुरक्षा, रहन-सहन व अन्य सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। दशहरा में देवी-देवताओं का स्वागत है।
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इन देवी-देवताओं के आने की संभावना
कुल्लू। दशहरा उत्सव समिति ने इस बार करीब 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण पत्र दिया है। लेकिन नजराना राशि न मिलने से देवताओं के कम आने की भी संभावना है। इसके बावजूद दशहरा के लिए आने वालों में बाह्य सराज के अधिष्ठाता देवता खुडीजल, ब्यास ऋषि, कोट पझारी, टकरासी नाग तथा चोतरू नाग सहित देवता चंभू शकोली, चंभू रंदल तथा सप्तऋषि शामिल हैं।
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देवरथ रास्ते में पांच से छह पड़ावों में रुकेंगे। दशहरा में भाग लेने के लिए देव समाज में खुशी है। देवरथों के साथ-साथ ढोल-नगाड़े, नरसिंगे, करनाल व शहनाई को भी सजाया गया है। करीब दो सप्ताह तक देवी-देवताओं की चाकरी के लिए दशहरा उत्सव के लिए देवी-देवता के कारकूनों हारियानों तथा देवलुओं ने तैयारी कर दी हैं। हालांकि दशहरा उत्सव के लिए अभी एक हफ्ते का समय ही बचा है। ऐसे में जिला प्रशासन व देव समाज में हलचल तेज हो गई है। जिला कुल्लू के देवता खुडीजल 12 अक्तूबर को अपने देवालय देहुरी से रवाना होंगे। इसको लेकर शुक्रवार को देवता के मंदिर देहुरी में कारकूनों की बैठक हुई और दशहरा को लेकर रणनीति बनाई गई। इसमें निर्णय लिया गया कि 12 अक्तूबर को देवता खुडीजल फनौटी व जलोड़ी दर्रा के बजाय मंडी जिले के खौली व गाड़ागुशैणी होकर निकलेंगे। देवता पूरे लाव-लश्कर के साथ दशहरा के लिए रवाना होंगे।
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घाटी के निरमंड व आनी के देवी-देवताओं के रथ भी 12 अक्तूबर से आने शुरू होंगे, जबकि बंजार और सैंज घाटी के दुर्गम इलाकों के देवी-देवता भी 12 और 13 अक्तूबर को अपने देवालय से निकल कर पहले पड़ाव की ओर प्रस्थान करेंगे। जिला देवी-देवता कारदार संघ के कोषाध्यक्ष एवं देवता खुडीजल के कारदार शेर सिंह ने कहा कि देवता खुडीजल 12 अक्तूबर को कुल्लू के लिए रवाना होंगे। सभी कारकूनों ने बैठक में यह निर्णय लिया है। उपायुक्त कुल्लू एवं दशहरा समिति के उपाध्यक्ष आशुतोष गर्ग ने कहा कि दशहरा में आने वाले देवी-देवताओं की सुरक्षा, रहन-सहन व अन्य सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। दशहरा में देवी-देवताओं का स्वागत है।
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इन देवी-देवताओं के आने की संभावना
कुल्लू। दशहरा उत्सव समिति ने इस बार करीब 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण पत्र दिया है। लेकिन नजराना राशि न मिलने से देवताओं के कम आने की भी संभावना है। इसके बावजूद दशहरा के लिए आने वालों में बाह्य सराज के अधिष्ठाता देवता खुडीजल, ब्यास ऋषि, कोट पझारी, टकरासी नाग तथा चोतरू नाग सहित देवता चंभू शकोली, चंभू रंदल तथा सप्तऋषि शामिल हैं।