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Kullu News: टूटते-बिखरते गांवों को जियोलॉजिकल सर्वे टीम का इंतजार
Wed, 13 Aug 2025 04:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 13 Aug 2025 04:38 AM IST
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जिला प्रशासन ने की है तीन गांवों का सर्वे करने के लिए टीम भेजने की सिफारिश की
टिचना, घलियाड़ और टलिंगा गांवों के धंसने का सर्वे में हो सकता है खुलासा
गौरीशंकर
कुल्लू। पहाड़ों की गोद में बसे गांव, जिनकी जमीन हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा सरक रही है और घरों की दीवारों में आई दरारें अब खौफ की लकीरें बन चुकी हैं। लोग रातें जागकर गुजार रहे हैं, इस डर से कि न जाने अगली सुबह कैसी होगी। उम्मीद बस एक है कि जियोलॉजिकल सर्वे टीम आए, हकीकत जाने और टूटते-बिखरते गांवों को बचाया जा सके।
प्रशासन ने ऐसे तीन गांवों का सर्वे करने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे टीम भेजने की सिफारिश की है। बंजार उपमंडल के तहत आने वाले तीन गांव टिचना शरण, घलियाड़ और टलिंगा गांव डेंजर जोन में आ चुके हैं और लोगों ने पहाड़ी दरकने के खौफ से घर खाली कर दिए हैं। सैंज घाटी का टिचना गांव के पीछे पहाड़ी पूरी धंस रही है, जिसमें बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं।
हालांकि गांव के लोगों का कहना है कि पहाड़ी एनएचपीसी की ओर से सड़क और प्रोजेक्ट निर्माण से निकले मलबे को अवैध तरीके से यहां डंप करने के कारण पहाड़ी दरक रही है, लेकिन इसके सही कारणों का पता जियोलॉजिकल सर्वे करने के बाद पता चल सकेगा। ऐसे में प्रशासन ने इस पहाड़ी का सर्वे करने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे करने की सिफारिश की है।
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यहां 12 परिवारों के मकान खतरे में हैं जबकि इसके अलावा घलियाड़ में 49 परिवार के घर खतरे में है और टलिंगा में 24 परिवार के घरों को खतरा बना हुआ है।
जिले में 326 परिवारों के घर खतरे में
जिले के आठ गांवों पर खतरा मंडरा रहा है जिसमें 326 परिवारों के घर खतरे में पडे़ हैं। इस कड़ी में डेंजर जोन में जा चुके तीन गांवों के अलावा कुपनी में 37, गलवाहधार में 52, बरड़ा में 4, धरमेड़ा में 14 परिवारों के मकानों को भी खतरा पैदा हुआ है। उपरोक्त गांंवों के अलावा मणिकर्ण घाटी के शिल्हा में 135 परिवार के घर खतरे में हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
बंजार उपमंडल के तीन गांवों घलियाड़, टलिंगा, टिचना शरण गांव को ज्यादा ही खतरा बना हुआ है। ऐसे में यहां हो रहे भूस्खलन के कारणों का पता लगाने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे टीम भेजने की सिफारिश की है। ताकि वैज्ञानिक तरीके से इस पर नियंत्रण किया जा सके।-पंकज शर्मा, उप-मंडलाधिकारी बंजार
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टिचना, घलियाड़ और टलिंगा गांवों के धंसने का सर्वे में हो सकता है खुलासा
गौरीशंकर
कुल्लू। पहाड़ों की गोद में बसे गांव, जिनकी जमीन हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा सरक रही है और घरों की दीवारों में आई दरारें अब खौफ की लकीरें बन चुकी हैं। लोग रातें जागकर गुजार रहे हैं, इस डर से कि न जाने अगली सुबह कैसी होगी। उम्मीद बस एक है कि जियोलॉजिकल सर्वे टीम आए, हकीकत जाने और टूटते-बिखरते गांवों को बचाया जा सके।
प्रशासन ने ऐसे तीन गांवों का सर्वे करने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे टीम भेजने की सिफारिश की है। बंजार उपमंडल के तहत आने वाले तीन गांव टिचना शरण, घलियाड़ और टलिंगा गांव डेंजर जोन में आ चुके हैं और लोगों ने पहाड़ी दरकने के खौफ से घर खाली कर दिए हैं। सैंज घाटी का टिचना गांव के पीछे पहाड़ी पूरी धंस रही है, जिसमें बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं।
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हालांकि गांव के लोगों का कहना है कि पहाड़ी एनएचपीसी की ओर से सड़क और प्रोजेक्ट निर्माण से निकले मलबे को अवैध तरीके से यहां डंप करने के कारण पहाड़ी दरक रही है, लेकिन इसके सही कारणों का पता जियोलॉजिकल सर्वे करने के बाद पता चल सकेगा। ऐसे में प्रशासन ने इस पहाड़ी का सर्वे करने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे करने की सिफारिश की है।
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यहां 12 परिवारों के मकान खतरे में हैं जबकि इसके अलावा घलियाड़ में 49 परिवार के घर खतरे में है और टलिंगा में 24 परिवार के घरों को खतरा बना हुआ है।
जिले में 326 परिवारों के घर खतरे में
जिले के आठ गांवों पर खतरा मंडरा रहा है जिसमें 326 परिवारों के घर खतरे में पडे़ हैं। इस कड़ी में डेंजर जोन में जा चुके तीन गांवों के अलावा कुपनी में 37, गलवाहधार में 52, बरड़ा में 4, धरमेड़ा में 14 परिवारों के मकानों को भी खतरा पैदा हुआ है। उपरोक्त गांंवों के अलावा मणिकर्ण घाटी के शिल्हा में 135 परिवार के घर खतरे में हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
बंजार उपमंडल के तीन गांवों घलियाड़, टलिंगा, टिचना शरण गांव को ज्यादा ही खतरा बना हुआ है। ऐसे में यहां हो रहे भूस्खलन के कारणों का पता लगाने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे टीम भेजने की सिफारिश की है। ताकि वैज्ञानिक तरीके से इस पर नियंत्रण किया जा सके।-पंकज शर्मा, उप-मंडलाधिकारी बंजार