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हरित अर्थव्यवस्था से ही सतत विकास संभव : डॉ. हरीश
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मौहल जीबी पंत में आयोजित 13वां वार्षिक दिवस में जानकारी देते मुख्य वबक्ता।-संवाद
कुल्लू। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान मौहल में वीरवार को संस्थान के वार्षिक दिवस के उपलक्ष्य पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोलन के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. हरीश कुमार शर्मा मुख्यातिथि रहे। उन्होंने हरित अर्थव्यवस्था अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हरित अर्थव्यवस्था एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जिसका उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सतत विकास करना और पारिस्थितिकीय जोखिमों को कम करना है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हिमाचल प्रदेश वन अकादमी सुंदरनगर के निदेशक सुभाष चंद्र पराशर तथा वन संरक्षक कुल्लू संदीप शर्मा ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान संस्थान की विभिन्न पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। इससे पहले संस्थान के प्रभारी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने संस्थान की प्रगति और प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी।
इस मौके पर मौजूद प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मिशन लाइफ की शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वसुधा अग्निहोत्री, डॉ. सरला शाशनी, डॉ. केसर चंद, डॉ. किशोर कुमार आदि ने भाग लिया।
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उन्होंने कहा कि हरित अर्थव्यवस्था एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है जिसका उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सतत विकास करना और पारिस्थितिकीय जोखिमों को कम करना है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हिमाचल प्रदेश वन अकादमी सुंदरनगर के निदेशक सुभाष चंद्र पराशर तथा वन संरक्षक कुल्लू संदीप शर्मा ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान संस्थान की विभिन्न पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। इससे पहले संस्थान के प्रभारी डॉ. राकेश कुमार सिंह ने संस्थान की प्रगति और प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी।
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इस मौके पर मौजूद प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मिशन लाइफ की शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वसुधा अग्निहोत्री, डॉ. सरला शाशनी, डॉ. केसर चंद, डॉ. किशोर कुमार आदि ने भाग लिया।
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