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Kullu News: आरक्षण में क्रीमी लेयर का विरोध
Thu, 22 Aug 2024 07:20 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 22 Aug 2024 07:20 AM IST
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एससी एंव एसटी संघर्ष समिति जिला कुल्लू ने आरक्षण में क्रीमी लेयर को लेकर एडीएम कुल्लू के माध्यम
भुंतर (कुल्लू)। अनुसूचित जाति एवं जनजाति संघर्ष समिति जिला कुल्लू ने एससी और एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का विरोध किया है। बुधवार को समिति के संयोजक अमर चंद शलाठ की अध्यक्षता में एडीएम कुल्लू अश्वनी कुमार के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया, जिसमें उन्होंने क्रीमी लेयर के सुझाव को अनुचित बताया।
ज्ञापन में कहा गया कि अनुच्छेद 340 की धारा के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जातियों के लिए 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। मगर आज तक किसी भी सरकारी विभाग में इस आरक्षण का पूरा कोटा नहीं भरा गया है।
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेशित किया है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण का राज्य सरकारों द्वारा सर्वे कराया जाए और क्रीमी लेयर की पहचान की जाए। समिति ने इस आदेश की आलोचना करते हुए कहा कि इससे अनुसूचित जाति और जनजातियों को नुकसान होगा और जातिगत आधार पर समाज में बंटवारा होगा।
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समिति ने मांग की है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण कोटा सभी सरकारी विभागों में पूरा किया जाए। इसके साथ ही, गैर सरकारी संस्थानों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक सभी विभागों में आरक्षण कोटा पूरा नहीं होता, तब तक इस प्रावधान को संविधान की नौंवी सूची में डालने की आवश्यकता है।
ज्ञापन के दौरान समिति के कई सदस्य भी मौजूद थे और उन्होंने अपने समर्थन की घोषणा की।
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ज्ञापन में कहा गया कि अनुच्छेद 340 की धारा के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जातियों के लिए 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। मगर आज तक किसी भी सरकारी विभाग में इस आरक्षण का पूरा कोटा नहीं भरा गया है।
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हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेशित किया है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण का राज्य सरकारों द्वारा सर्वे कराया जाए और क्रीमी लेयर की पहचान की जाए। समिति ने इस आदेश की आलोचना करते हुए कहा कि इससे अनुसूचित जाति और जनजातियों को नुकसान होगा और जातिगत आधार पर समाज में बंटवारा होगा।
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समिति ने मांग की है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण कोटा सभी सरकारी विभागों में पूरा किया जाए। इसके साथ ही, गैर सरकारी संस्थानों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक सभी विभागों में आरक्षण कोटा पूरा नहीं होता, तब तक इस प्रावधान को संविधान की नौंवी सूची में डालने की आवश्यकता है।
ज्ञापन के दौरान समिति के कई सदस्य भी मौजूद थे और उन्होंने अपने समर्थन की घोषणा की।