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Kullu News: सड़क खस्ताहील, बसें सेवा है नहीं, अंधेरे में पैदल घर पहुंच रहे विद्यार्थी
Sun, 14 Dec 2025 10:23 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 14 Dec 2025 10:23 PM IST
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मणिकर्ण घाटी के बाशिंदे हर दिन पैदल कर रहे कई किलोमीटर का सफर
चार महीने से नहीं दौड़ी बस, लोगों को लेना पड़ रहा टैक्सियों का सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। मणिकर्ण घाटी के विद्यार्थी और ग्रामीण अब भी बस सेवा न मिलने से अंधेरे में पैदल सफर कर रहे हैं। बरशैणी, तोष, तुलगा और पुलगा के निवासी हर दिन कई किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बस सेवा सुचारू होती तो बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीणों की परेशानी दोनों कम हो जाती। आपदा के बाद चार महीने बाद भी जिले के दुर्गम क्षेत्रों में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। मणिकर्ण घाटी की मणिकर्ण से बरशैणी के बीच 10 किलोमीटर की बात करें तो इसमें अभी तक बस सेवा लोगों को नहीं मिल रही है।
बरशैणी, तोष, तुलगा और पुलगा की तरफ की काफी अधिक संख्या में पर्यटक भी जाते हैं। बावजूद इसके सड़क की हालत को खस्ताहाल छोड़ा हुआ है। हैरान करने वाली बात यह है कि एनएचपीसी का पार्वती परियोजना का करोड़ों की कमाई वाला प्रोजेक्ट भी बरशैणी में है लेकिन पांच गांवों के लोग खासकर विद्यार्थी अंधेरे में घर पहुंच रहे हैं। घाटी के राशकड़, बलारगा, शिल्हा, ऊच और लियागी गांव के विद्यार्थी मणिकर्ण स्कूल के लिए पढ़ने आते हैं। शाम चार बजे के बाद कोई बस न मिलने से इन विद्यार्थियों को पैदल ही सफर करना पड़ रहा है। कई किलोमीटर पैदल सफर कर विद्यार्थी घर पहुंचते हैं। सर्दियों में 5:30 बजे ही अंधेरा हो जाता है। ऐसे में बच्चे अंधेरे में पहुंचते हैं। लोगों को टैक्सियों का भी सहारा लेना पड़ रहा है। दोगुना किराया देने को ग्रामीण मजबूर हैं।
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मणिकर्ण से बरशैणी के बीच घटीगढ़ नामक जगह पर पिछले महीने भूस्खलन से सड़क कुछ दिनों के लिए बाधित हुई थी। पहाड़ी से रास्ता पार करते हुए दो पर्यटक भी यहां गिरकर घायल हो गए थे। लगातार हो रही अनदेखी के चलते ग्रामीणों में नाराजगी है। उपायुक्त तोरुल एस रवीश का कहना है कि विभाग को सड़क को बसें चलाने योग्य बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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मणिकर्ण से बरशैणी तक सड़क की हालत बेहद खराब है। बस सेवा ठप होने से विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। विद्यार्थी अंधेरे में घर पहुंच रहे हैं। घरटीगढ़ तक सड़क ठीक है तो यहां तक भी बस चलाई जा सकती थी। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। - ठाकुर चंद, पूर्व मणिकर्ण पंचायत प्रधान
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मणिकर्ण स्कूल के पैदल जाने वाले बच्चों को लेकर हादसों का डर रहता है। इन दिनों जंगली जानवर रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। अगर मणिकर्ण से बरशैणी के बीच बस सेवा सुचारू होती है तो इस तरह की परेशानी नहीं आएगी। -चेत राम, उप प्रधान मणिकर्ण
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चार महीने से नहीं दौड़ी बस, लोगों को लेना पड़ रहा टैक्सियों का सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। मणिकर्ण घाटी के विद्यार्थी और ग्रामीण अब भी बस सेवा न मिलने से अंधेरे में पैदल सफर कर रहे हैं। बरशैणी, तोष, तुलगा और पुलगा के निवासी हर दिन कई किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बस सेवा सुचारू होती तो बच्चों की सुरक्षा और ग्रामीणों की परेशानी दोनों कम हो जाती। आपदा के बाद चार महीने बाद भी जिले के दुर्गम क्षेत्रों में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। मणिकर्ण घाटी की मणिकर्ण से बरशैणी के बीच 10 किलोमीटर की बात करें तो इसमें अभी तक बस सेवा लोगों को नहीं मिल रही है।
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बरशैणी, तोष, तुलगा और पुलगा की तरफ की काफी अधिक संख्या में पर्यटक भी जाते हैं। बावजूद इसके सड़क की हालत को खस्ताहाल छोड़ा हुआ है। हैरान करने वाली बात यह है कि एनएचपीसी का पार्वती परियोजना का करोड़ों की कमाई वाला प्रोजेक्ट भी बरशैणी में है लेकिन पांच गांवों के लोग खासकर विद्यार्थी अंधेरे में घर पहुंच रहे हैं। घाटी के राशकड़, बलारगा, शिल्हा, ऊच और लियागी गांव के विद्यार्थी मणिकर्ण स्कूल के लिए पढ़ने आते हैं। शाम चार बजे के बाद कोई बस न मिलने से इन विद्यार्थियों को पैदल ही सफर करना पड़ रहा है। कई किलोमीटर पैदल सफर कर विद्यार्थी घर पहुंचते हैं। सर्दियों में 5:30 बजे ही अंधेरा हो जाता है। ऐसे में बच्चे अंधेरे में पहुंचते हैं। लोगों को टैक्सियों का भी सहारा लेना पड़ रहा है। दोगुना किराया देने को ग्रामीण मजबूर हैं।
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मणिकर्ण से बरशैणी के बीच घटीगढ़ नामक जगह पर पिछले महीने भूस्खलन से सड़क कुछ दिनों के लिए बाधित हुई थी। पहाड़ी से रास्ता पार करते हुए दो पर्यटक भी यहां गिरकर घायल हो गए थे। लगातार हो रही अनदेखी के चलते ग्रामीणों में नाराजगी है। उपायुक्त तोरुल एस रवीश का कहना है कि विभाग को सड़क को बसें चलाने योग्य बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मणिकर्ण से बरशैणी तक सड़क की हालत बेहद खराब है। बस सेवा ठप होने से विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। विद्यार्थी अंधेरे में घर पहुंच रहे हैं। घरटीगढ़ तक सड़क ठीक है तो यहां तक भी बस चलाई जा सकती थी। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। - ठाकुर चंद, पूर्व मणिकर्ण पंचायत प्रधान
मणिकर्ण स्कूल के पैदल जाने वाले बच्चों को लेकर हादसों का डर रहता है। इन दिनों जंगली जानवर रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। अगर मणिकर्ण से बरशैणी के बीच बस सेवा सुचारू होती है तो इस तरह की परेशानी नहीं आएगी। -चेत राम, उप प्रधान मणिकर्ण