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Kullu News: तिब्बत की आजादी के लिए निकाली रैली
Fri, 10 Mar 2023 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 10 Mar 2023 11:11 PM IST
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कुल्लू। जिला मुख्यालय कुल्लू में तिब्बत की आजादी के लिए आवाज बुलंद की गई। सैकड़ों तिब्बती लोगों ने सड़कों पर उतरकर चीन के खिलाफ नारेबाजी की। तिब्बतियों ने हनुमानी बाग से ढालपुर चौक, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, न्यायालय परिसर, उपायुक्त कार्यालय, क्षेत्रीय अस्पताल, कॉलेज चौक, लालचंद प्रार्थी कलाकेंद्र होते हुए परेड मैदान तक रैली निकाली।
इसके बाद तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान से 64वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस का शुभारंभ किया। इसके अलावा तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
तिब्बती समुदाय के वेलफेयर ऑफिसर थुपचेन दोफेल ने कहा कि 10 मार्च 1959 में तिब्बतियों ने तिब्बत पर चीनी सरकार के कब्जे के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया था। उसी दिन को याद करते हुए शुक्रवार को कुल्लू जिले में रैली निकालकर तिब्बत की आजादी के लिए आवाज उठाई गई।
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उन्होंने कहा कि 10 मार्च को 64वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस के अलावा तिब्बतियों की अहिंसक विरोध की 15वीं वर्षगांठ भी मनाई गई। कहा कि चीन के कब्जे के बाद तिब्बत में स्थानीय लोगों को जीने की मूलभूत सुविधाओं का भी अधिकार नहीं है। न शिक्षा, न धर्म, न ही चलने-फिरने की आजादी है। हमें तिब्बत के अंदर धर्म और संस्कृति की आजादी चाहिए। इस दौरान टशी पलजोर, हीरालाल ठाकुर आदि उपस्थित रहे। संवाद
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इसके बाद तिब्बत और भारत के राष्ट्रगान से 64वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस का शुभारंभ किया। इसके अलावा तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह करने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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तिब्बती समुदाय के वेलफेयर ऑफिसर थुपचेन दोफेल ने कहा कि 10 मार्च 1959 में तिब्बतियों ने तिब्बत पर चीनी सरकार के कब्जे के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया था। उसी दिन को याद करते हुए शुक्रवार को कुल्लू जिले में रैली निकालकर तिब्बत की आजादी के लिए आवाज उठाई गई।
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उन्होंने कहा कि 10 मार्च को 64वें तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस के अलावा तिब्बतियों की अहिंसक विरोध की 15वीं वर्षगांठ भी मनाई गई। कहा कि चीन के कब्जे के बाद तिब्बत में स्थानीय लोगों को जीने की मूलभूत सुविधाओं का भी अधिकार नहीं है। न शिक्षा, न धर्म, न ही चलने-फिरने की आजादी है। हमें तिब्बत के अंदर धर्म और संस्कृति की आजादी चाहिए। इस दौरान टशी पलजोर, हीरालाल ठाकुर आदि उपस्थित रहे। संवाद