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महिलाओं को खूब भा रही ऊनी धागे की राखियां
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बंजार/कुल्लू। रक्षाबंधन को लेकर जिला के बाजार सज गए हैं। राखी के त्योहार को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भाई और बहन के इस पवित्र और प्यार भरे रिश्ते को लेकर बाजारों में विभिन्न प्रकार की डिजाइन वाली राखियां उपलब्ध हैं। साथ ही इस बार लोकल फॉर वोकल के तहत स्वदेशी राखियां बाजार में उतरी हैं। ऊनी धागे की सस्ती और आकर्षक राखियां महिलाओं को उपलब्ध हो रही हैं। ऊनी धागों से बनी रंग-बिरंगी स्वदेशी राखियों की मांग अधिक है।
शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी जगह-जगह दुकानों में रंग-बिरंगी राखियां बेचने के लिए रखी गई हैं। बहनों ने अपने भाइयों के लिए राखियों की खरीदारी आरंभ कर दी है। साथ ही त्योहार को लेकर मिठाई की दुकानों को भी सजाया जा रहा है। हालांकि कोरोना महामारी के कारण अभी राखियों के कारोबार ने जिला में रफ्तार नहीं पकड़ी है। आशा शर्मा, इंदिरा, बीना, इंदिरा परमार, पूर्वा, अंजना, मीना, रजनी, रामेश्वरी, बबीता, गंगा, याशिका, रक्षा, सीमा, पूनम, अंजली ने कहा कि बहनों को इस पर्व का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। एक वर्ष बाद बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। राखी विक्रेता मेघना, वैष्णवी शर्मा, रामपाल, राम मोहन, राकेश, बुधराम, ललित ने कहा कि इस वर्ष भारत-चीन सीमा विवाद के चलते प्रदेश व जिला में चीनी सामान का बहिष्कार किया जा रहा है। ऐसे में लोकल राखियां विभिन्न आकर्षक डिजाइनों में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि लोकल फॉर वोकल को स्थानीय महिलाएं और लड़कियां तरजीह दे रही हैं। इस बार बाजारों में चमक दमक वाली चीनी राखियों को दरकिनार किया जा रहा है। ऊनी धागों से बनी रंग-बिरंगी स्वदेशी राखियों की खरीदारी अधिक की जा रही है। हालांकि फिलहाल कोरोना संक्रमण के चलते कारोबार में कमी आंकी जा रही है। कहा कि आगामी दो दिनों में राखी के व्यापारियों को अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है।
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शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी जगह-जगह दुकानों में रंग-बिरंगी राखियां बेचने के लिए रखी गई हैं। बहनों ने अपने भाइयों के लिए राखियों की खरीदारी आरंभ कर दी है। साथ ही त्योहार को लेकर मिठाई की दुकानों को भी सजाया जा रहा है। हालांकि कोरोना महामारी के कारण अभी राखियों के कारोबार ने जिला में रफ्तार नहीं पकड़ी है। आशा शर्मा, इंदिरा, बीना, इंदिरा परमार, पूर्वा, अंजना, मीना, रजनी, रामेश्वरी, बबीता, गंगा, याशिका, रक्षा, सीमा, पूनम, अंजली ने कहा कि बहनों को इस पर्व का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। एक वर्ष बाद बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। राखी विक्रेता मेघना, वैष्णवी शर्मा, रामपाल, राम मोहन, राकेश, बुधराम, ललित ने कहा कि इस वर्ष भारत-चीन सीमा विवाद के चलते प्रदेश व जिला में चीनी सामान का बहिष्कार किया जा रहा है। ऐसे में लोकल राखियां विभिन्न आकर्षक डिजाइनों में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि लोकल फॉर वोकल को स्थानीय महिलाएं और लड़कियां तरजीह दे रही हैं। इस बार बाजारों में चमक दमक वाली चीनी राखियों को दरकिनार किया जा रहा है। ऊनी धागों से बनी रंग-बिरंगी स्वदेशी राखियों की खरीदारी अधिक की जा रही है। हालांकि फिलहाल कोरोना संक्रमण के चलते कारोबार में कमी आंकी जा रही है। कहा कि आगामी दो दिनों में राखी के व्यापारियों को अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है।
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