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Kullu News: खनियारगी में महर्षि गर्गाचार्य के रथ पर अखरोट की बारिश
Wed, 18 Sep 2024 05:23 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 18 Sep 2024 05:23 AM IST
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खनियारगी में महर्षि गर्गाचार्य के रथ का अखरोटों के साथ स्वागत करते देवलू। -स्रोत : वीडियोग्रैब
सैंज (कुल्लू)। शरद ऋतु के आगमन के साथ ही कुल्लू जिला में शौयरी मेलों की धूम मची हुई है। इसी कड़ी में सैंज के घाट खनियारगी में आयोजित शौयरी मेले में आस्था का सैलाब उमड़ा। दोपहर बाद जब अधिष्ठाता देवता महर्षि गर्गाचार्य अपने हारियानों संग वाद्ययंत्रों की धुन पर मेले में पहुंचे, तो देवध्वनि से वातावरण देवमयी हो गया।
देवता के आगमन पर स्थानीय लोगों और महिलाओं ने उनके रथ पर अखरोटों की बारिश की, और धूप व फूल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर देवता की परंपरागत कार्रवाई के बाद स्थानीय ग्रामीणों और देव समाज से जुड़े लोगों ने घाटी की पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सामूहिक नाटी डाली। इस का मेले में आए मेहमानों का खूब लुत्फ उठाया।
यह मेला फसलों की कटाई के समापन और आने वाली कठोर सर्दियों की तैयारी के लिए मनाया जाता है। देवता गर्ग ऋषि ने घर-घर जाकर लोगों को आशीर्वाद दिया। मेले में अखरोटों की बारिश, जो बुरी आत्माओं से बचने और शांति के लिए की जाती है, इस परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
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देवता के कारदार कुबेर सिंह और भंडारी भोजराज ने बताया कि मेला हर साल सामूहिक समृद्धि और सुख-शांति की कामना के साथ मनाया जाता है। स्थानीय निवासी पूर्ण चंद ने कहा कि इस बार मेले में लोगों का विशेष उत्साह देखने को मिला। मेले के दौरान स्थानीय लोगों ने जूब देकर रिश्तेदारी और भाईचारे का संदेश फैलाया, जो इस आयोजन का एक और महत्वपूर्ण पहलू है।
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देवता के आगमन पर स्थानीय लोगों और महिलाओं ने उनके रथ पर अखरोटों की बारिश की, और धूप व फूल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर देवता की परंपरागत कार्रवाई के बाद स्थानीय ग्रामीणों और देव समाज से जुड़े लोगों ने घाटी की पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सामूहिक नाटी डाली। इस का मेले में आए मेहमानों का खूब लुत्फ उठाया।
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यह मेला फसलों की कटाई के समापन और आने वाली कठोर सर्दियों की तैयारी के लिए मनाया जाता है। देवता गर्ग ऋषि ने घर-घर जाकर लोगों को आशीर्वाद दिया। मेले में अखरोटों की बारिश, जो बुरी आत्माओं से बचने और शांति के लिए की जाती है, इस परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
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देवता के कारदार कुबेर सिंह और भंडारी भोजराज ने बताया कि मेला हर साल सामूहिक समृद्धि और सुख-शांति की कामना के साथ मनाया जाता है। स्थानीय निवासी पूर्ण चंद ने कहा कि इस बार मेले में लोगों का विशेष उत्साह देखने को मिला। मेले के दौरान स्थानीय लोगों ने जूब देकर रिश्तेदारी और भाईचारे का संदेश फैलाया, जो इस आयोजन का एक और महत्वपूर्ण पहलू है।