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पानी की कमी वाले क्षेत्रों में पॉलीहाउस बनेंगे मददगार
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कुल्लू। जिले में किसानों को पॉलीहाउस बनाने के लिए अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए कृषि विभाग ने करीब पौने दो करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। बजट के अनुसार किसान को पॉलीहाउस निर्माण पर 85 फीसदी अनुदान मिलेगा।
मुख्यमंत्री नूतन पॉलीहाउस योजना के माध्यम से फसलों की पैदावार और किसानों की आय को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी सभी विभागीय औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं। हालांकि कई किसानों में पॉलीहाउस को लेकर भ्रांतिया हैं। उन्हें डर है कि बिना केमिकल का उपयोग किए वह कैसे पॉलीहाउस में फसलों को उगा पाएंगे। इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए भी विभागीय कर्मी किसानों को जागरूक कर रहे हैं और उन्हें पॉलीहाउस की मदद से पैदावार बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। गौरतलब है कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की समस्या रहती है। उन क्षेत्रों के किसान परंपरागत खेती को छोड़ पॉलीहाउस को अपना सकते हैं। पॉलीहाउस सिंचाई के लिए पानी की कमी वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए मददगार हैं। इसमें किसी भी मौसम में कोई भी फसल उगाई जा सकती है। खुले में खेती के बजाय पॉलीहाउस में अधिक पैदावार होती है। किसानों की आय को दोगुना करने के लिए पॉलीहाउस पर 85 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। कृषि विकास अधिकारी वर्षा गुप्ता ने कहा कि परंपरागत खेती के साथ किसानों को पॉलीहाउस में फसलों को उगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसमें किसान विभिन्न फसलों को सुरक्षित तरीके से उगा सकते हैं। उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक पंजवीर ठाकुर ने कहा कि प्रगतिशील किसान पॉलीहाउस में खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। कहा कि विभाग जिले में मुख्यमंत्री नूतन पॉलीहाउस योजना के तहत अनुदान पर पौने दो करोड़ का बजट खर्च करेगा।
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मुख्यमंत्री नूतन पॉलीहाउस योजना के माध्यम से फसलों की पैदावार और किसानों की आय को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी सभी विभागीय औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं। हालांकि कई किसानों में पॉलीहाउस को लेकर भ्रांतिया हैं। उन्हें डर है कि बिना केमिकल का उपयोग किए वह कैसे पॉलीहाउस में फसलों को उगा पाएंगे। इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए भी विभागीय कर्मी किसानों को जागरूक कर रहे हैं और उन्हें पॉलीहाउस की मदद से पैदावार बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। गौरतलब है कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की समस्या रहती है। उन क्षेत्रों के किसान परंपरागत खेती को छोड़ पॉलीहाउस को अपना सकते हैं। पॉलीहाउस सिंचाई के लिए पानी की कमी वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए मददगार हैं। इसमें किसी भी मौसम में कोई भी फसल उगाई जा सकती है। खुले में खेती के बजाय पॉलीहाउस में अधिक पैदावार होती है। किसानों की आय को दोगुना करने के लिए पॉलीहाउस पर 85 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। कृषि विकास अधिकारी वर्षा गुप्ता ने कहा कि परंपरागत खेती के साथ किसानों को पॉलीहाउस में फसलों को उगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसमें किसान विभिन्न फसलों को सुरक्षित तरीके से उगा सकते हैं। उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक पंजवीर ठाकुर ने कहा कि प्रगतिशील किसान पॉलीहाउस में खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। कहा कि विभाग जिले में मुख्यमंत्री नूतन पॉलीहाउस योजना के तहत अनुदान पर पौने दो करोड़ का बजट खर्च करेगा।
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