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अग्निकांड स्टोरी.... कैसे बसेगा फिर आशियाना, चिंता में डूब गए प्रभावित

Tue, 14 Dec 2021 12:09 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 12:09 AM IST
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people of sainj kulu those houses brunt in fire- feeling tension  about for new house
सैंज (कुल्लू)। भीषण अग्निकांड में अपनी आंखों के सामने पुश्तैनी घर खोने वालों को अब नया आशियाना बनाने की चिंता सताने लगी है। उनके लिए नए सिरे से घर का निर्माण करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। इसके लिए सरकार की आवास योजना के तहत मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं होगी।
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अग्निकांड प्रभावितों के पास आय का भी कोई साधन नहीं बचा है।
साल 1999 में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की अधिसूचना जारी होने के बाद पार्क के भीतर उनके हक छिन गए। पार्क में के जड़ी-बूटियों के दोहन पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया। यही इनकी आय का मुख्य साधन था। ग्रामीण राजेंद्र कुमार और जगदीश ने बताया कि वे कई दिनों तक ऊंचे जोतों पर जाकर जड़ी-बूटी खोदकर लाते थे। इसे बेचकर आजीविका कमाते थे। इसके बाद सौ मेगावाट की सैंज जल विद्युत परियोजना का काम शुरू होने से कुछ ग्रामीणों को अस्थायी रोजगार मिला। 2012 के बाद यह रोजगार भी छिन गया।
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बता दें कि गाड़ापारली पंचायत के मझाण जैसे दुर्गम क्षेत्र में ग्रामीणों ने मुश्किल से मकान बनाए थे। आशियाना तैयार करने में कई पुश्तें लग गई थीं, लेकिन सारी संपत्ति तीन घंटे में ही राख के ढेर में बदल गई। सभी लोग खेतीबाड़ी पर भी निर्भर हैं, लेकिन सड़क न होने से नगदी फसलों की खेती नहीं कर पाते हैं। --
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पशुओं के लिए भी तैयार करना होगा बसेरा
प्रभावित करताप सिंह, जीत राम और यान सिंह ने कहा कि खुद के लिए छत के अलावा पालतू पशुओं के लिए भी बसेरा तैयार करना काफी मुश्किल है। बेघर होने के बाद ग्रामीणों के सामने नए आशियाने बसाने और संसाधन जोड़ने की चुनौती है। दुर्गम गांव में सरकार की ओर से मिलने वाली राहत पर्याप्त नहीं है।

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गांववासी दे रहे सहारा, पशुओं के लिए भी दे रहे चारा
मझाण में आपसी भाईचारे की मिसाल भी देखने को मिल रही है। गांव में दो वर्ग के परिवार रहते हैं। सभी लोग आपसी भाईचारे से एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। दुख की इस घड़ी में सड़क से गांव तक सामान पहुंचाने से लेकर रहने की व्यवस्था करने तक हर काम इकट्ठा मिलकर करते हैं। पशुओं के लिए घास का इंतजाम करने का जिम्मा गांव के लोगों ने मिलकर किया है।
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