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पहाड़ी दिवस समारोह : कवियों ने मातृ भाषा के संरक्षण का दिया संदेश
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पहाड़ी दिवस में उपस्थित कवियों व लोगों को संबोधित करते उपायुक्त आशुतोष गर्ग।-संवाद
- फोटो : Kullu
कुल्लू। किसी भी समाज और राष्ट्र की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति और वहां बोली जाने वाली मातृ भाषा से होती है। यह बात उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने भाषा भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा कुल्लू स्थित देवसदन में राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस समारोह का शुभारंभ करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि कुल्लू में आयोजित राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस समारोह से प्रदेश में पहाड़ी बोलियों के संरक्षण में सहायता मिलेगी। सभी अपनी दैनिक दिनचर्या में अधिक से अधिक पहाड़ी बोली में बातचीत करें। पहाड़ी बोली में साहित्य का प्रकाशन किया जाना चाहिए ताकि भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित किया जा सके।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने पहाड़ी बोली में कविता और गाने गाए। कांगड़ा के कवि डॉ. रमेश चंद्र मस्ताना ने कांगड़ी में कविता गायन, बिलासपुर के कवि रविंद्र शर्मा ने कहलूरी भाषा में गीत से फौजी के जीवन का बखान किया। कुल्लू की अमरा देवी ने समाज में आ रहे बदलाव को कुल्लवी बोली में गीत से युवाओं को संस्कृति न भूलने का संदेश दिया। सिरमौर के प्रेमलाल आर्य ने मेरा प्यारा हिमाचल का बखूबी प्रस्तुति दी। मंडी की कृष्णा ठाकुर ने लोकतंत्र का महत्व बताया।
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शिमला की उमा ठाकुर ने पहाड़ी भाषा हिमाचल री शान पर कविता पाठ किया। सरला चंब्याल कुल्लू में गाए जाने वाले तुलसी विवाह का गायन किया। उधर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक छात्र विद्यालय कुल्लू के विद्यार्थियों ने प्राचीन लोकनाट्य हौरन का मंचन किया गया। वरिष्ठ कवि और लेखक दयानंद गौतम ने कवि गोष्ठी के मंच का संचालन किया।
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उन्होंने कहा कि कुल्लू में आयोजित राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस समारोह से प्रदेश में पहाड़ी बोलियों के संरक्षण में सहायता मिलेगी। सभी अपनी दैनिक दिनचर्या में अधिक से अधिक पहाड़ी बोली में बातचीत करें। पहाड़ी बोली में साहित्य का प्रकाशन किया जाना चाहिए ताकि भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित किया जा सके।
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इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने पहाड़ी बोली में कविता और गाने गाए। कांगड़ा के कवि डॉ. रमेश चंद्र मस्ताना ने कांगड़ी में कविता गायन, बिलासपुर के कवि रविंद्र शर्मा ने कहलूरी भाषा में गीत से फौजी के जीवन का बखान किया। कुल्लू की अमरा देवी ने समाज में आ रहे बदलाव को कुल्लवी बोली में गीत से युवाओं को संस्कृति न भूलने का संदेश दिया। सिरमौर के प्रेमलाल आर्य ने मेरा प्यारा हिमाचल का बखूबी प्रस्तुति दी। मंडी की कृष्णा ठाकुर ने लोकतंत्र का महत्व बताया।
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शिमला की उमा ठाकुर ने पहाड़ी भाषा हिमाचल री शान पर कविता पाठ किया। सरला चंब्याल कुल्लू में गाए जाने वाले तुलसी विवाह का गायन किया। उधर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक छात्र विद्यालय कुल्लू के विद्यार्थियों ने प्राचीन लोकनाट्य हौरन का मंचन किया गया। वरिष्ठ कवि और लेखक दयानंद गौतम ने कवि गोष्ठी के मंच का संचालन किया।