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Kullu News: नए व्यापारिक समझौते से बैकफुट पर बागवान

Thu, 05 Feb 2026 10:35 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Thu, 05 Feb 2026 10:35 PM IST
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New trade deal puts orchardists on the back foot
बोले- सस्ता विदेशी सेब मंडियों में उतरने से प्रदेश के बागवानों को होगा नुकसान
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कहा- न्यूजीलैंड सहित सभी विदेशी सेब आयात शुल्क 50 से 20 फीसदी घटा

संवाद न्यूज एजेंसी

पतलीकूहल (कुल्लू)। विदेशी सेब के आयात शुल्क में की गई ताजा कटौती ने कुल्लू-मनाली के सेब बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक विदेशी सेब पर भारत में करीब 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाता था लेकिन नए व्यापारिक समझौतों के तहत इसे घटाकर लगभग 20 प्रतिशत कर दिया है।
यानी अब विदेशी कंपनियों को भारत में सेब बेचने के लिए पहले की तुलना में काफी कम शुल्क देना होगा। बागवानों का कहना है कि यही सबसे बड़ा खतरा है। इससे विदेशी सेब सस्ता होकर भारतीय मंडियों में उतरेगा।
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मौजूदा स्थिति यह है कि भारत में हर साल करीब पांच लाख टन सेब का आयात हो रहा है। इसमें ईरान से लगभग 26 प्रतिशत, तुर्की से 23 प्रतिशत, अफगानिस्तान से करीब 8 प्रतिशत और यूरोपीय संघ के देशों से लगभग 11 प्रतिशत सेब आता है। अमेरिका, न्यूजीलैंड, इटली, पोलैंड, चिली और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से भी सेब भारतीय बाजारों में पहुंच रहा है। अब जब आयात शुल्क 50 से घटकर 20 प्रतिशत के आसपास आ गया है। बागवानों को डर है कि यह मात्रा आने वाले समय में और बढ़ सकती है।
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हिमाचली सेब की मांग और दाम पर पड़ेगा असरकुल्लू के बागवान मोहन ठाकुर, राकेश, पवन, डिंपल, सुरेश, पंकज, रोहण, रामलाल और जीतराम ने कहा कि पहले भारी शुल्क के कारण विदेशी सेब महंगा पड़ता था। स्थानीय सेब को कुछ हद तक संरक्षण मिल जाता था लेकिन अब शुल्क घटने से विदेशी सेब कम कीमत में बिकेगा। इससे हिमाचली सेब की मांग और दाम दोनों पर असर पड़ेगा। दूसरी ओर खाद, दवा, मजदूरी, पैकिंग और परिवहन की लागत लगातार बढ़ रही है।
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सेब उत्पादकों में असमंजस का माहौल
दो दिन पहले अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते को लेकर भी सेब उत्पादकों में असमंजस और डर का माहौल है। किसान संगठनों को आशंका है कि भविष्य में अमेरिकी सेब को भी कम शुल्क या विशेष रियायत के साथ भारतीय बाजार में प्रवेश मिल सकता है। अमेरिका दुनिया के बड़े सेब उत्पादक देशों में शामिल है। वहां के किसानों को सरकारी सब्सिडी और आधुनिक तकनीक का लाभ मिलता है जिससे उनकी लागत कम रहती है।

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कुल्लू फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि स्थानीय बागवानों के हित विदेशी सेब के आयात पर शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने के बजाय 100 फीसदी करना चाहिए।
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