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तीन मार्च को 03:20 बजे शुरू होगा चंद्र ग्रहण : शास्त्री
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कुल्लू। तीन मार्च को चंद्र ग्रहण है। यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा। भारत में यह ग्रहण सूर्यास्त के आसपास दिखाई देगा। ग्रहण तीन मार्च को दोपहर बाद 03:20 बजे शुरू होगा और शाम 06:47 बजे समापन होगा।
सूतक काल शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। इस आधार पर सूतक काल तीन मार्च की सुबह लगभग 06:20 बजे से मान्य होगा और सायं 06:47 तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और किसी भी तरह के शुभ कार्य जैसे पूजा-पाठ, हवन, विवाह या नामकरण आदि वर्जित माने जाते हैं। मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना-पीना, तेलमर्दन, झूठ कपट आदि से यथासंभव परहेज करना चाहिए।
गोपाल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस दौरान गर्भवती का सोना, नुकीली वस्तुओं का प्रयोग, सुई छेदन आदि वर्जित है। बाल, वृद्ध, रोगी आदि को यथानुकूल भोजन दवाई आदि लेने में कोई दोष नहीं। ग्रहण सूतक से पहले ही दूध, दही, अचार, चटनी व मुरब्बा आदि में कुश तृण रख देना श्रेयस्कर होता है। सूखे खाद्य पदार्थों में कुशा डालने की आवश्यकता नहीं। संवाद
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सूतक काल शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। इस आधार पर सूतक काल तीन मार्च की सुबह लगभग 06:20 बजे से मान्य होगा और सायं 06:47 तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और किसी भी तरह के शुभ कार्य जैसे पूजा-पाठ, हवन, विवाह या नामकरण आदि वर्जित माने जाते हैं। मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना-पीना, तेलमर्दन, झूठ कपट आदि से यथासंभव परहेज करना चाहिए।
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गोपाल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस दौरान गर्भवती का सोना, नुकीली वस्तुओं का प्रयोग, सुई छेदन आदि वर्जित है। बाल, वृद्ध, रोगी आदि को यथानुकूल भोजन दवाई आदि लेने में कोई दोष नहीं। ग्रहण सूतक से पहले ही दूध, दही, अचार, चटनी व मुरब्बा आदि में कुश तृण रख देना श्रेयस्कर होता है। सूखे खाद्य पदार्थों में कुशा डालने की आवश्यकता नहीं। संवाद
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