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Kullu News: लाहौल घाटी भी अलर्ट... होटल-ढाबे और होम स्टे में छापे मारेंगी पंचायतें
Mon, 10 Feb 2025 10:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 10 Feb 2025 10:04 PM IST
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चिट्टा के जाल से निपटने के लिए लाहौल की गोशाल और दारचा पंचायतों ने बढ़ाए कदम
नशे में संलिप्त पाए जाने पर की जाएगी कार्रवाई, किया जा सकता है सामाजिक बहिष्कार
प्रदेश में अलग-अलग जगह चिट्टा से युवकों की मौत के बाद जनजातीय जिले में दहशत
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। चिट्टा की गिरफ्त से फिलहाल दूर जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की गोशाल और दारचा पंचायत ने नशे के खिलाफ जंग लड़ने की तैयारी कर ली है।
गोशाल पंचायत प्रधान अजीत सिंह और दारचा पंचायत के प्रधान अशोक कुमार ने कहा कि अटल टनल खुलने के बाद घाटी में पर्यटकों के साथ बाहरी राज्यों के कारोबारियों की आवाजाही बढ़ गई है। इससे घाटी में चिट्टा का चलन शुरू होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। ऐसे में पंचायतें महिला मंडलों की मदद से अपने क्षेत्र के होटल, कैंप, ढाबे, होम स्टे में छापे मारेंगी। कोई नशे में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनका सामाजिक बहिष्कार भी किया जा सकता है।
एक जमाने में पहाड़ी राज्य हिमाचल को बदनाम करने वाले चरस और अफीम जैसे नशे की जगह अब चिट्टा ने ले ली है। यह सत्ता में बैठे हुक्मरानों के साथ समाज के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।
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जिस तरह शांत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चिट्टा की गिरफ्त में आकर युवा जान गंवा रहे हैं, उसे देखते हुए घाटी के लोगों में जागरूकता देखने को मिल रही है। पिछले पंद्रह दिन में हिमाचल में तीन युवाओं की चिट्टा के सेवन से मौत हुई है। नशे के बढ़ते प्रचलन से जनजातीय लोग भी खौफजदा हैं।
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सात सालों में चिट्टा के मामले
प्रदेश जैसे शांत राज्य में सात साल में चिट्टा तस्करी के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2016 से वर्ष 2023 तक चिट्टा तस्करी के मामलों और बरामदगी में 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि यह तस्करी अधिकतर पंजाब राज्य से हुई है।
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दो स्थान हैं महत्वपूर्ण
पर्यटन के लिहाज से जिस्पा और तांदी पुल घाटी के दो प्रमुख हॉट स्पॉट हैं। सीजन में यहां हजारों पर्यटक और कारोबारी पहुंचते हैं। ऐसे में नशे के सेवन और तस्करी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाने का निर्णय लिया है।
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पुलिस भी दारचा पंचायत के जिस्पा पर मुख्य रूप से फोकस कर रही है। नशे के खिलाफ जंग लड़ने वाली पंचायतों को पुलिस की तरफ से हर संभव मदद दी जाएगी। पुलिस में अभी तक किसी भी स्थानीय शख्स के खिलाफ चिट्टा तस्करी और सेवन करने का कोई मामला दर्ज नहीं है।
- मयंक चौधरी, पुलिस अधीक्षक
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नशे में संलिप्त पाए जाने पर की जाएगी कार्रवाई, किया जा सकता है सामाजिक बहिष्कार
प्रदेश में अलग-अलग जगह चिट्टा से युवकों की मौत के बाद जनजातीय जिले में दहशत
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। चिट्टा की गिरफ्त से फिलहाल दूर जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की गोशाल और दारचा पंचायत ने नशे के खिलाफ जंग लड़ने की तैयारी कर ली है।
गोशाल पंचायत प्रधान अजीत सिंह और दारचा पंचायत के प्रधान अशोक कुमार ने कहा कि अटल टनल खुलने के बाद घाटी में पर्यटकों के साथ बाहरी राज्यों के कारोबारियों की आवाजाही बढ़ गई है। इससे घाटी में चिट्टा का चलन शुरू होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। ऐसे में पंचायतें महिला मंडलों की मदद से अपने क्षेत्र के होटल, कैंप, ढाबे, होम स्टे में छापे मारेंगी। कोई नशे में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उनका सामाजिक बहिष्कार भी किया जा सकता है।
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एक जमाने में पहाड़ी राज्य हिमाचल को बदनाम करने वाले चरस और अफीम जैसे नशे की जगह अब चिट्टा ने ले ली है। यह सत्ता में बैठे हुक्मरानों के साथ समाज के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।
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जिस तरह शांत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चिट्टा की गिरफ्त में आकर युवा जान गंवा रहे हैं, उसे देखते हुए घाटी के लोगों में जागरूकता देखने को मिल रही है। पिछले पंद्रह दिन में हिमाचल में तीन युवाओं की चिट्टा के सेवन से मौत हुई है। नशे के बढ़ते प्रचलन से जनजातीय लोग भी खौफजदा हैं।
सात सालों में चिट्टा के मामले
प्रदेश जैसे शांत राज्य में सात साल में चिट्टा तस्करी के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2016 से वर्ष 2023 तक चिट्टा तस्करी के मामलों और बरामदगी में 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि यह तस्करी अधिकतर पंजाब राज्य से हुई है।
दो स्थान हैं महत्वपूर्ण
पर्यटन के लिहाज से जिस्पा और तांदी पुल घाटी के दो प्रमुख हॉट स्पॉट हैं। सीजन में यहां हजारों पर्यटक और कारोबारी पहुंचते हैं। ऐसे में नशे के सेवन और तस्करी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाने का निर्णय लिया है।
पुलिस भी दारचा पंचायत के जिस्पा पर मुख्य रूप से फोकस कर रही है। नशे के खिलाफ जंग लड़ने वाली पंचायतों को पुलिस की तरफ से हर संभव मदद दी जाएगी। पुलिस में अभी तक किसी भी स्थानीय शख्स के खिलाफ चिट्टा तस्करी और सेवन करने का कोई मामला दर्ज नहीं है।
- मयंक चौधरी, पुलिस अधीक्षक