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अमेरिकन प्रून प्लम से महकेंगे कुल्लू के बगीचे
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अमी चंद भंडारी
कुल्लू/खराहल। सेब उत्पादन के लिए मशहूर कुल्लू जिले में विदेशी प्रजाति के फलों के लिए जलवायु अनुकूल साबित हो रही है। यहां विदेशी सेब उत्पादन के साथ अब विदेशी प्लम की पैदावार भी बागवान करने लगे हैं।
अमेरिकन प्रून प्लम के लिए भी यहां का वातावरण उपयुक्त है। बागवानों का रुझान अमेरिकन प्रून की खेती तरह काफी बढ़ने लगा है। हालांकि, अभी जिले में चुनिंदा बागवान ही प्रून प्लम उगा रहे हैं। बता दें कि अनुसंधान केंद्र बजौरा में यह किस्म विकसित की गई है। इसके फल का आकार मध्यम और अंडाकार होता है। फल का रंग नीला और हल्की चमक वाला होता है। फल की सेल्फ लाइफ काफी मजबूत है। ऐसे में बाजार में अधिक दिनों तक टिकाऊ होने के कारण दाम भी अच्छे मिलते हैं। प्रून अगस्त में तैयार हो जाता है। बाजार में 150 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दाम मिल रहे हैं। इसकी खासियत यह है कि अन्य प्लम से इसकी शेल्फ लाइफ अधिक है और इसे सूखा कर भी बेचा जाता है। सूबे में शिमला में भी प्रून का उत्पादन किया जा रहा है। अब बागवान इसकी खेती को तवज्जो दे रहे हैं। संवाद
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय भारद्वाज कहते हैं कि अनुसंधान केंद्र में इस किस्म के पौधे तैयार हुए हैं। इसकी शेल्फ लाइफ भी अधिक है। इसका बेहतर उत्पादन छह हजार की ऊंचाई पर होगा।
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यह भी है इसकी खासियत
प्रून औषधीय गुण का खजाना है। इसके सेवन से दस्त और कब्ज दोनों को आराम मिलता है। इनमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है। इसमें विटामिन-ए और सी भी विद्यमान हैं। ये इम्युनिटी को बढ़ाने में कारगर हैं। आयरन, पोटाशियम, नियामिन, कैल्शियम फॉस्फोरस और कार्बोहाइड्रेट आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं। गर्भवती महिलाएं इसका सेवन करती हैं तो बच्चों की हड्डियां मजबूत होती हैं और पांचन तंत्र भी मजबूत होता है।
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कुल्लू/खराहल। सेब उत्पादन के लिए मशहूर कुल्लू जिले में विदेशी प्रजाति के फलों के लिए जलवायु अनुकूल साबित हो रही है। यहां विदेशी सेब उत्पादन के साथ अब विदेशी प्लम की पैदावार भी बागवान करने लगे हैं।
अमेरिकन प्रून प्लम के लिए भी यहां का वातावरण उपयुक्त है। बागवानों का रुझान अमेरिकन प्रून की खेती तरह काफी बढ़ने लगा है। हालांकि, अभी जिले में चुनिंदा बागवान ही प्रून प्लम उगा रहे हैं। बता दें कि अनुसंधान केंद्र बजौरा में यह किस्म विकसित की गई है। इसके फल का आकार मध्यम और अंडाकार होता है। फल का रंग नीला और हल्की चमक वाला होता है। फल की सेल्फ लाइफ काफी मजबूत है। ऐसे में बाजार में अधिक दिनों तक टिकाऊ होने के कारण दाम भी अच्छे मिलते हैं। प्रून अगस्त में तैयार हो जाता है। बाजार में 150 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दाम मिल रहे हैं। इसकी खासियत यह है कि अन्य प्लम से इसकी शेल्फ लाइफ अधिक है और इसे सूखा कर भी बेचा जाता है। सूबे में शिमला में भी प्रून का उत्पादन किया जा रहा है। अब बागवान इसकी खेती को तवज्जो दे रहे हैं। संवाद
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क्या कहते हैं वैज्ञानिक
यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय भारद्वाज कहते हैं कि अनुसंधान केंद्र में इस किस्म के पौधे तैयार हुए हैं। इसकी शेल्फ लाइफ भी अधिक है। इसका बेहतर उत्पादन छह हजार की ऊंचाई पर होगा।
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यह भी है इसकी खासियत
प्रून औषधीय गुण का खजाना है। इसके सेवन से दस्त और कब्ज दोनों को आराम मिलता है। इनमें एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है। इसमें विटामिन-ए और सी भी विद्यमान हैं। ये इम्युनिटी को बढ़ाने में कारगर हैं। आयरन, पोटाशियम, नियामिन, कैल्शियम फॉस्फोरस और कार्बोहाइड्रेट आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं। गर्भवती महिलाएं इसका सेवन करती हैं तो बच्चों की हड्डियां मजबूत होती हैं और पांचन तंत्र भी मजबूत होता है।