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कुल्लू घाटी में 239 प्रतिशत तक बढ़ा वायु प्रदूषण

Fri, 11 Nov 2016 10:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू Updated Fri, 11 Nov 2016 10:08 PM IST
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दिवाली पर अंधाधुंध पटाखे व आतिशबाजी चलाने से दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर समस्या है। वहीं हवा में निरंतर जहर घुलने का खतरनाक सिलसिला अब दिल्ली के साथ-साथ कुल्लू घाटी में भी जारी है। दशहरा-दिवाली में कुल्लू घाटी का वायु प्रदूषण 239.45 प्रतिशत तक बढ़ गया। मौहल स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान एवं शोध संस्थान की ओर से दशहरा एवं दिवाली से पहले और उसके बाद एकत्रित किए गए आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं।

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वायु प्रदूषण के दो महत्वपूर्ण मानकों एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ एओडी और पारटीकुलेट मैटर पीएम यानि वायुमंडलीय कणों की मात्रा के ये आंकड़े कुल्लू घाटी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए घातक हैं। दिवाली के बाद कुल्लू घाटी में एओडी के स्तर में 35 प्रतिशत और पीएम के स्तर में 337 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। 23 सितंबर को घाटी की आबोहवा में एओडी लगभग 0.34 था, लेकिन दशहरा से लेकर दिवाली 31 अक्तूबर को यह 0.46 तक पहुंच गया।
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इसी प्रकार 23 सितंबर को पीएम का स्तर 31.7 था जोकि दशहरा से दिवाली की रात 30 अक्तूबर को 138.7 तक पहुंच गया। इसके अलावा वायु मंडल में सभी तत्वों के मिश्रण (टीएसपी) की मात्रा भी 239.56 प्रतिशत तक बढ़ी है। 23 सितंबर तक कुल्लू घाटी की टीएसपी का स्तर 45.6 था। जो 31 अक्तूबर में 154.8 तक पहुंचा।
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किसी भी स्थल या शहर में प्रदूषण के स्तर को मापने के मुख्यत: दो मानक होते हैं। पीएम तथा एओडी या एओटी। हवा में मौजूद प्रदूषित पदार्थों को पारटीकुलेट मैटर यानि पीएम कहा जाता है। यह प्रदूषण को मापने का उचित पैमाना है। इसके अलावा एओडी (एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ) या एओटी (एयरोसोल ऑप्टिकल थिकनेस) के आधार पर भी हवा की शुद्धता का पता लगाया जा सकता है।


मौहल स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान एवं शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. जेसी कुनियाल द्वारा किए गए शोध में चौंकाने वाले प्रदूषण की मात्रा को रोकने या इसके स्तर को कम करने के लिए ग्रीन बेल्ट का होना जरूरी है। इसके लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण, जंगलों का संरक्षण, जंगलों में आगजनी को रोकना, वन कटान पर अंकुश के साथ वाहनों पर कंट्रोल आदि उपाय हो सकते हैं। उनके मुताबिक कुल्लू घाटी में बढ़ता प्रदूषण मुनष्य के जीवन के लिए खतरनाक है और इसे कैंसर जैसी बीमारी के साथ खांसी, गले की बीमारी हो सकती है।

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