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इस गांव में देवता हैं न्यायाधीश, शोर और शराबा झगड़ा नहीं पसंद
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सैंज (कुल्लू)। आजादी के 74 साल बाद कुल्लू के एक गांव में लोगों का न्याय को लेकर देवता पर अटूट विश्वास है। सैंज घाटी की दुर्गम गाड़ापारली पंचायत के बनाउगी गांव में अधिष्ठाता देवता कशु नारायण का कानून चलता है। गांव में शराब पीने और मीट खाने वालों का प्रवेश निषेध है। गांव में कोई शराब नहीं पी सकता। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों को देवता सजा देते हैं। बनाउगी गांव में शराब के सेवन पर प्रतिबंध की यह व्यवस्था सदियों से चली आ रही है। गांव में देवता कशु नारायण को शोर, झगड़ा, शराब और मीट से सख्त नफरत है। करीब दो सौ आबादी वाले इस गांव में कुर्सी पर बैठने और चारपाई पर सोने की मनाही है। ग्रामीण देवता के आदेश को सर्वोपरी मानते हुए विलासता की वस्तुओं से दूर रहते हैं।
देवता के दरबार में फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताता है। देव समाज में बनाउगी के इष्ट देव कशु नारायण को इंसाफ के देवता की उपाधि दी गई है। देवता कशु नारायण के गुर संजू ठाकुर ने कहा कि बनाउगी के कशु नारायण के दरबार में सच और झूठ से पर्दा उठता है। न्याय के लिए देवता के दरबार में सभा सजती है। जिसमें दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहते हैं। कुल्लू घाटी समेत प्रदेश के विभिन्न भागों से कोर्ट कचहरी के चक्कर से परेशान लोग देवता कशु नारायण के दरबार पहुंचते हैं। इसे स्थानीय भाषा में कश्मी कहा जाता है। देवता के कारदार सोहन लाल ठाकुर का कहना है कि कुल्लू जिले के अलावा दूसरे राज्यों से देवता कशु नारायण के दरबार में लोग अपने मामलों को लेकर पहुंचते हैं। देवता के पुजारी लाल चंद ने कहा कि देवता के दरबार में कई तरह के फैसले दिए जाते हैं। जिन्हें सब स्वेच्छा से स्वीकार करते हैं।
कशु नारायाण चर्म और कुष्ठ रोग उपचार के विशेषज्ञ माने जाते हैं। देवता के पानी के छिड़काव से यह बीमारियां ठीक होती हैं। पुजारी लाल चंद का कहना है कि देवता के दरबार में सैकड़ों लोग स्वस्थ हो चुके हैं।
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देवता के दरबार में फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताता है। देव समाज में बनाउगी के इष्ट देव कशु नारायण को इंसाफ के देवता की उपाधि दी गई है। देवता कशु नारायण के गुर संजू ठाकुर ने कहा कि बनाउगी के कशु नारायण के दरबार में सच और झूठ से पर्दा उठता है। न्याय के लिए देवता के दरबार में सभा सजती है। जिसमें दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहते हैं। कुल्लू घाटी समेत प्रदेश के विभिन्न भागों से कोर्ट कचहरी के चक्कर से परेशान लोग देवता कशु नारायण के दरबार पहुंचते हैं। इसे स्थानीय भाषा में कश्मी कहा जाता है। देवता के कारदार सोहन लाल ठाकुर का कहना है कि कुल्लू जिले के अलावा दूसरे राज्यों से देवता कशु नारायण के दरबार में लोग अपने मामलों को लेकर पहुंचते हैं। देवता के पुजारी लाल चंद ने कहा कि देवता के दरबार में कई तरह के फैसले दिए जाते हैं। जिन्हें सब स्वेच्छा से स्वीकार करते हैं।
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कशु नारायाण चर्म और कुष्ठ रोग उपचार के विशेषज्ञ माने जाते हैं। देवता के पानी के छिड़काव से यह बीमारियां ठीक होती हैं। पुजारी लाल चंद का कहना है कि देवता के दरबार में सैकड़ों लोग स्वस्थ हो चुके हैं।
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