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Kullu News: सैंज घाटी में झूले लगाए, पुल नहीं बनाए
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पिछले साल आपदा में बह गए थे पुल, अस्थायी व्यवस्था से चल रहा काम
ग्रामीणों की मांग अनसुनी, नहीं बनाए जा रहे पक्के पुल
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। जिले की सैंज घाटी के ग्रामीणों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रामीणों की सुविधा के लिए लारजी से लेकर दुर्गम क्षेत्र शाक्टी तक चेनंगा, न्यूली, चतेहड़ा, सतेश, रोपा, बिहाली, त्रेहड़ा में बने लकड़ी के पुल दस महीने पहले प्राकृतिक आपदा में बह चुके हैंं लेकिन लेकिन दोबारा पुलों का निर्माण नहीं हो पाया है। प्रशासन ने फौरी तौर पर सात स्थानों पर झूला पुल जरूर लगाए, लेकिन स्थायी पुल लगाने की दिशा में प्रयास नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सैंज घाटी की 17 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण झूलाें के सहारे हैं। पुल न होने की वजह से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की प्रशासन से बार-बार मांग करने के बावजूद समस्या हल करने के प्रयास नहीं हो पाए हैं।
ग्रामीण निमत राम, सोमदेव, भगत राम, आलम चंद, मोहित, आकाश, शंभू प्रकाश ने कहा कि झूलों से नदी, खड्डों और नालों को पार करना जोखिम भरा रहता है। आगामी बरसात से पहले झूलों की जगह पक्के पुल नहीं लगाए गए, तो ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से समस्या हल करने की मांग की है। इस संबंध में उपायुक्त कुल्लू तोरुल एस रवीश ने कहा कि लोक निर्माण विभाग के मेकेनिकल विंग को झूला पुलों का रखरखाव करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा कि आचार संहिता के हटते ही पैदल पुलों के निर्माण संबंधी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। संवाद
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ग्रामीणों की मांग अनसुनी, नहीं बनाए जा रहे पक्के पुल
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। जिले की सैंज घाटी के ग्रामीणों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ग्रामीणों की सुविधा के लिए लारजी से लेकर दुर्गम क्षेत्र शाक्टी तक चेनंगा, न्यूली, चतेहड़ा, सतेश, रोपा, बिहाली, त्रेहड़ा में बने लकड़ी के पुल दस महीने पहले प्राकृतिक आपदा में बह चुके हैंं लेकिन लेकिन दोबारा पुलों का निर्माण नहीं हो पाया है। प्रशासन ने फौरी तौर पर सात स्थानों पर झूला पुल जरूर लगाए, लेकिन स्थायी पुल लगाने की दिशा में प्रयास नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सैंज घाटी की 17 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण झूलाें के सहारे हैं। पुल न होने की वजह से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की प्रशासन से बार-बार मांग करने के बावजूद समस्या हल करने के प्रयास नहीं हो पाए हैं।
ग्रामीण निमत राम, सोमदेव, भगत राम, आलम चंद, मोहित, आकाश, शंभू प्रकाश ने कहा कि झूलों से नदी, खड्डों और नालों को पार करना जोखिम भरा रहता है। आगामी बरसात से पहले झूलों की जगह पक्के पुल नहीं लगाए गए, तो ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से समस्या हल करने की मांग की है। इस संबंध में उपायुक्त कुल्लू तोरुल एस रवीश ने कहा कि लोक निर्माण विभाग के मेकेनिकल विंग को झूला पुलों का रखरखाव करने के निर्देश दिए गए हैं। कहा कि आचार संहिता के हटते ही पैदल पुलों के निर्माण संबंधी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। संवाद
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