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Kullu News: बचाने न सही... दुख बांटने ही आ जाते
Mon, 15 Sep 2025 10:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Mon, 15 Sep 2025 10:51 PM IST
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आपदा पीड़ितों के अंगना नहीं पहुंची कंगना, हिमाचल सरकार के मंत्री भी रहे गायब
कुल्लू-मनाली में आपदा से मिले जख्मों पर मरहम लगाने नहीं आए बड़े नेता
सांसद और मंत्रिद्धयों के न आने से राजनितिक गलियारों में छिड़ी नई बहस
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। भीषण आपदा के बाद जब कुल्लू-मनाली के लोग अपने घर-जमीन और रोज़गार गंवा कर राहत की आस में बैठे थे, तब न तो कोई मंत्री उनके आंगन तक पहुंचा और न ही लोकसभा सांसद कंगना रनौत।
मनाली में घर रखने वाली सांसद का न आना और प्रदेश सरकार के मंत्रियों की गैरमौजूदगी ने जनता को बेचैन कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि जरूरत की इस घड़ी में ही नेता नहीं आए तो फिर कब आएंगे। लोग तो इतना तक कह रहे हैंं कि हमें बचाने न सही, दुख-दर्द ही बांटने आ जाते।
आपदा में कुल्लू-मनाली सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। मनाली की रहने वाली सांसद कंगना रनौत पीड़ितों का दर्द जानने नहीं पहुंचीं। सरकार के मंत्री भी नदारद हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मनाली दौरे पर आए लेकिन उनका कार्यक्रम बेहद छोटा रहा। वह सभी बाढ़ग्रस्त स्थलों तक नहीं पहुंचे।
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26 अगस्त को आई आपदा के बाद से मनाली में सबकुछ ठप है। बागवानों का 50 फीसदी से अधिक सेब बगीचों में खराब हो गया। पर्यटन कारोबार की गति थम गई है। कई लोगों के घर बह गए तो कइयों के रेस्टोरेंट। कई लोग बेघर हो गए।
बाढ़ से जलशक्ति, लोक निर्माण विभाग को भारी क्षति हुई। मनाली के किसान-बागवान और पर्यटन कारोबारी भीषण आपदा से जूझ रहे हैं। कहीं सड़कें बह गई हैं तो कहीं लोगों की जमीन पूरी तरह से नष्ट हो गई है। कई लोग बेघर हो चुके हैं। अनेक मकान टूटने की कगार पर हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में भी सांसद का नदारद रहना चिंताजनक है।
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मंत्रियों का नदारद होना चिंता का विषय
नगर परिषद के अध्यक्ष मनोज लारजे ने जारी बयान में मंत्रियों के नदारद रहने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 1500 करोड़ की फौरी राहत दी है। केंद्र से छह मंत्री जायजा लेने पहुंचे लेकिन हिमाचल से एक भी मंत्री मनाली नहीं पहुंचा। यह देखकर निराशा हुई कि मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद ने भी इस गंभीर मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ नहीं लिया। मनाली के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर लगातार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के बीच मौजूद रहे।
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कुल्लू-मनाली में आपदा से मिले जख्मों पर मरहम लगाने नहीं आए बड़े नेता
सांसद और मंत्रिद्धयों के न आने से राजनितिक गलियारों में छिड़ी नई बहस
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। भीषण आपदा के बाद जब कुल्लू-मनाली के लोग अपने घर-जमीन और रोज़गार गंवा कर राहत की आस में बैठे थे, तब न तो कोई मंत्री उनके आंगन तक पहुंचा और न ही लोकसभा सांसद कंगना रनौत।
मनाली में घर रखने वाली सांसद का न आना और प्रदेश सरकार के मंत्रियों की गैरमौजूदगी ने जनता को बेचैन कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि जरूरत की इस घड़ी में ही नेता नहीं आए तो फिर कब आएंगे। लोग तो इतना तक कह रहे हैंं कि हमें बचाने न सही, दुख-दर्द ही बांटने आ जाते।
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आपदा में कुल्लू-मनाली सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। मनाली की रहने वाली सांसद कंगना रनौत पीड़ितों का दर्द जानने नहीं पहुंचीं। सरकार के मंत्री भी नदारद हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मनाली दौरे पर आए लेकिन उनका कार्यक्रम बेहद छोटा रहा। वह सभी बाढ़ग्रस्त स्थलों तक नहीं पहुंचे।
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26 अगस्त को आई आपदा के बाद से मनाली में सबकुछ ठप है। बागवानों का 50 फीसदी से अधिक सेब बगीचों में खराब हो गया। पर्यटन कारोबार की गति थम गई है। कई लोगों के घर बह गए तो कइयों के रेस्टोरेंट। कई लोग बेघर हो गए।
बाढ़ से जलशक्ति, लोक निर्माण विभाग को भारी क्षति हुई। मनाली के किसान-बागवान और पर्यटन कारोबारी भीषण आपदा से जूझ रहे हैं। कहीं सड़कें बह गई हैं तो कहीं लोगों की जमीन पूरी तरह से नष्ट हो गई है। कई लोग बेघर हो चुके हैं। अनेक मकान टूटने की कगार पर हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में भी सांसद का नदारद रहना चिंताजनक है।
मंत्रियों का नदारद होना चिंता का विषय
नगर परिषद के अध्यक्ष मनोज लारजे ने जारी बयान में मंत्रियों के नदारद रहने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 1500 करोड़ की फौरी राहत दी है। केंद्र से छह मंत्री जायजा लेने पहुंचे लेकिन हिमाचल से एक भी मंत्री मनाली नहीं पहुंचा। यह देखकर निराशा हुई कि मंडी संसदीय क्षेत्र की सांसद ने भी इस गंभीर मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ नहीं लिया। मनाली के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर लगातार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के बीच मौजूद रहे।