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Kullu News: नाक से रक्त बहना न रुके, तो करवाएं स्वास्थ्य जांच
Sun, 20 Apr 2025 06:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 20 Apr 2025 06:13 AM IST
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कुल्लू के कोटा-आगे विद्यालय में हीमोफीलिया की जानकारी देते स्वास्थ्य कर्मी-संवाद
रक्त स्राव का बंद न होना हो सकता है हीमोफीलिया
कोटा-आगे में विद्यार्थियों-शिक्षकों को बताए इस बीमारी के लक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। नाक से रक्त बहना न रूके और हल्की चोट लगने पर भी रक्त स्त्राव बंद न हो, तो ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर जांच करवाए। इन लक्षणों को
हल्के में न लें। यह हीमोफीलिया के लक्षण हो सकते हैं। यह बात स्वास्थ्य खंड नग्गर की स्वास्थ्य शिक्षिका ममता चौहान ने कही। राजकीय उच्च विद्यालय कोटा-आगे (काईस) में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यक्रम करवाया गया। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षकों को हीमोफीलिया बीमारी के लक्षणों की पहचान करना, इससे बचाव और उपचार की जानकारी विस्तार से दी गई।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य शिक्षिका ममता चौहान ने बताया कि हीमाेफीलिया बीमारी में आंत या दिमाग के हिस्से में होने वाले रक्त स्राव से जान भी जा सकती है। जोड़ों में सूजन के साथ जब इस बीमारी में अकसर दर्द रहता है, तो यह आंतरिक रक्त स्त्राव के कारण होता है, जो आगे चल कर दिव्यांगता में परिवर्तित हो सकता है। उन्होंने बताया कि हीमोफीलिया दो प्रकार की होती है, जिन मरीजों में रक्त का थक्का जमाने वाले फैक्टर आठ की कमी होती है, उन्हें हीमोफीलिया-ए होता है और जिनमें फैक्टर नौ की कमी होती है, उन्हें हीमोफीलिया-बी होता है। ऐसे में बिना समय गवाए लक्षण दिखने पर इसकी जांच करवाएं। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ज्योति राठी, महिला स्वास्थ्य कर्मी राखी महाजन उपस्थित रहीं।
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बॉक्स
यह है हीमोफीलिया के लक्षण
हीमोफीलिया बीमारी दिव्यांगता का कारण बन सकती है। इसके लक्षणों में दांत निकालते समय, रूट कैनाल थेरेपी में अत्यधिक खून बहना, जोड़ो में सूजन और
असहनीय पीड़ा होना, बच्चों के दांत टूटने और नये दांत निकलने में मसूड़े से लगातार रक्त स्राव और पेशाब के रास्ते खून बहना शामिल हैं।
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कोटा-आगे में विद्यार्थियों-शिक्षकों को बताए इस बीमारी के लक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। नाक से रक्त बहना न रूके और हल्की चोट लगने पर भी रक्त स्त्राव बंद न हो, तो ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर जांच करवाए। इन लक्षणों को
हल्के में न लें। यह हीमोफीलिया के लक्षण हो सकते हैं। यह बात स्वास्थ्य खंड नग्गर की स्वास्थ्य शिक्षिका ममता चौहान ने कही। राजकीय उच्च विद्यालय कोटा-आगे (काईस) में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यक्रम करवाया गया। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षकों को हीमोफीलिया बीमारी के लक्षणों की पहचान करना, इससे बचाव और उपचार की जानकारी विस्तार से दी गई।
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कार्यक्रम में स्वास्थ्य शिक्षिका ममता चौहान ने बताया कि हीमाेफीलिया बीमारी में आंत या दिमाग के हिस्से में होने वाले रक्त स्राव से जान भी जा सकती है। जोड़ों में सूजन के साथ जब इस बीमारी में अकसर दर्द रहता है, तो यह आंतरिक रक्त स्त्राव के कारण होता है, जो आगे चल कर दिव्यांगता में परिवर्तित हो सकता है। उन्होंने बताया कि हीमोफीलिया दो प्रकार की होती है, जिन मरीजों में रक्त का थक्का जमाने वाले फैक्टर आठ की कमी होती है, उन्हें हीमोफीलिया-ए होता है और जिनमें फैक्टर नौ की कमी होती है, उन्हें हीमोफीलिया-बी होता है। ऐसे में बिना समय गवाए लक्षण दिखने पर इसकी जांच करवाएं। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ज्योति राठी, महिला स्वास्थ्य कर्मी राखी महाजन उपस्थित रहीं।
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यह है हीमोफीलिया के लक्षण
हीमोफीलिया बीमारी दिव्यांगता का कारण बन सकती है। इसके लक्षणों में दांत निकालते समय, रूट कैनाल थेरेपी में अत्यधिक खून बहना, जोड़ो में सूजन और
असहनीय पीड़ा होना, बच्चों के दांत टूटने और नये दांत निकलने में मसूड़े से लगातार रक्त स्राव और पेशाब के रास्ते खून बहना शामिल हैं।