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Himachal Weather: शिमला समेत कई जिलों में बारिश, गर्मी से तो मिली राहत लेकिन गेहूं की फसल पर संकट; जानें
Sun, 03 May 2026 01:57 PM IST
Ankesh Dogra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 03 May 2026 01:57 PM IST
सार
Himachal Weather Update In Hindi: हिमाचल प्रदेश में रविवार को कई जिलों में बारिश हो रही है। बारिश होने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है लेकिन गेहूं की फसल भीगने से खराब होने का खतरा बढ़ गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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मौसम अपडेट (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में रविवार को प्रदेश के जिलों में बारिश हो रही है। इससे तापमान में गिरावट हुई है और लोगों को तपिश से काफी राहत मिली है। शिमला की बात करें तो यहां फिर से लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। मई के महीने में भी ठंड महसूस हो रही है। रविवार सुबह से काले बादल छाए जिसके बाद झमाझम बारिश हुई।
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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से तीन मई को पूरे प्रदेश में येलो अलर्ट रहेगा। चार मई को कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर के लिए ऑरेंज तथा अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान बारिश, अंधड़ और ओलावृष्टि के आसार हैं। चोटियों पर बर्फबारी की भी संभावना है। आगामी 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। इसके बाद अगले 3 से 4 दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। राज्य के कई हिस्सों के अधिकतम तापमान में भी 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने के आसार हैं।
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ऊना में तेज हवाओं से उड़ी तिरपाल, खेतों में भीगी तूड़ी
उपतहसील जोल व आसपास के इलाकों में रविवार सुबह करीब 6:15 बजे अचानक मौसम ने करवट बदल ली। आसमान घनघोर काले बादलों से घिर गया और तेज अंधड़ चलने लगा। इसके साथ ही हल्की से मध्यम बारिश भी शुरू हो गई, जिससे एक ओर जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर किसानों की चिंता बढ़ गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर धूल भरी आंधी चली और पेड़ों की टहनियां भी टूटकर गिरीं। सुबह के समय आए इस बदलाव ने जनजीवन को कुछ समय के लिए प्रभावित किया, हालांकि तापमान में गिरावट आने से मौसम सुहावना हो गया।
लेकिन किसानों के लिए यह बारिश राहत से ज्यादा परेशानी लेकर आई। क्षेत्र में कुछ किसानों की गेहूं की फसल अभी भी खेतों में खड़ी है, जबकि बड़ी मात्रा में तूड़ी (पराली) के ढेर भी खुले खेतों में पड़े हुए हैं। किसानों ने तूड़ी को बचाने के लिए उसे तिरपाल से ढक रखा था, लेकिन तेज हवाओं के चलते कई जगहों पर तिरपाल उड़ गई, जिससे तूड़ी भीगने से खराब होने की संभावना बढ़ गई।
किसानों का कहना है कि अचानक आए इस अंधड़ और बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। भीगी हुई तूड़ी का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी कम हो जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, जिन किसानों की फसल अभी खेतों में खड़ी है, उन्हें भी गिरने और खराब होने का डर सता रहा है।
किसानों ने प्रशासन से मौसम की सटीक जानकारी समय रहते उपलब्ध कराने और नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजा देने की मांग की है। मौसम विभाग के अनुसार, क्षेत्र में अभी कुछ समय तक बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
उपतहसील जोल व आसपास के इलाकों में रविवार सुबह करीब 6:15 बजे अचानक मौसम ने करवट बदल ली। आसमान घनघोर काले बादलों से घिर गया और तेज अंधड़ चलने लगा। इसके साथ ही हल्की से मध्यम बारिश भी शुरू हो गई, जिससे एक ओर जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर किसानों की चिंता बढ़ गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर धूल भरी आंधी चली और पेड़ों की टहनियां भी टूटकर गिरीं। सुबह के समय आए इस बदलाव ने जनजीवन को कुछ समय के लिए प्रभावित किया, हालांकि तापमान में गिरावट आने से मौसम सुहावना हो गया।
लेकिन किसानों के लिए यह बारिश राहत से ज्यादा परेशानी लेकर आई। क्षेत्र में कुछ किसानों की गेहूं की फसल अभी भी खेतों में खड़ी है, जबकि बड़ी मात्रा में तूड़ी (पराली) के ढेर भी खुले खेतों में पड़े हुए हैं। किसानों ने तूड़ी को बचाने के लिए उसे तिरपाल से ढक रखा था, लेकिन तेज हवाओं के चलते कई जगहों पर तिरपाल उड़ गई, जिससे तूड़ी भीगने से खराब होने की संभावना बढ़ गई।
किसानों का कहना है कि अचानक आए इस अंधड़ और बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। भीगी हुई तूड़ी का उपयोग पशुओं के चारे के रूप में भी कम हो जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, जिन किसानों की फसल अभी खेतों में खड़ी है, उन्हें भी गिरने और खराब होने का डर सता रहा है।
किसानों ने प्रशासन से मौसम की सटीक जानकारी समय रहते उपलब्ध कराने और नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजा देने की मांग की है। मौसम विभाग के अनुसार, क्षेत्र में अभी कुछ समय तक बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है, ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
सोलन में तेज अधड़ व तूफान के साथ बारिश शुरू
सोलन शहर वह आसपास के क्षेत्र में तेज अंधड व तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई है। सुबह करीब 8:00 बजे अचानक अंधेरा छा गया, वहीं इस दौरान तेज अंदर व तूफान आया उसके बाद बारिश का कर्मचारी हो गया है। अभी भी तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दो दिनों तक मौसम खराब रहने के आसार हैं। इस दौरान जिले भर में बारिश भी बताई गई है।
सोलन शहर वह आसपास के क्षेत्र में तेज अंधड व तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई है। सुबह करीब 8:00 बजे अचानक अंधेरा छा गया, वहीं इस दौरान तेज अंदर व तूफान आया उसके बाद बारिश का कर्मचारी हो गया है। अभी भी तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दो दिनों तक मौसम खराब रहने के आसार हैं। इस दौरान जिले भर में बारिश भी बताई गई है।
मंडी की लडभड़ोल तहसील में बेमौसमी बारिश बनी आफत, गंदम की फसलें बर्बाद
तहसील लडभड़ोल क्षेत्र में रविवार को हुई झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल दिया है। ठंडी हवाओं और बारिश के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं इस बेमौसमी बारिश ने किसानों और बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। खेतों में लगातार पानी जमा होने और नमी बढ़ने से गंदम की फसलें खराब होने लगी हैं।
तहसील लडभड़ोल क्षेत्र में रविवार को हुई झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल दिया है। ठंडी हवाओं और बारिश के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं इस बेमौसमी बारिश ने किसानों और बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। खेतों में लगातार पानी जमा होने और नमी बढ़ने से गंदम की फसलें खराब होने लगी हैं।
जानकारी के अनुसार, तहसील क्षेत्र में बेमौसमी बारिश से गंदम की आधा दर्जन फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। क्षेत्र के किसान विजय,रवि चौहान राजेश ठाकुर आदि ने बताया कि बारिश से अब उनकी फसलों को भारी नुकसान होने लगा है। उन्होंने कहा कि गंदम की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। अब किसान बस बारिश रुकने का ही इंतजार कर रहे हैं, ताकि खेतों में बची हुई शेष फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सके। किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता देख स्थानीय किसानों ने कृषि विभाग और प्रदेश सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
किसानों ने मांग की है कि बारिश के कारण उनकी गंदम की खराब हुई फसलों का उचित आकलन करवाया जाए और प्रभावित किसानों के लिए जल्द से जल्द मुआवजे का प्रावधान किया जाए। इस विषय में कृषि विभाग चौंतड़ा की विषयवाद विशेषज्ञ सोनम कुमारी ने बताया कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अपनी फसलों का बीमा करवाया हुआ है, उन किसानों के लिए मुआवजे का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने बताया कि विभाग को फिलहाल नुकसान की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिली है।
किसानों ने मांग की है कि बारिश के कारण उनकी गंदम की खराब हुई फसलों का उचित आकलन करवाया जाए और प्रभावित किसानों के लिए जल्द से जल्द मुआवजे का प्रावधान किया जाए। इस विषय में कृषि विभाग चौंतड़ा की विषयवाद विशेषज्ञ सोनम कुमारी ने बताया कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अपनी फसलों का बीमा करवाया हुआ है, उन किसानों के लिए मुआवजे का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने बताया कि विभाग को फिलहाल नुकसान की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिली है।
1901 के बाद से अप्रैल में 47वीं सबसे अधिक बारिश
हिमाचल प्रदेश में 1901 के बाद से इस साल अप्रैल में 47वीं सबसे अधिक वर्षा (66.3 मिलीमीटर) दर्ज की गई। 1901 के बाद से अप्रैल महीने में अब तक की सर्वाधिक वर्षा बारिश 1908 में 181.7 मिलीमीटर दर्ज की गई थी। इस साल अप्रैल में सामान्य से 4 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। महीने के लिए 64 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया लेकिन इस बार 66.3 मिलीमीटर बारिश हुई। 24, 26 और 27 अप्रैल को ऊना और कुल्लू, 24 और 25 अप्रैल को कांगड़ा और 24 अप्रैल को मंडी जिले में लू का प्रकोप देखा गया। 25 अप्रैल को ऊना जिले में भीषण लू का प्रकोप देखा गया।
हिमाचल प्रदेश में 1901 के बाद से इस साल अप्रैल में 47वीं सबसे अधिक वर्षा (66.3 मिलीमीटर) दर्ज की गई। 1901 के बाद से अप्रैल महीने में अब तक की सर्वाधिक वर्षा बारिश 1908 में 181.7 मिलीमीटर दर्ज की गई थी। इस साल अप्रैल में सामान्य से 4 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। महीने के लिए 64 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया लेकिन इस बार 66.3 मिलीमीटर बारिश हुई। 24, 26 और 27 अप्रैल को ऊना और कुल्लू, 24 और 25 अप्रैल को कांगड़ा और 24 अप्रैल को मंडी जिले में लू का प्रकोप देखा गया। 25 अप्रैल को ऊना जिले में भीषण लू का प्रकोप देखा गया।
नेशनल हाईवे चंडीगढ़-देहरादून पर बोहलियों के समीप गिरा पेड़
नेशनल हाईवे चंडीगढ़-देहरादून पर बोहलियों के समीप गिरा पेड़जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। लगातार बारिश व तूफान से जनजीवन प्रभावित हुआ है। सुबह अचानक आसमान में बादल छा गए। इसके बाद सुबह के समय अंधेरा होने से रात जैसा मौसम हो गया। तेज तूफान से कई जगह पेड़ गिरने की जानकारी मिली है। इसी प्रकार नेशनल हाईवे चंडीगढ़-देहरादून पर बोहलियों के समीप तूफान से अचानक एक पेड़ गिर गया।
गनीमत ये रही कि इस दौरान कोई वाहन या राहगीर इसकी चपेट में नहीं आया। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। पेड़ गिरने के बाद काफी देर तक हाईवे पर ट्रैफिक जाम लगा रहा। आसपास के लोगों सहित राहगीरों ने पेड़ को एक तरफ किया। इसके बाद हाईवे बहाल हुआ। मार्ग के दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई।
नेशनल हाईवे चंडीगढ़-देहरादून पर बोहलियों के समीप गिरा पेड़जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। लगातार बारिश व तूफान से जनजीवन प्रभावित हुआ है। सुबह अचानक आसमान में बादल छा गए। इसके बाद सुबह के समय अंधेरा होने से रात जैसा मौसम हो गया। तेज तूफान से कई जगह पेड़ गिरने की जानकारी मिली है। इसी प्रकार नेशनल हाईवे चंडीगढ़-देहरादून पर बोहलियों के समीप तूफान से अचानक एक पेड़ गिर गया।
गनीमत ये रही कि इस दौरान कोई वाहन या राहगीर इसकी चपेट में नहीं आया। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। पेड़ गिरने के बाद काफी देर तक हाईवे पर ट्रैफिक जाम लगा रहा। आसपास के लोगों सहित राहगीरों ने पेड़ को एक तरफ किया। इसके बाद हाईवे बहाल हुआ। मार्ग के दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई।