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बादल फटने की आवाज से सहमे लोग, मची अफरातफरी
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मणिकर्ण घाटी के कटागला में में बादल फटने के बाद हुआ भुमिकटान।
- फोटो : Kullu
कुल्लू। जिला कुल्लू में बरसात लोगों के लिए आफत बन गई है। दो दिनों से हो रही बारिश से घाटी का जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। जिले की ऊझी घाटी के बाद अब शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे मणिकर्ण घाटी की कसोल पंचायत के कटागला गांव में भारी बारिश से बादल फट गया, जिससे पूरे गांव में अफरातफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए साथ लगती एक ऊंची पहाड़ी पर जा पहुंचे। बादल फटने की आवाज इतनी भयानक थी कि लोग डर गए।
महिलाओं और बच्चों के साथ ग्रामीण करीब छह घंटे तक पहाड़ी पर रहे। लोग तब तक वहां रहे जब तक नाले का जलस्तर कम नहीं हुआ। हालांकि हादसे में किसी बड़े जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। कटागला गांव के कई घरों व सेब के बगीचों में पानी घुस गया है। बादल फटने के बाद कटागला नाले में आई बाढ़ का रौद्र रूप देखकर लोग दहशत में आ गए। बादल फटने के दौरान हुई तेज गर्जना के बीच लोग अपने परिवार के सदस्यों को सुरक्षित जगह पर ले गए। ग्रामीण नौमी राम ठाकुर, गोविंद राम, श्याम लाल, शिव राम, दक्ष ठाकुर, ओम प्रकाश, वेद राम, उदेश ठाकुर, चंद्रपाल तथा टेक सिंह ने कहा कि बाढ़ आने से गांव को जोड़ने वाली पानी की पाइप तहस नहस हो गई है, जिससे गांव में पीने का पानी संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि गांव के कई घरों को अब बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले साल भी 12 अगस्त को कटागला में बादल फटने के बाद गांव में नाले के किनारे लगाए गए क्रेटवाल भी बह गए थे। गांव के पास नाले के बीचोंबीच एक विशाल चट्टान को नहीं भी हटाया गया, जिसकी वजह से बाढ़ का मलबा गांव और बगीचे में घुस गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से गांव के लोग सहमे हुए हैं। उनको बरसात को डर सताने लगा है।
कुल्लू-मनाली वामतट मार्ग तीन घंटे बंद
काईस नाले में भी बारिश से बाढ़ आने पर कुल्लू-मनाली वामतट मार्ग करीब तीन घंटों तक बंद रहा। नाले का पानी एकाएक बढ़ गया और दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। पानी घटने के बाद ही मार्ग से वाहनों की आवाजाही शुरू हो पाई। कटागला गांव पहुंचे तहसीलदार भुंतर प्रशांत ठाकुर ने कहा बादल फटने से आई बाढ़ से किसी तरह का जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। इसको लेकर ग्रामीणों के क्या सुझाव व मांगे थी, उनको सुना गया है।
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महिलाओं और बच्चों के साथ ग्रामीण करीब छह घंटे तक पहाड़ी पर रहे। लोग तब तक वहां रहे जब तक नाले का जलस्तर कम नहीं हुआ। हालांकि हादसे में किसी बड़े जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। कटागला गांव के कई घरों व सेब के बगीचों में पानी घुस गया है। बादल फटने के बाद कटागला नाले में आई बाढ़ का रौद्र रूप देखकर लोग दहशत में आ गए। बादल फटने के दौरान हुई तेज गर्जना के बीच लोग अपने परिवार के सदस्यों को सुरक्षित जगह पर ले गए। ग्रामीण नौमी राम ठाकुर, गोविंद राम, श्याम लाल, शिव राम, दक्ष ठाकुर, ओम प्रकाश, वेद राम, उदेश ठाकुर, चंद्रपाल तथा टेक सिंह ने कहा कि बाढ़ आने से गांव को जोड़ने वाली पानी की पाइप तहस नहस हो गई है, जिससे गांव में पीने का पानी संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि गांव के कई घरों को अब बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले साल भी 12 अगस्त को कटागला में बादल फटने के बाद गांव में नाले के किनारे लगाए गए क्रेटवाल भी बह गए थे। गांव के पास नाले के बीचोंबीच एक विशाल चट्टान को नहीं भी हटाया गया, जिसकी वजह से बाढ़ का मलबा गांव और बगीचे में घुस गया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ से गांव के लोग सहमे हुए हैं। उनको बरसात को डर सताने लगा है।
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कुल्लू-मनाली वामतट मार्ग तीन घंटे बंद
काईस नाले में भी बारिश से बाढ़ आने पर कुल्लू-मनाली वामतट मार्ग करीब तीन घंटों तक बंद रहा। नाले का पानी एकाएक बढ़ गया और दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। पानी घटने के बाद ही मार्ग से वाहनों की आवाजाही शुरू हो पाई। कटागला गांव पहुंचे तहसीलदार भुंतर प्रशांत ठाकुर ने कहा बादल फटने से आई बाढ़ से किसी तरह का जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। इसको लेकर ग्रामीणों के क्या सुझाव व मांगे थी, उनको सुना गया है।
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