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भांग से तैयार होंगे हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद : सुंदर
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जिले में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए की जाएगी भांग की खेती
औषधीय प्रयोजन के लिए एक बीघा पर एक लाख रुपये फीस
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। प्रदेश में भांग की खेती को वैध करने के लिए कानून बनाया गया है। कुल्लू में भांग की खेती मुख्य रूप से टेक्सटाइल उद्योग के लिए की जाएगी। इससे कपड़े, शॉल, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह बात विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने शुक्रवार को कही।
उन्होंने कहा कि औषधीय उपयोग के लिए भी अब भांग की खेती कानूनी तरीके से की जा सकेगी। किसानों को इसके लिए बीज हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय और बागवानी विश्वविद्यालय के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भांग की खेती को लेकर किसी तरह की भ्रांति नहीं होनी चाहिए। यह पूरी तरह नियंत्रित और लाइसेंस आधारित प्रक्रिया होगी।
सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि सामान्य खेती के लिए एक बीघा भूमि पर 500 रुपये और औषधीय प्रयोजन के लिए एक बीघा पर एक लाख रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अगुवाई में गठित सर्वदलीय कमेटी ने देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर इस विषय पर विस्तृत कानूनी अध्ययन किया था। अध्ययन के बाद सर्वदलीय कमेटी ने सीमित क्षेत्र में भांग की खेती की अनुमति देने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि खेती को निर्धारित नियमों और लाइसेंस की शर्तों के तहत ही किया जा सकेगा।
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औषधीय प्रयोजन के लिए एक बीघा पर एक लाख रुपये फीस
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। प्रदेश में भांग की खेती को वैध करने के लिए कानून बनाया गया है। कुल्लू में भांग की खेती मुख्य रूप से टेक्सटाइल उद्योग के लिए की जाएगी। इससे कपड़े, शॉल, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह बात विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने शुक्रवार को कही।
उन्होंने कहा कि औषधीय उपयोग के लिए भी अब भांग की खेती कानूनी तरीके से की जा सकेगी। किसानों को इसके लिए बीज हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय और बागवानी विश्वविद्यालय के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भांग की खेती को लेकर किसी तरह की भ्रांति नहीं होनी चाहिए। यह पूरी तरह नियंत्रित और लाइसेंस आधारित प्रक्रिया होगी।
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सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि सामान्य खेती के लिए एक बीघा भूमि पर 500 रुपये और औषधीय प्रयोजन के लिए एक बीघा पर एक लाख रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अगुवाई में गठित सर्वदलीय कमेटी ने देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर इस विषय पर विस्तृत कानूनी अध्ययन किया था। अध्ययन के बाद सर्वदलीय कमेटी ने सीमित क्षेत्र में भांग की खेती की अनुमति देने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि खेती को निर्धारित नियमों और लाइसेंस की शर्तों के तहत ही किया जा सकेगा।
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