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कोविड कर्मियों को बेरोजगार बना रही सरकार : लच्छी
Sun, 05 May 2024 04:06 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 05 May 2024 04:06 PM IST
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कोरोना काल में प्रदेशभर में 2,000 कर्मचारियों ने दी थी सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। कोरोना काल में पूर्व सरकार ने प्रदेश में करीब 2000 कर्मचारियों की नियुक्ति विभिन्न कोविड केयर सेंटरों में की थी। वर्तमान सरकार ने सितंबर 2023 में कोविड कर्मचारियों की सेवाएं यह आश्वासन देकर समाप्त कर दीं कि दोबारा नियुक्ति की जाएगी। सात महीने का समय बीत जाने के उपरांत भी कोविड कर्मचारियों के हक में कोई फैसला नहीं लिया गया है।
सरकार सैकड़ों कर्मचारियों को बेरोजगार बना रही है। आश्वासन के बाद भी दोबारा नियुक्ति की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। प्रदेश सरकार चुनाव आते ही गारंटियां दे रही है, लेकिन कोविड कर्मचारियों के रोजगार की गारंटी कौन लेगा। यह बात रविवार को कोविड कर्मचारी यूनियन कुल्लू के अध्यक्ष लच्छी राम ने कही।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में कोरोना काल में 50 कर्मचारियों को भर्ती किया गया था। इनमें स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आदि शामिल थे। कोरोना संक्रमण का खतरा टलते ही प्रदेश सरकार ने कोविड कर्मचारियों को सेवाओं से हटा दिया है। सरकार का यह फैसला न्यायसंगत नहीं है। कोरोना महामारी में जब एक इंसान दूसरे इंसान से डरता था, तब कोविड कर्मचारियों ने सेवाएं दीं। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। कोरोना काल में पूर्व सरकार ने प्रदेश में करीब 2000 कर्मचारियों की नियुक्ति विभिन्न कोविड केयर सेंटरों में की थी। वर्तमान सरकार ने सितंबर 2023 में कोविड कर्मचारियों की सेवाएं यह आश्वासन देकर समाप्त कर दीं कि दोबारा नियुक्ति की जाएगी। सात महीने का समय बीत जाने के उपरांत भी कोविड कर्मचारियों के हक में कोई फैसला नहीं लिया गया है।
सरकार सैकड़ों कर्मचारियों को बेरोजगार बना रही है। आश्वासन के बाद भी दोबारा नियुक्ति की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। प्रदेश सरकार चुनाव आते ही गारंटियां दे रही है, लेकिन कोविड कर्मचारियों के रोजगार की गारंटी कौन लेगा। यह बात रविवार को कोविड कर्मचारी यूनियन कुल्लू के अध्यक्ष लच्छी राम ने कही।
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उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में कोरोना काल में 50 कर्मचारियों को भर्ती किया गया था। इनमें स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आदि शामिल थे। कोरोना संक्रमण का खतरा टलते ही प्रदेश सरकार ने कोविड कर्मचारियों को सेवाओं से हटा दिया है। सरकार का यह फैसला न्यायसंगत नहीं है। कोरोना महामारी में जब एक इंसान दूसरे इंसान से डरता था, तब कोविड कर्मचारियों ने सेवाएं दीं। संवाद
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